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Ballia News: तीन दिन से अधिक समय तक आयोजित होने वाले मेलों की मांगी सूची, बनेगी नीति
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इंदरपुर। धर्मार्थ कार्य विभाग ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले पौराणिक, धार्मिक मेलों के आयोजन के लिए नीति लाने की तैयारी में है। इसके लिए शासन स्तर से ग्रामीण क्षेत्रों में तीन या तीन दिनों से अधिक समय तक आयोजित होने वाले पौराणिक, धार्मिक मेलों के संबंध में सूचना मांगी गई है। इसके बाद शासन नीति को सार्वजनिक रूप से घोषित करेगा।
शासन के पत्र के अनुपालन में जिला पंचायत राज अधिकारी श्रवण कुमार सिंह ने सभी सहायक विकास अधिकारी पंचायत को पत्र भेज कर तीन दिन के भीतर पूर्ण विवरण उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया है। शासन स्तर से जो सूचनाएं मांगी गई है उसमें मेले का नाम, मेला स्थल का नाम, मेले में आने वाले व्यक्तियों की अनुमानित संख्या, मेले के लिए जिन स्रोतों से धन प्राप्त होता है उसका विवरण, मेले के आयोजन में होने वाला अनुमानित व्यय शामिल है। नगरा के एडीओ पंचायत प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि शासनादेश के अनुसार सभी सचिवों से सूची मांगी गई है।
बलिया में ददरी मेला, सुदिष्ट बाबा का धनुष यज्ञ मेला आदि कई ऐसा आयोजन हैं तो पूर्वांचल और उसके बाहर तक चर्चित है। काफी दिनों के लिए इनका आयोजन भी किया जाता है। दोनों के अलावा कई स्थानों पर ऐसे मेले लगते हैं। शासन से मदद नहीं मिलने के कारण ये अपनी पहचान खोते जा रहे है। यदि इनके आयोजन के लिए कोई नीति बनती है तो इन्हें संजीवनी मिल सकती है।
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शासन के पत्र के अनुपालन में जिला पंचायत राज अधिकारी श्रवण कुमार सिंह ने सभी सहायक विकास अधिकारी पंचायत को पत्र भेज कर तीन दिन के भीतर पूर्ण विवरण उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया है। शासन स्तर से जो सूचनाएं मांगी गई है उसमें मेले का नाम, मेला स्थल का नाम, मेले में आने वाले व्यक्तियों की अनुमानित संख्या, मेले के लिए जिन स्रोतों से धन प्राप्त होता है उसका विवरण, मेले के आयोजन में होने वाला अनुमानित व्यय शामिल है। नगरा के एडीओ पंचायत प्रमोद कुमार सिंह का कहना है कि शासनादेश के अनुसार सभी सचिवों से सूची मांगी गई है।
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बलिया में ददरी मेला, सुदिष्ट बाबा का धनुष यज्ञ मेला आदि कई ऐसा आयोजन हैं तो पूर्वांचल और उसके बाहर तक चर्चित है। काफी दिनों के लिए इनका आयोजन भी किया जाता है। दोनों के अलावा कई स्थानों पर ऐसे मेले लगते हैं। शासन से मदद नहीं मिलने के कारण ये अपनी पहचान खोते जा रहे है। यदि इनके आयोजन के लिए कोई नीति बनती है तो इन्हें संजीवनी मिल सकती है।
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