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697 सामुदायिक शौचालय बन कर तैयार, 179 का संचालन नहीं
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गांवों में सामुदायिक शौचालय निर्माण में तेजी आई है। अबतक 697 सामुदायिक शौचालय बन चुके हैं। लेकिन अभी तक 518 शौचालयों का ही संचालन हो सका है। अन्य के संचालन को लेकर महिला समूहों का चयन नहीं हो सका है। अधिकारियों के अनुसार प्रक्रिया जारी है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब 13 माह पहले भारत सरकार ने व्यक्तिगत शौचालय आवंटन के स्थान पर सामुदायिक शौचालय निर्माण का निर्देश दिया ताकि शौचालय की सुविधा से वंचित लोगों को लाभ मिल सके। इसके निर्माण के लिए राज्य वित्त, केंद्र वित्त तथा मनरेगा से धनराशि निर्धारित की गई। इसके तहत जिले के प्रत्येक गांवों में कुल 940 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का लक्ष्य निर्धारित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि काफी प्रयास के बावजूद 122 गांवों में सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके चलते कुल 818 गांवों में इन शौचालयों के निर्माण का कार्य शुरू कराया गया। इसी बीच शासन ने सामुदायिक शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को देने का निर्देश जारी किया। इसके तहत यह प्रावधान किया गया कि गांव के सबसे पुराने महिला स्वयं सहायता समूह को ही यह जिम्मेदारी दी जाएगी। लेकिन इसको लेकर भी अब गांवों में खींचतान शुरू हो गई है। इस खींचतान के कारण सामुदायिक शौचालयों का संचालन प्रभावित है। अधिकारियों की मानें तो अब तक कुल 697 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है लेकिन अब तक 518 सामुदायिक शौचालयों का ही संचालन शुरू हो चुका है जबकि 179 के संचालन को लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों के चयन की प्रक्रिया चल रही है।
सामुदायिक शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को देना है। अब तक 518 का संचालन शुरु हो चुका है, शेष के संचालन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। अधिकांश सामुदायिक शौचालयों की जिओ टैगिंग भी हो चुकी है।
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- इसरार अहमद, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन, बलिया
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत करीब 13 माह पहले भारत सरकार ने व्यक्तिगत शौचालय आवंटन के स्थान पर सामुदायिक शौचालय निर्माण का निर्देश दिया ताकि शौचालय की सुविधा से वंचित लोगों को लाभ मिल सके। इसके निर्माण के लिए राज्य वित्त, केंद्र वित्त तथा मनरेगा से धनराशि निर्धारित की गई। इसके तहत जिले के प्रत्येक गांवों में कुल 940 ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय का लक्ष्य निर्धारित किया गया। अधिकारियों ने बताया कि काफी प्रयास के बावजूद 122 गांवों में सामुदायिक शौचालय निर्माण के लिए जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके चलते कुल 818 गांवों में इन शौचालयों के निर्माण का कार्य शुरू कराया गया। इसी बीच शासन ने सामुदायिक शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को देने का निर्देश जारी किया। इसके तहत यह प्रावधान किया गया कि गांव के सबसे पुराने महिला स्वयं सहायता समूह को ही यह जिम्मेदारी दी जाएगी। लेकिन इसको लेकर भी अब गांवों में खींचतान शुरू हो गई है। इस खींचतान के कारण सामुदायिक शौचालयों का संचालन प्रभावित है। अधिकारियों की मानें तो अब तक कुल 697 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण पूरा हो चुका है लेकिन अब तक 518 सामुदायिक शौचालयों का ही संचालन शुरू हो चुका है जबकि 179 के संचालन को लेकर महिला स्वयं सहायता समूहों के चयन की प्रक्रिया चल रही है।
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सामुदायिक शौचालयों के संचालन की जिम्मेदारी महिला स्वयं सहायता समूहों को देना है। अब तक 518 का संचालन शुरु हो चुका है, शेष के संचालन के लिए महिला स्वयं सहायता समूहों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। अधिकांश सामुदायिक शौचालयों की जिओ टैगिंग भी हो चुकी है।
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- इसरार अहमद, जिला समन्वयक, स्वच्छ भारत मिशन, बलिया