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गंगा को बचाने के लिए संविधान में विधि व्यवस्था बनाने की मांग
Updated Mon, 05 Nov 2018 01:29 AM IST
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बलिया। गंगा की राह रोककर उसकी सफाई की कसरत पर खजाना खर्च करने से बेहतर है, मुक्ति का मार्ग तलाशती व टिहरी बांध में छटपटाती पतित पावनी गंगा को बचाने के लिए संविधान में विधि व्यवस्था सुनिश्चित किया जाय। यह बातें गंगा मुक्ति एवं प्रदूषण विरोधी अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी रमाशंकर तिवारी ने रविवार को श्रीरामपुर गंगा घाट पर सफाई करने के पश्चात गंगा भक्तों में जागरूकता अभियान को गति देते हुए कही। कहा कि गंगा विश्व की धरोहर है, जिसकी रक्षा करने में सरकार असफल है। नदियों का भूगोल बिगाड़कर उनके सुनहरे इतिहास का संरक्षण संभव नहीं है। एक तरफ केंद्र सरकार गंगा प्रदूषण को नियंत्रण करने की कोशिश कर रही है, वहीं गंगा की त्रीधाराओं क्रमश: अलकनंदा, भागीरथी तथा मंदाकिनी पर जल विद्युत परियोजनाओं को प्रस्तावित कर गंगा की धरा धाम से ईहलीला समाप्त करने का षणयंत्र किया जा रहा है। कहा कि प्रयाग में लगने वाले महाकुंभ का औचित्य गंगा से है और गंगा ही बांधों से हतप्रद होकर अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण निर्णय का इंतजार कर रही है। इस मौके पर सुधीर यादव, अनूप गुप्त, रामजी पासवान, रंजीत कुमार चतुर्वेदी, अभय पासवान, मदन यादव, मनीष सिंह, जयशंकर, चितरंजन गुप्त आदि मौजूद रहे।