{"_id":"57-80866","slug":"Ballia-80866-57","type":"story","status":"publish","title_hn":"चांद दिखाई देने के साथ्ा ही मजलिस आैर मातम शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चांद दिखाई देने के साथ्ा ही मजलिस आैर मातम शुरू
Ballia
Updated Sat, 17 Nov 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
रसड़ा।चांद दिखाई देने के साथ ही शिया कसबे में शिया और सुन्नी मुसलमान ने मोहर्रम मनाना शुरू कर दिए। शिया मुसलमानों के यहां मजलिसाें और मातम का सिलसिला शुरू होने के साथ ही मुहर्रम के दौरान चांद से नौवीं मुहर्रम तक प्रतिदिन चार मजलिसें होती हैं।
पहली मजलिस अपराह्न चार बजे स्वर्गीय सैयद अंसार हुसैन मिशन रोड के मकान पर तथा रात्रि आठ बजे स्वर्गीय सैयद फखरूल हसन एवं शमसुल हसन बैंक वाली गली में तथा आखिरी मजलिस सैयद अख्तर हुसैन के मकान इमाम वारगाह में होती है। मुख्य कार्यक्रम चार मुहर्रम को मिशन रोड स्थित करबला में हजरत अली असगर की याद में शहीद झूला निकलता है। साथ ही मुहर्रम को कदीमी जुलूस मेंहदी एवं आठवीं मुहर्रम को अलम मुबारक का जुलूस बैंक गली से निकलता है। यह जुलूस रात में नौ बजे से शुरू होकर देर रात करबला पर संपन्न होता है। नौवीं मुहर्रम को रात्रि में ताजियों को चौक पर रखा जाता है और मजलिस के उपरांत 11 बजे रात्रि में शहीदों की याद में नौ जवान, बच्चे दहकते हुए अंगारे पर चलते हैं। यह कार्यक्रम स्वर्गीय शमसुल हसन के इमामबाड़ा के तहन में होता है। 10वीं मुहर्रम को सुबह से ही जुलूस निकलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मुख्य जुलूस में ताजिया शामिल किया जाता है।
बैंक गली स्थित इमाम बारगाह से जुलूस निकलकर मुख्य मार्गों से होता हुआ करबला पर ताजिया दफन के साथ संपन्न होता है। इस दौरान इस वर्ष मजलिसों को वाराणसी से आए हुए मौलाना सैयद मुजाहिद हुसैन साहब एवं जामिया तबलीग लखनऊ के तालीब इल्म मौलाना सैयद सदीह अब्बास एवं मौलाना मोहम्मद सादिक साहब संबोधित करते हैं। शिया मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष सैयद मुजतबरा हुसैन ने बताया कि इस साल भी परंपरागत जुलूस व कार्यक्रम संपन्न कराने के लिए प्रशासन से सफाई, रोशनी एवं पुलिस की व्यवस्था करने की अपील की है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पहली मजलिस अपराह्न चार बजे स्वर्गीय सैयद अंसार हुसैन मिशन रोड के मकान पर तथा रात्रि आठ बजे स्वर्गीय सैयद फखरूल हसन एवं शमसुल हसन बैंक वाली गली में तथा आखिरी मजलिस सैयद अख्तर हुसैन के मकान इमाम वारगाह में होती है। मुख्य कार्यक्रम चार मुहर्रम को मिशन रोड स्थित करबला में हजरत अली असगर की याद में शहीद झूला निकलता है। साथ ही मुहर्रम को कदीमी जुलूस मेंहदी एवं आठवीं मुहर्रम को अलम मुबारक का जुलूस बैंक गली से निकलता है। यह जुलूस रात में नौ बजे से शुरू होकर देर रात करबला पर संपन्न होता है। नौवीं मुहर्रम को रात्रि में ताजियों को चौक पर रखा जाता है और मजलिस के उपरांत 11 बजे रात्रि में शहीदों की याद में नौ जवान, बच्चे दहकते हुए अंगारे पर चलते हैं। यह कार्यक्रम स्वर्गीय शमसुल हसन के इमामबाड़ा के तहन में होता है। 10वीं मुहर्रम को सुबह से ही जुलूस निकलने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मुख्य जुलूस में ताजिया शामिल किया जाता है।
विज्ञापन
बैंक गली स्थित इमाम बारगाह से जुलूस निकलकर मुख्य मार्गों से होता हुआ करबला पर ताजिया दफन के साथ संपन्न होता है। इस दौरान इस वर्ष मजलिसों को वाराणसी से आए हुए मौलाना सैयद मुजाहिद हुसैन साहब एवं जामिया तबलीग लखनऊ के तालीब इल्म मौलाना सैयद सदीह अब्बास एवं मौलाना मोहम्मद सादिक साहब संबोधित करते हैं। शिया मुहर्रम कमेटी के अध्यक्ष सैयद मुजतबरा हुसैन ने बताया कि इस साल भी परंपरागत जुलूस व कार्यक्रम संपन्न कराने के लिए प्रशासन से सफाई, रोशनी एवं पुलिस की व्यवस्था करने की अपील की है।
विज्ञापन