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बगैर मान्यता चल रहे स्कूल, जांच के नाम पर कोरम
Updated Mon, 27 Nov 2017 11:10 PM IST
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बलिया। जिले में नोटिस देने के बाद भी बगैर मान्यता के स्कूल चलाए जाने पर लगाम नहीं लग सकी है। जांच के नाम पर सिर्फ कोरम पूरा किया जा रहा। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग ने 55 स्कूलों को नोटिस देने के साथ ही दो विद्यालय संचालकों पर मुकदमा भी दर्ज कराया। बावजूद इसके स्कूल धड़ल्ले से चल रहे हैं।
बेसिक शिक्षा के तहत जिले के कोने-कोने में बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन किया जाता है और विभाग की ओर से कार्रवाई के नाम पर केवल कोरम किया जाता है। वर्ष 2016-17 में शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में कुल 575 बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों को चिह्नित किया था और करीब 60 विद्यालयों पर ताला भी लगाया था। लेकिन कुछ दिनों बाद ही विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूलों का संचालन शुरु हो गया। वर्ष 2017-18 में भी विभाग ने कुल 55 स्कूलों को चिह्नित करते हुए नोटिस देने का दावा किया लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल कोरम ही रहा। आलम यह है कि जिले में बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। इनकी संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है लेकिन विभाग उदासीन बना रहता है। नामांकन से पहले सभी निजी स्कूलों की ओर से शिक्षा, सुरक्षा और अन्य व्यवस्था को लेेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ अलग ही होती है। गिनती के कुछ निजी स्कूलों को छोड़ दें तो 90 फीसदी से अधिक निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इसके चलते ही स्कूलों में अध्यापक, चपरासी, बस चालक, कंडक्टर आदि के लिए कोई मानक का निर्धारण नहीं रह जाता है। अधिकांश स्कूलों के जहां चहारदिवारी नहीं हैं वहीं बिना पुलिस से सत्यापन कराए ही कर्मचारियों को रखने का भी कार्य किया जाता है।
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बेसिक शिक्षा के तहत जिले के कोने-कोने में बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन किया जाता है और विभाग की ओर से कार्रवाई के नाम पर केवल कोरम किया जाता है। वर्ष 2016-17 में शासन के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले में कुल 575 बिना मान्यता प्राप्त स्कूलों को चिह्नित किया था और करीब 60 विद्यालयों पर ताला भी लगाया था। लेकिन कुछ दिनों बाद ही विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूलों का संचालन शुरु हो गया। वर्ष 2017-18 में भी विभाग ने कुल 55 स्कूलों को चिह्नित करते हुए नोटिस देने का दावा किया लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल कोरम ही रहा। आलम यह है कि जिले में बिना मान्यता के स्कूलों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। इनकी संख्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है लेकिन विभाग उदासीन बना रहता है। नामांकन से पहले सभी निजी स्कूलों की ओर से शिक्षा, सुरक्षा और अन्य व्यवस्था को लेेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ अलग ही होती है। गिनती के कुछ निजी स्कूलों को छोड़ दें तो 90 फीसदी से अधिक निजी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। इसके चलते ही स्कूलों में अध्यापक, चपरासी, बस चालक, कंडक्टर आदि के लिए कोई मानक का निर्धारण नहीं रह जाता है। अधिकांश स्कूलों के जहां चहारदिवारी नहीं हैं वहीं बिना पुलिस से सत्यापन कराए ही कर्मचारियों को रखने का भी कार्य किया जाता है।
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