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शांति, सद्भाव की अटूट मिसाल थी पदयात्रा
Updated Sat, 06 Jan 2018 11:01 PM IST
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खेजुरी। पूर्व प्रधानमंत्री, बलिया के सपूत व देश की शान चंद्रशेखर ने 35 वर्ष पूर्व कन्याकुमारी से दिल्ली तक की पदयात्रा निर्बाध रुप से पूरी कर शांति, सद्भाव का अटूट मिसाल कायम किया था। गांधीजी के बाद वह पहले ऐसे पदयात्री रहे, जिन्होंने पदयात्रा कर पूरे हिंदुस्तान में व्याप्त अशिक्षा, गरीबी, भ्रष्टाचार एवं जनता की दयनीयता का साक्षात दर्शन किया। वह सदैव प्रेरणा के स्रोत एवं समाजवादी चिंतकों के लिए शोध के विषय बने रहेंगे।
यह बातें मुख्य अतिथि समाजवादी युवा जनता की राष्ट्रीय अध्यक्ष सादात अनवर नखेजुरी ने खेजुरी ग्राम सभा स्थित सब्जी मंडी में स्वर्गीय शेखर की पदयात्रा की याद मेें व्यक्त किया। कहा कि यह धरती क्रांतिकारियों की धरती रही है। जिस की शुरूआत 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मंगल पांडेय ने की थी। इसके बाद चित्तू पांडेय, जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर जैसे व्यक्तियों ने चार चांद लगाने का काम किया। जिनसे बलिया अपने आपको गौरवांवित महसूस करता है तथा पूरे विश्व में बलिया का नाम अमर है। विशिष्ट अतिथि घनश्याम सिंह ने कहा कि मैं उस पद यात्रा में 15 दिन तक चंद्रशेखर के साथ रहा। पदयात्रा के दौरान बेटी पारु से मिलना, उसकी सूखी रोटी को खाना, बूढ़ी अर्द्ध नग्न मां को अपनी साल देकर उसी अभिभूत करना। उनसे जीवन में सादगी शालीनता एवं गरीबों के प्रति प्रेम को दर्शाने का एक अद्भुत उदाहरण है। हम उनके पद चिह्नों पर चलने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। इस मौके पर जीवित चौहान, नईम अंसारी, बबलू सिंह, रामजन्म गुप्ता, अधिवक्ता फतेह बहादुर सिंह, रवि प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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यह बातें मुख्य अतिथि समाजवादी युवा जनता की राष्ट्रीय अध्यक्ष सादात अनवर नखेजुरी ने खेजुरी ग्राम सभा स्थित सब्जी मंडी में स्वर्गीय शेखर की पदयात्रा की याद मेें व्यक्त किया। कहा कि यह धरती क्रांतिकारियों की धरती रही है। जिस की शुरूआत 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मंगल पांडेय ने की थी। इसके बाद चित्तू पांडेय, जयप्रकाश नारायण और चंद्रशेखर जैसे व्यक्तियों ने चार चांद लगाने का काम किया। जिनसे बलिया अपने आपको गौरवांवित महसूस करता है तथा पूरे विश्व में बलिया का नाम अमर है। विशिष्ट अतिथि घनश्याम सिंह ने कहा कि मैं उस पद यात्रा में 15 दिन तक चंद्रशेखर के साथ रहा। पदयात्रा के दौरान बेटी पारु से मिलना, उसकी सूखी रोटी को खाना, बूढ़ी अर्द्ध नग्न मां को अपनी साल देकर उसी अभिभूत करना। उनसे जीवन में सादगी शालीनता एवं गरीबों के प्रति प्रेम को दर्शाने का एक अद्भुत उदाहरण है। हम उनके पद चिह्नों पर चलने के लिए दृढ़ संकल्प हैं। इस मौके पर जीवित चौहान, नईम अंसारी, बबलू सिंह, रामजन्म गुप्ता, अधिवक्ता फतेह बहादुर सिंह, रवि प्रताप सिंह आदि मौजूद रहे।
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