504 कैदियों का स्वास्थ्य और जेल सुरक्षा भगवान भरोसे

Ballia Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
बलिया। उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिला कारागारों में आए दिन हो रहे कैदियों के विद्रोह के बावजूद शासन की ओर से उनके निगरानी के मानकों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जिसका जिला कारागार बलिया एक बानगी है। यहां मानक 100 कैदियों पर 10 बंदीरक्षकों का है, लेकिन 504 कैदियों पर यह संख्या सिर्फ 31 है। यदि इस बीच कोई घटना होती है तो जेल प्रशासन को नाकाें चने चबाने पड़ सकते हैं। इतना ही नहीं तीन चिकित्सकों के मानक के बावजूद केवल एक ही चिकित्सक की तैनाती है। इससे बीमार कैदियों को परेशानियाें का सामना करना पड़ रहा है।
सूबे के जिला कारागार मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया से कैदियों को काफी उम्मीदें हैं। क्योंकि उन्होंने जेल की सुविधाओं को बेहतर करने की कोशिशें शुरू की हैं। कैदियों के स्वास्थ्य को देखते हुए उन्होंने डालडा की जगह रिफाइंड के प्रयोग का फरमान जारी कर दिया है।
ऐसे में जिला कारागार बलिया के बंदियों ने चिकित्सक की कमी को भी दूर करने की उम्मीद उनसे पाल ली है। गर्मी का मौसम होने से इन दिनों बीमारियों में इजाफा हो गया है। जिला कारागार के सूत्रों की मानें तो शनिवार को दो कैदी बीएचयू उपचार के लिए भेजे गए हैं। इसके अलावा बंदीरक्षकों की कमी से जेल प्रशासन हलाकान है। उनकी कमी से कैैदियों की निगरानी बेहतर ढंग से नहीं हो पा रही है। सलाखों के पीछे बंद कैदियों की निगरानी पूरी सजगता एवं सतर्कता से न होने पर कभी भी अप्रिय घटना होने की संभावना बनी रहती है। जेल प्रशासन को भी जिला कारागार की यह कमी खटक रही है। क्योंकि यह सिलसिला सालों से चला आ रहा है।

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