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हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी पूर्व विवेचक से ही कराई जा रही विवेचना
Updated Mon, 10 Sep 2018 01:05 AM IST
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बलिया। एफआईआर में नाम नहीं होने के बावजूद सीबीसीआईडी के एएसपी लल्लन प्रसाद द्वारा पूर्व विधायक सनातन पांडेय को आरोपित किए जाने से सपाजनों में उबाल है। सपा के पूर्व विधायक सनातनन पांडेय ने जिला मुख्यालय स्थित सपा कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत में कहा कि विस चुनाव 2017 के दौरान चार मार्च का मामला है। मामले की विवेचना सीबीसीआईडी से कराई गई तो उस पर विपक्षी द्वारा हाईकोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया गया। तथ्यों को छिपाकर शासन से मिलीभगत कर गलत तरीके से न्यायालय को 29 मई 2017 को आरोप पत्र प्रेषित किया गया। जबकि एफआईआर में कहीं भी उनका नाम नहीं था।
लेकिन बाद में उन्हें मामले में उनका नाम होने की जानकारी हुई। इसपर उनकी तरफ से हाईकोर्ट में रिट दाखिल की गई। जिसमें सुनवाई करते हुए सीबीसीआईडी तथा सरकार को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया। जिस पर सरकार ने अपनी गलती माना। इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाकर कर रिट दाखिल करने के मामले में 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। पूर्व विधायक ने कहा कि इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को आदेशित किया कि विवादित जांचकर्ता लल्लन यादव से विवेचना बदलकर किसी दूसरे डिप्टी एसपी रैंक से ऊपर के अधिकारी से कराई जाए। साथ ही मुकदमों का आरोप पत्र चार सप्ताह में प्रेषित की जाए। सरकार ने उच्च न्यायालय की आदेेश की अवहेलना करते हुए पूर्व विवेचक से ही विवेचना शुरू करा दी। जिसे हम लोग कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस अवहेलना के प्रकरण को कोर्ट के पटल पर रखा जाएगा। इस मौके पर पूर्व विधायक गोरख पासवान, डा. विश्राम यादव, संजय यादव, आद्याशंकर यादव, विजय शंकर यादव आदि रहे।
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लेकिन बाद में उन्हें मामले में उनका नाम होने की जानकारी हुई। इसपर उनकी तरफ से हाईकोर्ट में रिट दाखिल की गई। जिसमें सुनवाई करते हुए सीबीसीआईडी तथा सरकार को फटकार लगाते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया। जिस पर सरकार ने अपनी गलती माना। इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने तथ्यों को छिपाकर कर रिट दाखिल करने के मामले में 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। पूर्व विधायक ने कहा कि इस प्रकरण में हाईकोर्ट ने पुलिस महानिदेशक को आदेशित किया कि विवादित जांचकर्ता लल्लन यादव से विवेचना बदलकर किसी दूसरे डिप्टी एसपी रैंक से ऊपर के अधिकारी से कराई जाए। साथ ही मुकदमों का आरोप पत्र चार सप्ताह में प्रेषित की जाए। सरकार ने उच्च न्यायालय की आदेेश की अवहेलना करते हुए पूर्व विवेचक से ही विवेचना शुरू करा दी। जिसे हम लोग कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस अवहेलना के प्रकरण को कोर्ट के पटल पर रखा जाएगा। इस मौके पर पूर्व विधायक गोरख पासवान, डा. विश्राम यादव, संजय यादव, आद्याशंकर यादव, विजय शंकर यादव आदि रहे।
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