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मिठाइयों में हो रही मिलावटखोरी
Updated Mon, 16 Oct 2017 11:30 PM IST
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बलिया/लालगंज। दीपावली में इस्तेमाल होने वाली मिठाइयों में मिलावटखोरी धड़ल्ले से जारी है। इनमें सिंथेटिक दूधों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
जिसके सेवन करने से लोगों की सेहत खराब हो जाती है।
नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ दूकानों को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश दूकानों पर सिन्थेटिक दूध व अन्य मिलावट कर दूकानदारों ने खोवा व छेना की मिठाई बनाने के लिए व्यवस्था कर ली है। इसके अलावा बेसन के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू, सोमपापड़ी, गोद की लड्डू भी तैयार किए जा रहे। लेकिन दूकानदार अधिक लाभ कमाने के चक्कर में आमजन के सेहत से खिलवाड़ करने से भी पीछे नहीं है। मिलावटी व सिन्थेटिक निर्मित मिठाइयां ग्रामीण क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि नगर में भी बनाई जाती है। इस समय दोकटी थाना क्षेत्र के भुआल छपरा चट्टी, दलन छपरा चट्टी, लालगंज व दोकटी बाजार आदि जगहों पर स्थापित मिठाई की दूकानों पर मिलावटी दूध व सिन्थेटिक दूध का प्रयोग कर मिठाइयां धड़ल्ले से बनाई जा रही हैं।
विभागीय आकड़ों गौर किया जाय तो जनपद की आबादी लगभग 33 लाख है। इसके सापेक्ष जनपद में दुधारू पशुओं की भारी मात्रा में कमी है। जबकि मिठाइयों की खपत भारी मात्रा में है। ऐसे में मिलावटी दूध व सिन्थेटिक दूध से मिठाइयां बनना दूकानदारों के लिए मजबूरी है। नगर के मिड्ढी चौराहा स्थित ज्योति स्वीट्स के संचालक अशोक कुमार का कहना है कि हमारी दूकान पर गाय व भैस के दूध से ही छेना व खोवा की मिठाई बनाई जाती है। लेकिन इसकी मियाद 12 से 24 घंटे तक होती है। जबकि बेसन से बने लड्डू, मोतीचूर, गोद की लड्डू तथा सोमपापड़ी की मियाद तीन से चार दिन तक रहती है। जिला अस्पताल में तैनात फिजीशियन डा. एके स्वर्णकार ने बताया कि मिलावट की मिठाइयां खाने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है। मिलावट के कारण पेट की गड़बड़ी, उल्टी-दस्त, सिर को प्रभावित कर सकती है। वहीं, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि जनपद में करीब तीन दिन से दूकानों पर छापेमारी कर सेम्पल लिया जा रहा है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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जिसके सेवन करने से लोगों की सेहत खराब हो जाती है।
नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ दूकानों को छोड़ दिया जाय तो अधिकांश दूकानों पर सिन्थेटिक दूध व अन्य मिलावट कर दूकानदारों ने खोवा व छेना की मिठाई बनाने के लिए व्यवस्था कर ली है। इसके अलावा बेसन के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू, सोमपापड़ी, गोद की लड्डू भी तैयार किए जा रहे। लेकिन दूकानदार अधिक लाभ कमाने के चक्कर में आमजन के सेहत से खिलवाड़ करने से भी पीछे नहीं है। मिलावटी व सिन्थेटिक निर्मित मिठाइयां ग्रामीण क्षेत्र में ही नहीं, बल्कि नगर में भी बनाई जाती है। इस समय दोकटी थाना क्षेत्र के भुआल छपरा चट्टी, दलन छपरा चट्टी, लालगंज व दोकटी बाजार आदि जगहों पर स्थापित मिठाई की दूकानों पर मिलावटी दूध व सिन्थेटिक दूध का प्रयोग कर मिठाइयां धड़ल्ले से बनाई जा रही हैं।
विभागीय आकड़ों गौर किया जाय तो जनपद की आबादी लगभग 33 लाख है। इसके सापेक्ष जनपद में दुधारू पशुओं की भारी मात्रा में कमी है। जबकि मिठाइयों की खपत भारी मात्रा में है। ऐसे में मिलावटी दूध व सिन्थेटिक दूध से मिठाइयां बनना दूकानदारों के लिए मजबूरी है। नगर के मिड्ढी चौराहा स्थित ज्योति स्वीट्स के संचालक अशोक कुमार का कहना है कि हमारी दूकान पर गाय व भैस के दूध से ही छेना व खोवा की मिठाई बनाई जाती है। लेकिन इसकी मियाद 12 से 24 घंटे तक होती है। जबकि बेसन से बने लड्डू, मोतीचूर, गोद की लड्डू तथा सोमपापड़ी की मियाद तीन से चार दिन तक रहती है। जिला अस्पताल में तैनात फिजीशियन डा. एके स्वर्णकार ने बताया कि मिलावट की मिठाइयां खाने से शरीर पर बुरा असर पड़ता है। मिलावट के कारण पेट की गड़बड़ी, उल्टी-दस्त, सिर को प्रभावित कर सकती है। वहीं, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी आरपी सिंह ने बताया कि जनपद में करीब तीन दिन से दूकानों पर छापेमारी कर सेम्पल लिया जा रहा है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी।
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