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दो साल में सुलझे सिर्फ 50 केस
Ballia
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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बैरिया। सरकारी मुकदमों की लंबी फाइलें देखना हो तो जिले के अंतिम छोर पर स्थित बैरिया तहसील में चलेें। यहां पीड़ित न्याय के लिए सालों से भटक रहे हैं। कई मामले तो ऐसे हैं जो पिछले 17 साल से लंबित हैं। तहसील मुख्यालय के एसडीएम कोर्ट में जहां 354 मामले लंबित हैं, वहीं तहसीलदार कोर्ट में 540 मामलों का सालों से निस्तारण नहीं हो सका है। हजारों खर्च के बाद भी लोग न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं।
बैरिया तहसील के एसडीएम कोर्ट में अक्तूबर 2010 से अब तक 403 मुकदमे दाखिल किए गए हैं, लेकिन अभी तक 50 मुकदमों का ही निस्तारण हो सका है। वर्तमान में 354 मुकदमे लंबित हैं। यही नहीं एसडीएम कोर्ट में 17 साल पुराना मुकदमा भी संचालित है। 1994 से तहसील क्षेत्र के शिवपुर गांव निवासी उधव बनाम धनेश्वर के नाम से मुकदमा चल रहा है। यह मामला किन कारणों से लंबित है यह पीड़ित पक्ष नहीं जानता। पीड़ित पक्ष का कहना है कि वह निरंतर अपनी निर्धारित तिथि को कोर्ट जाता है। इससे सरकारी महकमे सुनवाई एवं मामलों में निस्तारण साफ दिखाई दे रही है। एसडीएम कोर्ट में राजस्व से संबंधित 213 मामले, पुलिस विभाग के 96, सरकारी मुकदमे 19, बिजली, राशन दुकान एवं अन्य 74 मामले कोर्ट में चल रहे हैं। तहसीलदार कोर्ट पर नजर डालें तो यहां भी लंबित मुकदमों की फेहरिस्त लंबी है। कोर्ट में 540 मामले वर्तमान में चल रहे हैं। लेकिन एक भी मामले का निस्तारण नहीं हो सका है। इस कोर्ट में भी 12 साल पुराना बरासत का मुकदमा अभी भी चल रहा है। क्षेत्र के हनुमानगंज निवासी राम दर्शन बनाम उधरतीया का मुकदमा लंबित है। मुकदमों के बोझ तले दबे कोर्टों की स्थिति बेहतर नहीं है। आम जनता सालों से फैसले के इंतजार में चक्कर काटने के लिए मजबूर है। उधर इस संबंध में उपजिलाधिकारी बैरिया शीतला प्रसाद यादव ने बताया कि मुकदमों की अधिकता, वकीलों द्वारा कार्य दिवस पर बहिष्कार, हड़ताल एवं वादी-प्रतिवादी द्वारा मुकदमों में आपत्ति डालकर कर समय को आगे खींचना ही निस्तारण में देरी का कारण है।
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बैरिया तहसील के एसडीएम कोर्ट में अक्तूबर 2010 से अब तक 403 मुकदमे दाखिल किए गए हैं, लेकिन अभी तक 50 मुकदमों का ही निस्तारण हो सका है। वर्तमान में 354 मुकदमे लंबित हैं। यही नहीं एसडीएम कोर्ट में 17 साल पुराना मुकदमा भी संचालित है। 1994 से तहसील क्षेत्र के शिवपुर गांव निवासी उधव बनाम धनेश्वर के नाम से मुकदमा चल रहा है। यह मामला किन कारणों से लंबित है यह पीड़ित पक्ष नहीं जानता। पीड़ित पक्ष का कहना है कि वह निरंतर अपनी निर्धारित तिथि को कोर्ट जाता है। इससे सरकारी महकमे सुनवाई एवं मामलों में निस्तारण साफ दिखाई दे रही है। एसडीएम कोर्ट में राजस्व से संबंधित 213 मामले, पुलिस विभाग के 96, सरकारी मुकदमे 19, बिजली, राशन दुकान एवं अन्य 74 मामले कोर्ट में चल रहे हैं। तहसीलदार कोर्ट पर नजर डालें तो यहां भी लंबित मुकदमों की फेहरिस्त लंबी है। कोर्ट में 540 मामले वर्तमान में चल रहे हैं। लेकिन एक भी मामले का निस्तारण नहीं हो सका है। इस कोर्ट में भी 12 साल पुराना बरासत का मुकदमा अभी भी चल रहा है। क्षेत्र के हनुमानगंज निवासी राम दर्शन बनाम उधरतीया का मुकदमा लंबित है। मुकदमों के बोझ तले दबे कोर्टों की स्थिति बेहतर नहीं है। आम जनता सालों से फैसले के इंतजार में चक्कर काटने के लिए मजबूर है। उधर इस संबंध में उपजिलाधिकारी बैरिया शीतला प्रसाद यादव ने बताया कि मुकदमों की अधिकता, वकीलों द्वारा कार्य दिवस पर बहिष्कार, हड़ताल एवं वादी-प्रतिवादी द्वारा मुकदमों में आपत्ति डालकर कर समय को आगे खींचना ही निस्तारण में देरी का कारण है।
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