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Ballia News: चक्की नौरंगा में गंगा की कटान में समाए 20 मकान

Tue, 02 Sep 2025 11:32 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 02 Sep 2025 11:32 PM IST
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20 houses submerged in Ganga erosion in Chakki Nauranga
चक्की नौरंगा गांव में मकान के बचे अवशेष भाग को अपने आगोश लेती गंगा नदी की उतरती लहरें तथा गंगा
मझौवां/ दयाछपरा। जिले में गंगा का जलस्तर एक सेमी प्रतिघंटे घटाव पर है, वहीं सरयू ने खतरा बिंदु को पार कर लिया है। गंगा की उतरती धारा चक्की नौरंगा में जमकर तांडव मचा रही है। मंगलवार की शाम चक्की नौरंगा में अचानक तेज कटान से गंगा की लहरों में 20 मकान समा गए। इससे गांव में भगदड़ की स्थिति बन गई।
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विनोद राम, श्रीभगवान राम, राजकुमार राम, कमलेश राम, उधारी राम, शिवजी राम, दीनदयाल राम आदि लोगों का मकान गंगा में समाहित हो गया। इसमें 16 पक्के व 4 कच्चे मकान शामिल हैं। नदी के कहर से चक्की नौरंगा गांव में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। कटान की रफ्तार और खौफ ने ग्रामीणों को पलायन करने लगे हैं। अभी तक चक्की नौरंगा में 90 मकान गंगा की भेंट चढ़ चुके हैं। पूर्व प्रधान राजमंगल ठाकुर, संजय चौधरी, अखिलेश, रोहित, यदुनाथ मिश्र, सुरेन्द्र ठाकुर, रवीन्द्र ठाकुर का आरोप है कि प्रशासन की ओर से कटान रोकने के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। कटान पीड़ित सीता राम, वीरेंद्र ने बताया कि हर दिन घर और जमीन नदी में समा रही है। केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार शाम 4 बजे गायघाट गेज पर गंगा का जलस्तर 58.670 मीटर दर्ज किया गया है। पानी एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है, फिर भी गंगा खतरे के निशान 57.615 मीटर से 1.055 सेमी ऊपर बह रही है।
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पानी उतरने के बाद भी दुश्वारियां कायम
मझौंवां। गंगा की बाढ़ का पानी अब अधिकतर बस्तियों से लौटने लगा है। इसके बाद भी दुश्वारियां कम नहीं हो रही है। क्षेत्र के सुघर छपरा, दूबे छपरा, गोपालपुर, उदई छपरा, वंश गोपाल छपरा, मिश्र के मठिया, चिन्तामणी राय के टोला, बुधनचक, मुरली छपरा, पाण्डेयपुर, नौरंगा, भुआल छपरा, चक्की नौरंगा, उपाध्याय टोला, सतीघाट, भुसौला और नारदरा जैसे गांवों में बाढ़ से करीब 50 हजार लोगों की जिंदगी नारकीय हो गई है। गलियों में कीचड़, मरे हुए जानवर और बाढ़ में बहकर आई अपशिष्ट सामग्री से संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। दीनानाथ तिवारी, शिवजी तिवारी, मनोज तिवारी, वीरेंद्र तिवारी, गुना तिवारी ने बताया कि बाढ़ ने हमारी जिंदगी बर्बाद कर दी। बच्चे बीमार हो रहे हैं, बुजुर्गों को सांस लेने में तकलीफ हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, सड़ांध और गंदगी से डायरिया, मलेरिया, टाइफाइड और स्किन इन्फेक्शन जैसी बीमारियों के फैलने का गंभीर खतरा है।
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चक्की नौरंगा में कटान चल ही रही है। तीसरी बार की बाढ़ में 61 पक्के मकान व 7 झोपड़ियां नदी में विलीन हो गई हैं। प्रभावित 22 परिवारों को 1 लाख 20 हजार रुपये की अनुदान राशि उनके एकाउंट में ट्रांसफार्मर कर दिए गए हैं। जो बचे हैं उनके आधार कार्ड उपलब्ध कराते ही धनराशि 24 घंटे में ट्रांसफर कर दी जाएगी। - आलोक प्रताप सिंह, उपजिलाधिकारी, बैरिया।

खतरा बिंदु से 26 सेमी ऊपर पहुंची सरयू की धारा
बेल्थरारोड। सरयू नदी के जलस्तर में उतार-चढ़ाव का सिलसिला जारी रहने के दौरान पिछले दो-तीन दिनों से जलस्तर में वृद्धि हो रही है। नदी का पानी लाल निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर बह रहा है और जलस्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में, बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार मंगलवार की शाम जलस्तर 64.27 मीटर दर्ज किया गया, जो लाल निशान 64.01 मीटर से 26 सेंटीमीटर अधिक है। पिछले 24 घंटे के दौरान 27 सेंटीमीटर जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई। आयोग का कहना है कि एक-एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से जलस्तर में बढ़ोतरी हो रही है। आयोग ने अगले 24 घंटे में जलस्तर में वृद्धि जारी रहने का अनुमान किया है। उधर, बाढ़ को लेकर प्रशासन अलर्ट है। तटवर्ती क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां स्थापित कर नदी की प्रकृति की निगरानी की जा रही है। संभावित बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए प्रशासनिक तैयारी पूरी है।
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