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व्यापारियों ने डीएम व एसपी का सौंपा ज्ञापन
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बलिया। अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल प्रांतीय उपाध्यक्ष अरविंद गांधी के नेतृत्व में व्यापारियों ने शनिवार को जिलाधिकारी व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंप न्याय की गुहार लगाई। इसमें मांग की कि वाणिज्य कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर समेत उनके अधीनस्थ अधिकारियों के विरुद्ध जांचकर कठोर कार्रवाई करते हुए बर्खास्त किया जाए, ताकि व्यापारियों को शोषण का शिकार न होना पड़े।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 29 मार्च 2019 को वाणिज्य कर कार्यालय बलिया में उपस्थित व्यापारियों से तैनात डिप्टी कमिश्नर धवल प्रकाश, सहायक आयुक्त सुनील कुमार, विवेक कुमार ने वर्ष 2015-16 के वैट कर निर्धारण की कार्रवाई में व्यापारियों को अपने कक्ष में अलग-अलग बुलाकर 50 हजार से पांच लाख रुपये तक रिश्वत मांगा। रिश्वत नहीं देने पर उक्त अधिकारियों ने व्यापारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई एवं भारी अर्थदंड लगाने की धमकी दी। जिससे नाराज व्यापारियों ने रिश्वत देने से इंकार कर दिया। इसी बात को लेकर अधिकारियों व व्यापारियों के बीच कहासुनी हुई कि आप रिश्वत कैसे मांग सकते है।
इस दौरान कार्यालय में व्यापारी व कर अधिवक्ता भी उपस्थित रहे। इसके बाद अधिकारी अपना-अपना कार्यालय छोड़कर चले गए। आरोप लगाया है कि पिछले वर्षों के फाइलों में मनमाने तरीके से हाथ से लिखा हुआ नोटिस व्यापारियों को भेज दिया जाता है और केस निबटाने के लिए उनको अपने कार्यालय में बुलाकर भारी मात्रा में रिश्वत मांगा जाता है। जबकि डिजिटल साइन होना चाहिये। इससे व्यापारी मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान व अवसाद का शिकार हो गए है। व्यापारियों ने अधिकारियों के विरुद्ध जांचकर निलंबित करने की मांग की। ताकि भारी मात्रा में विभाग को कर देने वाले व्यापारियों को राहत मिल सकें। इस मौके पर संतोष कुमार, संजय सिंह, जिला प्रभारी प्रदीप गुप्ता, राजेश, अशफाक अहमद, प्रभुजी आदि मौजूद रहे।
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ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 29 मार्च 2019 को वाणिज्य कर कार्यालय बलिया में उपस्थित व्यापारियों से तैनात डिप्टी कमिश्नर धवल प्रकाश, सहायक आयुक्त सुनील कुमार, विवेक कुमार ने वर्ष 2015-16 के वैट कर निर्धारण की कार्रवाई में व्यापारियों को अपने कक्ष में अलग-अलग बुलाकर 50 हजार से पांच लाख रुपये तक रिश्वत मांगा। रिश्वत नहीं देने पर उक्त अधिकारियों ने व्यापारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई एवं भारी अर्थदंड लगाने की धमकी दी। जिससे नाराज व्यापारियों ने रिश्वत देने से इंकार कर दिया। इसी बात को लेकर अधिकारियों व व्यापारियों के बीच कहासुनी हुई कि आप रिश्वत कैसे मांग सकते है।
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इस दौरान कार्यालय में व्यापारी व कर अधिवक्ता भी उपस्थित रहे। इसके बाद अधिकारी अपना-अपना कार्यालय छोड़कर चले गए। आरोप लगाया है कि पिछले वर्षों के फाइलों में मनमाने तरीके से हाथ से लिखा हुआ नोटिस व्यापारियों को भेज दिया जाता है और केस निबटाने के लिए उनको अपने कार्यालय में बुलाकर भारी मात्रा में रिश्वत मांगा जाता है। जबकि डिजिटल साइन होना चाहिये। इससे व्यापारी मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान व अवसाद का शिकार हो गए है। व्यापारियों ने अधिकारियों के विरुद्ध जांचकर निलंबित करने की मांग की। ताकि भारी मात्रा में विभाग को कर देने वाले व्यापारियों को राहत मिल सकें। इस मौके पर संतोष कुमार, संजय सिंह, जिला प्रभारी प्रदीप गुप्ता, राजेश, अशफाक अहमद, प्रभुजी आदि मौजूद रहे।
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