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अवैध शराब अपराध की जड़

Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
Ballia
Ballia Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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सिकंदरपुर। पिछले दिनों पुलिस कप्तान, सर्किल के थानाध्यक्षों, क्षेत्राधिकारी, क्षेत्रीय ग्राम प्रधान, जन प्रतिनिधियों के साथ ही सम्मानित जनता के बीच हुई बैठक के बाद अब स्थानीय लोगों की निगाहें प्रशासनिक आला अफसरों की उस मंत्रणा एवं प्रयासों की ओर टिक सी गई हैं जिसमे खुले रूप में कहा गया था कि अवैध शराब कारोबार पर नियंत्रण पाने के बाद किसी हद तक अपराधिक घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकता है। ग्रामीण मानते हैं कि शासन-प्रशासन की ओर से यदि इसपर अंकुश का कोई भी प्रयास होता है तो न सिर्फ इससे कच्ची शराब के अवैध धंधों पर रोक लगेगा बल्कि यह सामाजिक उन्मूलन की दिशा में एक अनूठा एवं सराहनीय प्रयास होगा।
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सिकंदरपुर तहसील क्षेत्र में गौर करें तो शराब की जलती भट्ठियों एवं इस धंधे के काले कारोबार से क्षेत्रीय जनता आजिज है। विभिन्न स्थानों पर शराबियों के उत्पात एवं उनके द्वारा अपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में तनिक देरी नहीं की जाती। फलत: इसी का परिणाम है कि आए दिन लूट, छिनैती, चोरी, मारपीट, छेड़छाड़ आदि वारदातों में इजाफा हुआ है। इसके पीछे एक प्रमुख वजह कच्ची शराब के अवैध ढंग से फल फूल रहे व्यवसाय को माना जा रहा है। अवैध शराब के कारोबारी पुलिस के लिए काफी दिनों से चुनौती बने हुए हैं। पिछले गुरुवार को पुलिस चौकी प्रांगण में एसपी बलिया लवकुमार, क्षेत्राधिकारी सूरत सिंह चौहान, विभिन्न थानों के थानाध्यक्षों आदि ने भी अवैध शराब कारोबारियों की संलिप्तता को स्वीकार किया था। यहां प्रशासनिक अधिकारियों ने जनप्रतिनिधि, ग्राम प्रधान, सैकड़ों ग्रामीणों के समक्ष इस बात को कबूल किया था कि शराब का अवैध व्यापार समाज में अपराधिक कैंसर को जन्म दे रहा है। अगर इस पर पुलिस के मार्फत नियंत्रण पाया जाता है तो किसी तरह अपराध में कमी आएगी। पुलिस का मानना है कि शराब पीकर एक सामान्य नागरिक भी नशे की हालत में अपराध को जन्म देता है। यही कारण है कि बहू-बेटियों का घरों से निकलना अब सुरक्षित नहीं रहा। पुलिस अधीक्षक ने इस बात की पैरवी की थी कि मुख्यालय पर अधिकारियों का आवास स्थापित होने से शहरी समस्याएं तो तुरंत संज्ञान में आ पाती हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से लंबी दूरी तय कर गांव वासियों को अपनी समस्याएं पहुंचाना टेढ़ी खीर साबित होती होगी। इस लिए यहां स्थानीय पुलिस एवं जिम्मेदारों का कर्त्तव्य है कि ऐसी किसी भी अवैध गतिविधियों एवं उससे ग्रामीणों की बढ़ने वाली मुश्किलों से निजात के लिए समर्पण का भाव अपनाएं।
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