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राम कथा परमार्थ धर्म की तक पहुंचने की है पगडंडी
Updated Wed, 28 Mar 2018 11:28 PM IST
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राम कथा के श्रवण मात्र से मानव का कल्याण तो होता ही है वह सदाचारी, चरित्रवान, सत्यवादी भी बनता है। जो उसके जीवन को सुखमय बनाता है, यह बातें काशी से पधारे जगतगुरु रामानुजाचार्य मारूती किंकर जी महाराज ने कही। वह संत यतिनाथ मंदिर पर आयोजित हनुमान जयंती समारोह के प्रथम दिन मंगलवार की रात भक्तों को संबोधित कर रहे थे। कहा कि रामचरित मानस में दो विरोधी विचारधाराएं हैं एक तरफ श्रीराम का चरित्र तो दूसरी तरफ रावण का चरित्र है। राम के चरित्र में विद्या और रावण के चरित्र में अविद्या दिखाई देती है। इस मौके पर आचार्य रामानंद पांडेय, सर्वदेव सिंह,गणेश प्रसाद,जनार्दन उपाध्याय,विमला गुप्ता,बेचू राम कैलासी आदि मौजूद रहे। संचालन रमाशंकर यादव ने किया।
इनसेट=
श्रीराम कथा की बाल लीला का किया वर्णन
बेरूवारबारी। ग्राम सभा करिहारा में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा वाचक राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत करते हुए उनके जन्म से लेकर बाल काल के सुनहरे पलो को बताकर भक्त गण को भाव विभोर कर दिया। वहीं लोगों को वास्तविक जीवन में खुद को सरल होने का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि क्रोध से मन को कभी भी शांति नही मिल सकती है। कार्यक्रम में संचालन की भूमिका सुरेन्द्र सिंह मुन्ना ने निभाया।
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श्रीराम कथा की बाल लीला का किया वर्णन
बेरूवारबारी। ग्राम सभा करिहारा में आयोजित श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा वाचक राजन जी महाराज ने भगवान श्रीराम के जन्म का प्रसंग प्रस्तुत करते हुए उनके जन्म से लेकर बाल काल के सुनहरे पलो को बताकर भक्त गण को भाव विभोर कर दिया। वहीं लोगों को वास्तविक जीवन में खुद को सरल होने का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि क्रोध से मन को कभी भी शांति नही मिल सकती है। कार्यक्रम में संचालन की भूमिका सुरेन्द्र सिंह मुन्ना ने निभाया।
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