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जिले में रसोई गैस की किल्लत से हाहाकार
Ballia
Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
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बलिया। नगर के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों रसोई गैस की किल्लत हो गई है। उपभोक्ता खाली सिलेंडर लेकर इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं। गैस वितरण की दुर्व्यवस्था के चलते दलालों की चांदी कट रही है। चोर बाजार में नौ सौ रुपये प्रति सिलेंडर लिया जा रहा है। इस स्थिति से आजिज उपभोक्ताओं में जबरदस्त नाराजगी है। उनका कहना है कि यह कार्य संचालकों की मिलीभगत से हो रहा है।
नगर के साथ ही सिकंदरपुर, बांसडीह, मनियर और चितबड़ागांव में इन दिनों घरेलू गैस के लिए उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबी लाइन के बाद भी गैस नहीं मिल रही है। सूत्रों की माने तो वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस आपूर्ति के 21 दिनों के बाद पर्ची कटती है और पर्ची कटने के एक माह के बाद कठिनाई के बीच गैस सुलभ हो पाता है।
ऐसे में एकबार की गैस प्राप्ति के बाद उपभोक्ता को एकबार के अवसर पर वंचित होना पड़ता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसी पर गैस उपलब्ध नहीं होता तो फिर चोर बाजार में आसानी से गैस कहां से मिल जाती है। चोर बाजार में निर्धारित मूल्य से दोगुना अधिक व वजन में कम होने से उपभोक्ता को दोहरी चपत लगती है।
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इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी का कहना है कि समय-समय पर गोदामों पर छापेमारी की जाती है। जहां भी आपूर्ति की शिकायत मिलती है उसके विरुद्ध जांचकर कार्रवाई की जाती है।
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नगर के साथ ही सिकंदरपुर, बांसडीह, मनियर और चितबड़ागांव में इन दिनों घरेलू गैस के लिए उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लंबी लाइन के बाद भी गैस नहीं मिल रही है। सूत्रों की माने तो वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस आपूर्ति के 21 दिनों के बाद पर्ची कटती है और पर्ची कटने के एक माह के बाद कठिनाई के बीच गैस सुलभ हो पाता है।
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ऐसे में एकबार की गैस प्राप्ति के बाद उपभोक्ता को एकबार के अवसर पर वंचित होना पड़ता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस एजेंसी पर गैस उपलब्ध नहीं होता तो फिर चोर बाजार में आसानी से गैस कहां से मिल जाती है। चोर बाजार में निर्धारित मूल्य से दोगुना अधिक व वजन में कम होने से उपभोक्ता को दोहरी चपत लगती है।
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इस संबंध में जिला पूर्ति अधिकारी का कहना है कि समय-समय पर गोदामों पर छापेमारी की जाती है। जहां भी आपूर्ति की शिकायत मिलती है उसके विरुद्ध जांचकर कार्रवाई की जाती है।