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नहरों में पानी नहीं, धान का बेहन डालने को बारिश का इंतजार
Updated Tue, 12 Jun 2018 11:28 PM IST
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बलिया। किसानों के लिए जून का महीना धान की नर्सरी डालने के लिए उपयुक्त है। लेकिन बारिश और सिंचाई संसाधनों की स्थिति खराब होने से धान की नर्सरी डालने के लिए खेत तैयार नहीं कर पा रहे। नहरें सूखी हैं और बीच में खर-पतवार और झाड़ झंखाड़ उग आए हैं। अभी तक सिल्ट की सफाई नहीं हो पाई। नहरें क्षतिग्रस्त हैं और राजकीय नलकूपों से जुड़ी नालियां टूटी हैं। विभागीय दावे के अनुसार वर्ष 2018-19 में शासन की ओर से सिल्ट सफाई पर रोक लगाने के कारण यह कार्य नहीं हो सका है। यही हाल नलकूपों का भी है। जिले में जहां 15 नलकूप फेल हैं। वहीं करीब तीन दर्जन नलकूप विभिन्न कारणों से खराब हैं।
जिले में नहरों से कुल 15 लाख आठ हजार 343 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई के लिए कुल 274.936 किलोमीटर लम्बी नहर, रजवाहा व माइनरों की जाल है। इसमें दोहरीघाट सहायक परियोजना की मुख्य नहर 62 किलोमीटर है। इस नहर के चार रजबाहा व 50 माइनर हैं, जिनकी कुल लंबाई 65.186 किलोमीटर है। दोहरीघाट सहायक परियोजना के मुख्य नहर समेत कुल 55 टेल हैं। इसके अलावा सुरहा ताल पंप नहर स्थापित है। इस नहर के मुख्य नहर की लंबाई जहां 11.8 किलोमीटर है। वहीं इस नहर के कुल आधा दर्जन माइनरों की लंबाई छह किलोमीटर है। हालांकि यह पंप नहर सालों से सुरहा ताल में पानी के अभाव में बंद है। इसी तरह जिले में लघु डाल की 59.95 किलोमीटर लंबी सात नहरें हैं। इस नहर के कुल 18 टेल निर्धारित किए गए हैं। शारदा सहायक प्रणाली की भी 70 किलोमीटर लंबी दो नहरें हैं। इन नहरों के दायरे के किसानों से हर साल करीब पांच करोड़ के राजस्व की प्राप्ति होती है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को समय से पानी नहीं मिल पाता है। बताया जाता है कि अधिकांश नहरों खासकर रजबाहा व माइनर में सिल्ट होने के कारण पानी का संचालन सही तरीके से नहीं हो पाता है। जबकि हर साल इसके लिए सरकार की ओर से बजट भी उपलब्ध कराया जाता है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता की मानें तो वर्ष 2018-19 में सरकार की ओर से नहरों की सिल्ट सफाई पर रोक लगा दी गई है। बताया कि आमतौर पर सिल्ट सफाई के बाद नौ जून से नहरों में पानी का संचालन शुरू किया जाता था, लेकिन इस बार यह कार्य नहीं होने और किसानों की मांग को देखते हुए नहरों में पानी का संचालन शुरू कर दिया गया है।
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जिले में नहरों से कुल 15 लाख आठ हजार 343 हेक्टेयर क्षेत्रफल की सिंचाई के लिए कुल 274.936 किलोमीटर लम्बी नहर, रजवाहा व माइनरों की जाल है। इसमें दोहरीघाट सहायक परियोजना की मुख्य नहर 62 किलोमीटर है। इस नहर के चार रजबाहा व 50 माइनर हैं, जिनकी कुल लंबाई 65.186 किलोमीटर है। दोहरीघाट सहायक परियोजना के मुख्य नहर समेत कुल 55 टेल हैं। इसके अलावा सुरहा ताल पंप नहर स्थापित है। इस नहर के मुख्य नहर की लंबाई जहां 11.8 किलोमीटर है। वहीं इस नहर के कुल आधा दर्जन माइनरों की लंबाई छह किलोमीटर है। हालांकि यह पंप नहर सालों से सुरहा ताल में पानी के अभाव में बंद है। इसी तरह जिले में लघु डाल की 59.95 किलोमीटर लंबी सात नहरें हैं। इस नहर के कुल 18 टेल निर्धारित किए गए हैं। शारदा सहायक प्रणाली की भी 70 किलोमीटर लंबी दो नहरें हैं। इन नहरों के दायरे के किसानों से हर साल करीब पांच करोड़ के राजस्व की प्राप्ति होती है, लेकिन इसके बावजूद किसानों को समय से पानी नहीं मिल पाता है। बताया जाता है कि अधिकांश नहरों खासकर रजबाहा व माइनर में सिल्ट होने के कारण पानी का संचालन सही तरीके से नहीं हो पाता है। जबकि हर साल इसके लिए सरकार की ओर से बजट भी उपलब्ध कराया जाता है। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता की मानें तो वर्ष 2018-19 में सरकार की ओर से नहरों की सिल्ट सफाई पर रोक लगा दी गई है। बताया कि आमतौर पर सिल्ट सफाई के बाद नौ जून से नहरों में पानी का संचालन शुरू किया जाता था, लेकिन इस बार यह कार्य नहीं होने और किसानों की मांग को देखते हुए नहरों में पानी का संचालन शुरू कर दिया गया है।
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