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आसमान में छाए रहे बादल, दिनभर चली तेज हवाएं

Tue, 16 Apr 2019 11:07 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 16 Apr 2019 11:07 PM IST
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आसमान में छाए रहे बादल, दिनभर चली तेज हवाएं
बलिया। पिछले करीब एक सप्ताह से पड़ रही तेज गर्मी से लोग बेहाल हैं और चिलचिलाती धूप व पछुआ हवा के चलते लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। उधर, मंगलवार को दोपहर बाद से ही मौसम ने अचानक करवट ली है और आसमान बादल छाये रहने व धुंध के चलते उमस भी बढ़ गई है। आसमान में बादल देख किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।
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बीते एक सप्ताह से पारा चढ़ने से दिन-प्रतिदिन गर्मी में इजाफा हो रहा है। आलम यह है कि गुरुवार को अधिकतम तापमान जहां 39 डिग्री रहा वहीं शु्क्रवार को भी अधिकतम 39, शनिवार को अधिकतम 40 डिग्री रहा। रविवार को भी अधिकतम तापमान 40 डिग्री रहा तो सोमवार को पारा 41 डिग्री पर पहुंच गया। वहीं मंगलवार को आसमान में अचानक परिवर्तन नजर आया। अलसुबह से ही आसमान में बादल छाए रहे। दिनभर तेज हवाओं के कारण बादलों की लुका छिपी का खेल जा रहा। इससे तापमान में भी गिरावट दर्ज किया गया। जहां अधिकतम तापमान 32 और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा। इससे लोगों को कुछ हद तक गर्मी से राहत मिली। उधर, आसमान में अचानक बादल छाने व मौसम धुंध होने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई। खेती-किसानी के लिए चैत का महीना काफी महत्वपूर्ण होता है। इस महीने में एक ओर जहां खेतों में रबी फसलों की कटाई होती है तो दूसरी ओर खलिहानों में मड़ाई का काम भी तेजी से होता है। लेकिन आसमान में बादल के साथ ही पूरवा हवा चलने से किसान सशंकित हो गए हैं। पिछले दिनों में कई बार मौसम के बदलने के साथ ही बारिश व ओले भी पड़े थे जिससे किसान अब भी सहमे हुए हैं। किसानों का मानना है कि पुरवा हवा में खलिहानों में मड़ाई का काम बाधित हो जाता है। किसान मौसम बदलते देख इस बात से भी सहमे हुए हैं कि अगर बारिश होती है तो खेत से लेकर खलिहान तक नुकसान ही होगा।पूर संवाददाता के मुताबिक मौसम के मिजाज को देखकर किसान हताश एवं परेशान हो गए हैं। किसान राजमोहन सिंह का कहना है कि इस तरह के बदलते मौसम ने हम किसानों की चिंता बढ़ा दिया है। किसान गेहूं की बुआई के लिए बैंकों से कर्ज लेता है कि फसल हो जाएगी तो बैंक को कर्ज अदा कर देंगे, लेकिन अगर बारिश हो गई तो किसानों की फसल बर्बाद हो जाएगी। राजकुमार सिंह ने कहा कि हम किसान खेती पर निर्भर है। अगर ऐसी स्थिति में हमारी फसल बर्बाद हो गई तो हमारी जीविका साधक कुछ भी नहीं रह पाएगा। रमेश श्रीवास्तव ने कहा कि मौसम वैज्ञानिकों ने घोषणा की है कि तूफान एवं तेज बारिश की संभावना है, तब से मौसम के बदलते मिजाज को देख कर हम किसानों की चिंता और बढ़ गई है। कृषि उपनिदेशक इंद्राज ने बताया कि चैत माह में मौसम का बदलना कहीं से भी खेती-किसानी के लिए अनुकूल नहीं है। इस महीने में पुरवा हवा होने की दशा में मड़ाई का काम प्रभावित हो जाता है। आसमान में बादल छाए हैं और अगर बारिश हुई तो खेत से लेकर खलिहान तक नुकसान ही होगा।
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