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प्रशिक्षण से प्रशिक्षुओं में आती है निखार
Ballia
Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
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दुबहर। प्रशिक्षण एक ऐसा माध्यम है जो व्यक्ति के अंदर छिपे गुणों का निखारने का काम करता है। प्रशिक्षण से प्रतिभागी कुशल एवं अच्छे प्रशिक्षक तैयार होते हैं। उक्त बातें बीआरसी दुबहर पर शनिवार को शिक्षामित्रों के तृतीय सेमेस्टर के प्रथम काउंसिलिंग के समापन पर विज्ञान के प्रशिक्षक विजय प्रकाश गुप्ता ने कही।
ब्लाक संसाधन केंद्र दुबहर पर बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रथम बैच के शिक्षामित्रों को संबोधित करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि तृतीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षमित्रों को विद्यालयों में विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के संदर्भ में अध्ययन करना है। साथ ही उनको पठन पाठन के मुख्य धारा में जोड़ने केेे लिए सामाजिक बिंदुओं पर जोर देना है। कहा कि बच्चों के समय-समय पर शैक्षिक मापन व मूल्यांकन आदि भी करना है। उन्हाेंने तृतीय सेमेस्टर के विस्तृत कार्यो के विषय में बताया कि प्रशिक्षु शिक्षामित्रों को उर्दू में निबंध लेखन सब्जियों को व्यवाहारिक रूप में उगाना, सुराही बनाना, कंघी करना, रुमाल बनाना, गजलों का संकलन, खूंटी द्वारा ताना करना, नोटबुक, खिलौने आदि बनाने होंगे। इस अवसर पर अंग्रेजी के प्रशिक्षक डा. अब्दुल अव्वल ने शिक्षामित्रों के अंग्रेजी विषय से संबंधित सत्रीय कार्यों के विषय में बताया। गणित के प्रशिक्षक श्रीकांत दुबे ने गणित से संबंधित प्रोजेक्ट कार्यों के बारे में बताया। इस मौके पर अजय पांडेय, चंद्रभान सिंह, पंकज दुबे, सुरेंद्र राम, शेषनाथ, वीना राव, रागिनी सिंह, सूर्यप्रताप यादव, मो. वसीम, सुनील वर्मा, अरविंद कुमार, ललित मोहन सिंह, संतोष उपाध्याय, अभिलाषा पांडेय, चौधरी अनिल सिंह, सरिता, चंद्रगुप्त, जनार्दन प्रसाद, भोला आदि मौजूद थे।
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ब्लाक संसाधन केंद्र दुबहर पर बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रथम बैच के शिक्षामित्रों को संबोधित करते हुए श्री गुप्ता ने कहा कि तृतीय सेमेस्टर के पाठ्यक्रम के अनुसार शिक्षमित्रों को विद्यालयों में विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों के संदर्भ में अध्ययन करना है। साथ ही उनको पठन पाठन के मुख्य धारा में जोड़ने केेे लिए सामाजिक बिंदुओं पर जोर देना है। कहा कि बच्चों के समय-समय पर शैक्षिक मापन व मूल्यांकन आदि भी करना है। उन्हाेंने तृतीय सेमेस्टर के विस्तृत कार्यो के विषय में बताया कि प्रशिक्षु शिक्षामित्रों को उर्दू में निबंध लेखन सब्जियों को व्यवाहारिक रूप में उगाना, सुराही बनाना, कंघी करना, रुमाल बनाना, गजलों का संकलन, खूंटी द्वारा ताना करना, नोटबुक, खिलौने आदि बनाने होंगे। इस अवसर पर अंग्रेजी के प्रशिक्षक डा. अब्दुल अव्वल ने शिक्षामित्रों के अंग्रेजी विषय से संबंधित सत्रीय कार्यों के विषय में बताया। गणित के प्रशिक्षक श्रीकांत दुबे ने गणित से संबंधित प्रोजेक्ट कार्यों के बारे में बताया। इस मौके पर अजय पांडेय, चंद्रभान सिंह, पंकज दुबे, सुरेंद्र राम, शेषनाथ, वीना राव, रागिनी सिंह, सूर्यप्रताप यादव, मो. वसीम, सुनील वर्मा, अरविंद कुमार, ललित मोहन सिंह, संतोष उपाध्याय, अभिलाषा पांडेय, चौधरी अनिल सिंह, सरिता, चंद्रगुप्त, जनार्दन प्रसाद, भोला आदि मौजूद थे।
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