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Ballia News: ओपीडी में पहुंचे 1729 मरीज, लेकिन व्यवस्था बेपटरी होने से हुए परेशान
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बलिया। सर्द मौसम आने से बच्चों से लेकर बुजुर्गों की सेहत पर विपरीत असर पड़ रहा है। सोमवार को ओपीडी में विभिन्न बीमारियों के 1729 मरीज पहुंचे। सबसे ज्यादा सर्दी, जुकाम, खांसी, सांस रोग के मरीज रहे। तमाम सख्ती के बावजूद ओपीडी में चिकित्सकों के समय से नहीं बैठने के कारण दूर-दराज के मरीजों का समय से इलाज नहीं हो पा रहा।
जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार द्वारा बार-बार चेतावनी और सुझाव देने के बाद भी अस्पताल प्रशासन के रवैये में बदलाव नहीं आ रहा है। इसका खामियाजा मरीजों के साथ तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है। सफाई को दरकिनार करें तो अन्य व्यवस्थाएं भी बेपटरी हैं। अस्पताल में दवा से लेकर खून जांच, सीटी स्कैन सहित सभी प्रकार की जांचें निशुल्क उपलब्ध हैं, लेकिन ओपीडी में सक्रिय दलाल मरीजों को बरगला कर बाहर महंगी जांचें करा रहे हैं। ओपीडी, पैथाेलाॅजी, पर्ची काउंटर, ट्राॅमा सेंटर में कुर्सी न होने से मरीज व तीमारदार जमीन पर जहां-तहां बैठे नजर आए।
सड़क की भी है दिक्कत : जिला अस्पताल के पुराने परिसर में ओपीडी व इमरजेंसी है। दूसरे परिसर में पैथाेलाॅजी, एक्स-रे सहित अन्य जांच की सुविधा और वार्ड हैं। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी से चिकित्सक की सलाह पर जांच के लिए स्ट्रेचर पर दूसरे परिसर में आना जाना पड़ता है। रास्ता उबड़-खाबड़ होने के कारण मरीज को ले जाते समय स्ट्रेचर का पहिया उबड़-खाबड़ रास्ते में लड़खड़ाने से मरीज को असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। दोनों परिसर के बीच सड़क बनाने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक इसपर पहल नहीं हुई।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. सुजीत कुमार यादव ने बताया कि इमरजेंसी सहित अन्य जरूरी कार्य से कोई चिकित्सक कुछ समय के लिए जाते हैं। अस्पताल में हर रोग के तीन से चार चिकित्सक मौजूद हैं। सप्ताह का पहला दिन होने के कारण मरीजों की भीड़ को देखते हुए पर्ची काउंटर से लेकर दवा वितरण कक्ष तक प्रर्याप्त कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई थी। मरीजों को बेहतर इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है।
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जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार द्वारा बार-बार चेतावनी और सुझाव देने के बाद भी अस्पताल प्रशासन के रवैये में बदलाव नहीं आ रहा है। इसका खामियाजा मरीजों के साथ तीमारदारों को उठाना पड़ रहा है। सफाई को दरकिनार करें तो अन्य व्यवस्थाएं भी बेपटरी हैं। अस्पताल में दवा से लेकर खून जांच, सीटी स्कैन सहित सभी प्रकार की जांचें निशुल्क उपलब्ध हैं, लेकिन ओपीडी में सक्रिय दलाल मरीजों को बरगला कर बाहर महंगी जांचें करा रहे हैं। ओपीडी, पैथाेलाॅजी, पर्ची काउंटर, ट्राॅमा सेंटर में कुर्सी न होने से मरीज व तीमारदार जमीन पर जहां-तहां बैठे नजर आए।
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सड़क की भी है दिक्कत : जिला अस्पताल के पुराने परिसर में ओपीडी व इमरजेंसी है। दूसरे परिसर में पैथाेलाॅजी, एक्स-रे सहित अन्य जांच की सुविधा और वार्ड हैं। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी से चिकित्सक की सलाह पर जांच के लिए स्ट्रेचर पर दूसरे परिसर में आना जाना पड़ता है। रास्ता उबड़-खाबड़ होने के कारण मरीज को ले जाते समय स्ट्रेचर का पहिया उबड़-खाबड़ रास्ते में लड़खड़ाने से मरीज को असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। दोनों परिसर के बीच सड़क बनाने का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था, लेकिन अब तक इसपर पहल नहीं हुई।
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जिला अस्पताल के सीएमएस डाॅ. सुजीत कुमार यादव ने बताया कि इमरजेंसी सहित अन्य जरूरी कार्य से कोई चिकित्सक कुछ समय के लिए जाते हैं। अस्पताल में हर रोग के तीन से चार चिकित्सक मौजूद हैं। सप्ताह का पहला दिन होने के कारण मरीजों की भीड़ को देखते हुए पर्ची काउंटर से लेकर दवा वितरण कक्ष तक प्रर्याप्त कर्मचारियों की डयूटी लगाई गई थी। मरीजों को बेहतर इलाज देने का प्रयास किया जा रहा है।