{"_id":"6883e2bcb0572d75ad0a94b4","slug":"18-families-became-homeless-due-to-erosion-many-houses-are-at-the-mouth-of-erosion-ballia-news-c-190-1-bal1002-144815-2025-07-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ballia News: कटान में 18 परिवार हो गए बेघर, कई मकान कटान के मुहाने पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ballia News: कटान में 18 परिवार हो गए बेघर, कई मकान कटान के मुहाने पर
विज्ञापन
दयाछपरा। नौरंगा भुवाल छपरा पंचायत की भगवानपुर मौजे में बसे चक्की नौरंगा गांव में गंगा की कटान से 11 मकान नदी में समाहित हो गए हैं। इन मकानों में रहने वाले 18 परिवारों का कुनबा बेघर हो गया है। कई मकान कटान के मुहाने पर हैं।
इस आफत की घड़ी में उनका हाल भी कोई पूछने वाला नहीं है। चक्की नौरंगा वासियों का कहना है कि ना तो कोई कटानरोधी कार्य किया जा रहा है और ना कोई सरकार से सुविधा ही प्राप्त हो रही है। प्रशासन की तरफ से 200 परिवारों को राशन आदि उपलब्ध जरूर कराया गया है लेकिन अभी दुश्वारियां कायम हैं। कटान पीड़ितों ने बताया कि बिहार सरकार की तरफ से लगाए गए जनरेटर के प्रकाश में किसी तरह जीवन यापन करना पड़ रहा है।
पूनम देवी ने बताया कि घर का सामान रिश्तेदार के यहां भेज दिया है। हम लोग क्या खाएं, कहां बैठकर खाना बनाएं और किस चीज पर बनांए। बच्चे कैसे जीवन यापन करेंगे। प्राइमरी पाठशाला में शरण ली हूं पर कोई पूछनहार नहीं है।
विज्ञापन
अनामिका देवी ने बताया कि खाने के लिए राशन तक नहीं है। मकान गंगा की भेंट चढ़ गया। हम लोग तो किसी तरह इधर-उधर खाकर जीवन यापन कर ले रहे हैं पर मावेशियों की चारा कहां से लाए यह समझ में नहीं आता ।
बृज कुमार राम ने बताया कि कटान के भय से घर का खाली कर दिया है। पड़ोसियों के घर रहकर किसी तरह अपने मकान पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन की तरफ से एक दिन भोजन मिला था, दूसरे दिन से वह भी बंद है।
छोटे लाल प्रसाद ने कहा कि घर आधा नदी में कटकर बह गया। घर के महिलाएं रिश्तेदारों के यहां चली गई हैं। अधिकारी आश्वासन की घुट्टी पिलाकर चले जा रहे है। अब तो लगता है कि गंगा चक्की नौरंगा का अस्तित्व ही समाप्त कर देगी।
विज्ञापन
इस आफत की घड़ी में उनका हाल भी कोई पूछने वाला नहीं है। चक्की नौरंगा वासियों का कहना है कि ना तो कोई कटानरोधी कार्य किया जा रहा है और ना कोई सरकार से सुविधा ही प्राप्त हो रही है। प्रशासन की तरफ से 200 परिवारों को राशन आदि उपलब्ध जरूर कराया गया है लेकिन अभी दुश्वारियां कायम हैं। कटान पीड़ितों ने बताया कि बिहार सरकार की तरफ से लगाए गए जनरेटर के प्रकाश में किसी तरह जीवन यापन करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
पूनम देवी ने बताया कि घर का सामान रिश्तेदार के यहां भेज दिया है। हम लोग क्या खाएं, कहां बैठकर खाना बनाएं और किस चीज पर बनांए। बच्चे कैसे जीवन यापन करेंगे। प्राइमरी पाठशाला में शरण ली हूं पर कोई पूछनहार नहीं है।
विज्ञापन
अनामिका देवी ने बताया कि खाने के लिए राशन तक नहीं है। मकान गंगा की भेंट चढ़ गया। हम लोग तो किसी तरह इधर-उधर खाकर जीवन यापन कर ले रहे हैं पर मावेशियों की चारा कहां से लाए यह समझ में नहीं आता ।
बृज कुमार राम ने बताया कि कटान के भय से घर का खाली कर दिया है। पड़ोसियों के घर रहकर किसी तरह अपने मकान पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन की तरफ से एक दिन भोजन मिला था, दूसरे दिन से वह भी बंद है।
छोटे लाल प्रसाद ने कहा कि घर आधा नदी में कटकर बह गया। घर के महिलाएं रिश्तेदारों के यहां चली गई हैं। अधिकारी आश्वासन की घुट्टी पिलाकर चले जा रहे है। अब तो लगता है कि गंगा चक्की नौरंगा का अस्तित्व ही समाप्त कर देगी।