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दुबे छपरा रिंग बंधा फिर कटा, अधिकांश हिस्सा बहा
Updated Tue, 25 Sep 2018 12:44 AM IST
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बलिया (रामगढ़)। गंगा की उतरती लहरों ने सोमवार को एक बार फिर रिंग बंधा का एक किलोमीटर का हिस्सा काट दिया। प्रशासन से लेकर बाढ़ विभाग के अधिकारी जलस्तर घटने से उदासीन हो गए थे और जैसे बंधे के कटने की सूचना मिली प्रशासन से लेकर बाढ़ विभाग में हड़कंप मच गया। सबसे पहले मौके पर पहुंचे बैरिया एसडीएम लाल बाबू दुबे ने मोर्चा संभाला लेकिन संसाधनों के अभाव में असहाय नजर आए।
वर्ष 2017 में 29 करोड़ रुपये की लागत से दुबे छपरा बंधा के करीब दो किमी की दूरी में लांचिंग, पिचिंग व एप्रन और एक स्पर के साथ बंधे का पुनर्निर्माण करना था। बाढ़ विभाग ने 29 मई 2017 से बंधे पर काम कराना शुरू किया। जिसमें दो ठेकेदार को कार्य दिया गया था। एक आरपी सिंह कंस्ट्रक्शन को 21.23 करोड़ से काम करना था और दूसरे रमेश तिवारी के नाम से ठेका 8.12 करोड़ रुपये के काम का था। जिसके तहत ठेकेदारों को दो माह यानि 25 जुलाई तक काम को पूूरा करना था। लेकिन करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी बंधे के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका। इसका नतीजा यह रहा कि गंगा में बाढ़ आई तो 12 सितंबर को बंधा कट गया। इसके बाद जिला प्रशासन से लेकर बाढ़ विभाग के अधिकारियों का हाथ पांव फूलने लगा और डीएम के निर्देश पर दुबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा आदि गांवों में हाई अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का फरमान जारी कर दिया गया। लेकिन गंगा के जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई तो ग्रामीणों व बाढ़ विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर बंधा को बचाने का प्रयास किया। इसके बाद लगातार गंगा के जलस्तर में गिरावट को देख अधिकारी सुस्त हो गए। इस बीच सोमवार को गंगा की उतरती लहरों ने एकबार फिर बंधे को स्पर के समीप दो तिहाई से अधिक भाग काट दिया और पानी में बह गया। यह देख ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। उधर, इसकी जानकारी होते ही बाढ़ विभाग के एसडीओ चंद्रमोहन शाही समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और हरे पेड़ों को काट कर बंधा को बचाने में जुट गए।
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वर्ष 2017 में 29 करोड़ रुपये की लागत से दुबे छपरा बंधा के करीब दो किमी की दूरी में लांचिंग, पिचिंग व एप्रन और एक स्पर के साथ बंधे का पुनर्निर्माण करना था। बाढ़ विभाग ने 29 मई 2017 से बंधे पर काम कराना शुरू किया। जिसमें दो ठेकेदार को कार्य दिया गया था। एक आरपी सिंह कंस्ट्रक्शन को 21.23 करोड़ से काम करना था और दूसरे रमेश तिवारी के नाम से ठेका 8.12 करोड़ रुपये के काम का था। जिसके तहत ठेकेदारों को दो माह यानि 25 जुलाई तक काम को पूूरा करना था। लेकिन करीब डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी बंधे के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो सका। इसका नतीजा यह रहा कि गंगा में बाढ़ आई तो 12 सितंबर को बंधा कट गया। इसके बाद जिला प्रशासन से लेकर बाढ़ विभाग के अधिकारियों का हाथ पांव फूलने लगा और डीएम के निर्देश पर दुबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा आदि गांवों में हाई अलर्ट जारी कर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का फरमान जारी कर दिया गया। लेकिन गंगा के जलस्तर में गिरावट शुरू हो गई तो ग्रामीणों व बाढ़ विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर बंधा को बचाने का प्रयास किया। इसके बाद लगातार गंगा के जलस्तर में गिरावट को देख अधिकारी सुस्त हो गए। इस बीच सोमवार को गंगा की उतरती लहरों ने एकबार फिर बंधे को स्पर के समीप दो तिहाई से अधिक भाग काट दिया और पानी में बह गया। यह देख ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। उधर, इसकी जानकारी होते ही बाढ़ विभाग के एसडीओ चंद्रमोहन शाही समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और हरे पेड़ों को काट कर बंधा को बचाने में जुट गए।
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