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नवजात शिशुओं के लिए वरदान है एसएनसीयू
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बलिया। जिला महिला अस्पताल में स्थित शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) नवजात से लेकर एक माह तक के बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इसकी एक झलक शुक्रवार को देखने को मिला, जब कुछ दिन पूर्व जन्मे 900 ग्राम के शिशु की जान चिकित्सकों ने एसएनसीयू के जरिए बचा ली। बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। शिशु को नया जीवन मिलने से उसके माता-पिता और पूरा परिवार बहुत खुश है।
चितबड़ागांव निवासी सुरेश के घर अभी हाल ही में छह फरवरी को 900 ग्राम के एक शिशु ने जन्म लिया। वह बताते हैं कि उसको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिससे वह और उसका पूरा परिवार घबरा गया था। इसके बाद तुरंत ही पिता सुरेश ने अपने बच्चे को जिला महिला चिकित्सालय के एसएनसीयू में भर्ती करवाया। वहां मौजूद चिकित्सक और विशेषज्ञों की देखरेख में महज चार दिनों के अंदर ही बच्चे में सुधार आ गया। बच्चे की मां ने कंगारू मदर केयर (केएमसी) की सहायता से उसको हाईपोथार्मिया और सांस लेने में हो रही तकलीफ से राहत दी। चिकित्सकों की ओर से मां को केएमसी प्रक्रिया के बारे में संपूर्ण जानकारी दी गई, जिससे वह घर पर भी आसानी से कर सके और साथ ही यह भी बताया गया कि छह माह तक बच्चे को सिर्फ स्तनपान कराना है पानी भी नहीं देना है।
नवजात शिशुओं को एसएनसीयू के माध्यम से बचाया जा रहा है और यह प्रक्रिया मृत्यु दर को कम करने में कारगर साबित हो रहा है। पिछले तीन साल में इस वार्ड से 4500 से ज्यादा नवजात शिशुओं को लाभ मिला है। जिला महिला चिकित्सालय में एसएनसीयू की स्थापना अप्रैल 2016 में हुई थी। अप्रैल 2016 से दिसंबर 2018 तक लगभग 5000 बच्चों का इलाज किया गया है।
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जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राशिद इमामुद्दीन ने बताया कि यह वार्ड एक माह तक के उन नवजात शिशुओं के लिए बनाया गया है, जो समय से पहले पैदा हुए हों, कम वजन हों और शिशु को सांस लेने में समस्या होती हो। इसके अलावा, एक माह तक के शिशुओं को नीला, पीला या निमोनिया जैसी बीमारियां होने पर उनका नि:शुल्क एवं बेहतर इलाज किया जाता है। यहां शिशुओं के लिए 24 घंटे ऑक्सीजन की व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इकाई में रेडिएंट वार्मर (बच्चों को गर्म रखने के लिए), फोटो थैरेपी (पीलिया पीड़ित बच्चों के लिए) एक्यूवेटर (कम वजन वाले बच्चों के लिए), एसी और हीटर भी लगे हुए हैं।
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चितबड़ागांव निवासी सुरेश के घर अभी हाल ही में छह फरवरी को 900 ग्राम के एक शिशु ने जन्म लिया। वह बताते हैं कि उसको सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिससे वह और उसका पूरा परिवार घबरा गया था। इसके बाद तुरंत ही पिता सुरेश ने अपने बच्चे को जिला महिला चिकित्सालय के एसएनसीयू में भर्ती करवाया। वहां मौजूद चिकित्सक और विशेषज्ञों की देखरेख में महज चार दिनों के अंदर ही बच्चे में सुधार आ गया। बच्चे की मां ने कंगारू मदर केयर (केएमसी) की सहायता से उसको हाईपोथार्मिया और सांस लेने में हो रही तकलीफ से राहत दी। चिकित्सकों की ओर से मां को केएमसी प्रक्रिया के बारे में संपूर्ण जानकारी दी गई, जिससे वह घर पर भी आसानी से कर सके और साथ ही यह भी बताया गया कि छह माह तक बच्चे को सिर्फ स्तनपान कराना है पानी भी नहीं देना है।
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नवजात शिशुओं को एसएनसीयू के माध्यम से बचाया जा रहा है और यह प्रक्रिया मृत्यु दर को कम करने में कारगर साबित हो रहा है। पिछले तीन साल में इस वार्ड से 4500 से ज्यादा नवजात शिशुओं को लाभ मिला है। जिला महिला चिकित्सालय में एसएनसीयू की स्थापना अप्रैल 2016 में हुई थी। अप्रैल 2016 से दिसंबर 2018 तक लगभग 5000 बच्चों का इलाज किया गया है।
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जिला महिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राशिद इमामुद्दीन ने बताया कि यह वार्ड एक माह तक के उन नवजात शिशुओं के लिए बनाया गया है, जो समय से पहले पैदा हुए हों, कम वजन हों और शिशु को सांस लेने में समस्या होती हो। इसके अलावा, एक माह तक के शिशुओं को नीला, पीला या निमोनिया जैसी बीमारियां होने पर उनका नि:शुल्क एवं बेहतर इलाज किया जाता है। यहां शिशुओं के लिए 24 घंटे ऑक्सीजन की व्यवस्था उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि इकाई में रेडिएंट वार्मर (बच्चों को गर्म रखने के लिए), फोटो थैरेपी (पीलिया पीड़ित बच्चों के लिए) एक्यूवेटर (कम वजन वाले बच्चों के लिए), एसी और हीटर भी लगे हुए हैं।