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कहीं नक्सली आतंकवाद की आहट तो नहीं

Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
Ballia
Ballia Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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बलिया। जिस तरह कुसहर ग्राम सभा के अतरडहिया गांव में पूर्व प्रधान की हत्या की घटना को अंजाम दिया गया, उससे प्रतीत हो रहा है कि जनपद में नक्सली पहुंच गए हैं। अपनी गतिविधियों से लोगों में दहशत फैलाने के उद्देश्य से ही रविवार को उन्होंने पहले पूरे गांव की घेरेबंदी की और फिर पूर्व प्रधान के घर पहुंच उन्हें निशाना बना गोलियां चलाईं और फिर मर जाने की पुष्टि भी की। उन्होंने पेट्रोल छिड़ककर वाहनों को आग के हवाले किया। ‘माओवाद जिंदाबाद के नारे लगाना’ और घटना स्थल पर पर्चे फेंकना आदि कुछ इसी तरह के संकेत दे रहे हैं, जिस तरह नक्सली नक्सल प्रभावित राज्यों में दहशत फैलाते आए हैं। वहीं पुलिस नक्सली गतिविधियों को एक सिरे से नकार दे रही है।
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प्रशासनिक अफसर रविवार को ‘डाला छठ’ पर सुरक्षा की तैयारी में जुटे थे। इसी बीच सहतवार थाना क्षेत्र के अतरडरिया गांव में गोलियों की तड़तड़ाहट ने सबकी नींद हराम कर दी। कतिपय लोगों ने सपा से जुड़ीं पूर्व प्रधान को गोलियों से छलनी कर दिया। हत्या के बाद जिस तरह के नारे लगा पर्चियां बांटी गईं, उससे नक्सलियों के जिले में पहुंचने की आहट लोगों ने महसूस किया। वहीं पुलिस प्रशासन इस दिशा में नक्सली गतिविधियों को शिथिल मान सोचना बंद कर चुकी है। अतरडरिया गांव पहले भी नक्सली गतिविधियों के लिए जाना जाता रहा है। गांव में लंबे समय से रह रहे विजय नामक नक्सली की हत्या ग्रामीणों ने वर्ष 2001 में कर दी थी। उस समय गांव की प्रधान फूलमती देवी थी। विजय की हत्या के बाद नक्सली प्रधान को अपना दुश्मन मान बैठे थे। उस समय नक्सली गतिविधियों को खत्म करने के लिए ग्राम प्रधान समेत ग्रामीणों ने ऐसा कदम उठाया था। विजय की मौत का बदला लेनेे के लिए नक्सलियों ने वर्ष 2001 में ही गायघाट के पास ग्राम प्रधान फूलमती व उनके पति मुसाफिर पर जानलेवा हमला बोल दिया। जिसमें मुसाफिर को गोली लग गई थी। हमले के बाद नक्सलियों को सहतवार थाना क्षेत्र में पुलिस ने घेरेबंदी कर मुठभेड़ में मार गिराया था। पुन: 2002 में मुड़िकटवा ताल में मुसाफिर पर हमला बोला गया, लेकिन वह बाल-बाल बच गए। इसके अलावा कई घटनाएं हुई जिसमें नक्सलियों की संलिप्तता बताई गई है। हर बार पुलिस ने नक्सली गतिविधियों के न होने की बात कह फाइल बंद कर दी। शहर कोतवाली थाने के सहरसपाली गांव निवासी सोहन सिंह पुत्र स्व. राधा गोविंद सिंह की दो नवंबर 2008 में नक्सलियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। वहां भी हूबहू नक्सलियों ने माओवाद जिंदाबाद के नारे लगाए।
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