{"_id":"5d0faec68ebc3e3d172fbfb7","slug":"156130885411-ballia-news191","type":"story","status":"publish","title_hn":"तालाब, पोखरियों आदि सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तालाब, पोखरियों आदि सार्वजनिक स्थानों पर अतिक्रमण बरकरार
विज्ञापन
बलिया। तालाब, पोखरों समेत सार्वजनिक स्थलों से अतिक्रमण हटाने के सख्त आदेश के बाद भी कई स्थानों पर अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका। ऐसे कुछ मामलों में कोर्ट के आदेश का भी पालन नहीं हो सका। कई ऐसे भी मामले में जिनकी शिकायतें तहसील दिवस पर लगातार की गईं लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने 739 स्थानों से अतिक्रमण को हटवाते हुए 101.53 हेक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का दावा किया है जबकि 13 मामलों को लंबित बताया गया है।
दो वर्ष पूर्व प्रदेश सरकार ने प्रभावशाली व दबंग व्यक्तियों, राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी भूमियों, धार्मिक संस्थानों, प्रतिष्ठानों, लावारिस संपत्तियों के अलावा गरीब व कमजोर व्यक्तियों की भूमियों पर अवैध कब्जा को हटाने का आदेश दिया था। इसके तहत गांवों में स्थित सार्वजनिक उपयोग की भूमि, तालाब, पोखरे, चारागाह, कब्रिस्तान, श्मशान, कुंआ, सड़क किनारे की जमीन, चकमार्ग, चकनाली आदि पर हुए अतिक्रमण हटवाया जाना था लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति यह है कि गांवों के तालाब व पोखरियों पर अतिक्रमण के कारण गांवों में जल निकासी की समस्या विकराल रूप ले चुकी हैं। दूसरी ओर तालाब व पोखरियों पर अतिक्रमण से जल संरक्षण भी प्रभावित हो रहा है।
सोहांव ब्लॉक के अमांव गांव के सरकारी भूमि अराजी संख्या 183 पर वर्षों से अतिक्रमण है। पांच साल पहले गांव के तत्कालीन लेखपाल ने पांच लोगों जवाहिर, नारद यादव, मोतीलाल, रामप्रताप यादव्र औ राम विलास के खिलाफ 115 सी की रिपोर्ट तहसील को देकर बताया कि इन लोगों ने सरकारी संपत्ति पर कब्जा कर नुकसान पहुंचाया है। वर्ष 2014 में तहसील प्रशासन ने रामविलास पर 10 हजार, नारद व जवाहिर पर 12-12 हजार तथा रामप्रताप व मोतीलाल पर 14-14 हजार का जुर्माना लगाते हुए बेदखली का आदेश दिया। इसके बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका। मामले में हाईकोर्ट के आदेश का भी अनुपालन नहीं हो सका है।
विज्ञापन
इसी ब्लाक के पलियाखास उर्फ बड़काखेत गांव की गड़हियों को पाट कर घर बनवा लिया गया है। इस मामले में गांव के राजेश यादव आदि ने तीन साल में 15 बार से अधिक शिकायतें की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को दो माह में गड़हियों को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया लेकिन स्थिति यथावत है। एडीएम रामआसरे ने बताया कि तालाब, पोखरी और सार्वजनिक स्थलों पर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। कुछ मामलेे कोर्ट में विचाराधीन होते है जिससे कार्रवाई नहीं हो पाती है। जल्द ही अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाएगा।
अतिक्रमण हटाने को मुकदमा करने की सलाह : बलिया। सोहांव ब्लॉक के भरौली गांव निवासी चंद्रमणि राय ने छह अप्रैल 2017 से अब तक कई बार तहसील दिवस और अधिकारियों से शिकायत कर गांव के सार्वजनिक गड़हियों पर हुए अतिक्रमण को हटाने की गुहार लगाई। लेकिन तहसील प्रशासन मामले को ठंडे बस्ते में डाले रहा। उनका आरोप है कि कई बार तो अधिकारियों ने यह कह कर कि मामले को निस्तारित कर दिया कि इसके लिए राजस्व वाद दायर करें। अतिक्रमण नहीं हटने से बारिश होने पर भी गांव का पानी एनएच 31 पर भर जाता है।
विज्ञापन
दो वर्ष पूर्व प्रदेश सरकार ने प्रभावशाली व दबंग व्यक्तियों, राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों और स्थानीय अधिकारियों की मिलीभगत से सरकारी भूमियों, धार्मिक संस्थानों, प्रतिष्ठानों, लावारिस संपत्तियों के अलावा गरीब व कमजोर व्यक्तियों की भूमियों पर अवैध कब्जा को हटाने का आदेश दिया था। इसके तहत गांवों में स्थित सार्वजनिक उपयोग की भूमि, तालाब, पोखरे, चारागाह, कब्रिस्तान, श्मशान, कुंआ, सड़क किनारे की जमीन, चकमार्ग, चकनाली आदि पर हुए अतिक्रमण हटवाया जाना था लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। स्थिति यह है कि गांवों के तालाब व पोखरियों पर अतिक्रमण के कारण गांवों में जल निकासी की समस्या विकराल रूप ले चुकी हैं। दूसरी ओर तालाब व पोखरियों पर अतिक्रमण से जल संरक्षण भी प्रभावित हो रहा है।
विज्ञापन
सोहांव ब्लॉक के अमांव गांव के सरकारी भूमि अराजी संख्या 183 पर वर्षों से अतिक्रमण है। पांच साल पहले गांव के तत्कालीन लेखपाल ने पांच लोगों जवाहिर, नारद यादव, मोतीलाल, रामप्रताप यादव्र औ राम विलास के खिलाफ 115 सी की रिपोर्ट तहसील को देकर बताया कि इन लोगों ने सरकारी संपत्ति पर कब्जा कर नुकसान पहुंचाया है। वर्ष 2014 में तहसील प्रशासन ने रामविलास पर 10 हजार, नारद व जवाहिर पर 12-12 हजार तथा रामप्रताप व मोतीलाल पर 14-14 हजार का जुर्माना लगाते हुए बेदखली का आदेश दिया। इसके बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका। मामले में हाईकोर्ट के आदेश का भी अनुपालन नहीं हो सका है।
विज्ञापन
इसी ब्लाक के पलियाखास उर्फ बड़काखेत गांव की गड़हियों को पाट कर घर बनवा लिया गया है। इस मामले में गांव के राजेश यादव आदि ने तीन साल में 15 बार से अधिक शिकायतें की लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी को दो माह में गड़हियों को अतिक्रमण मुक्त कराने का आदेश दिया लेकिन स्थिति यथावत है। एडीएम रामआसरे ने बताया कि तालाब, पोखरी और सार्वजनिक स्थलों पर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। कुछ मामलेे कोर्ट में विचाराधीन होते है जिससे कार्रवाई नहीं हो पाती है। जल्द ही अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाया जाएगा।
अतिक्रमण हटाने को मुकदमा करने की सलाह : बलिया। सोहांव ब्लॉक के भरौली गांव निवासी चंद्रमणि राय ने छह अप्रैल 2017 से अब तक कई बार तहसील दिवस और अधिकारियों से शिकायत कर गांव के सार्वजनिक गड़हियों पर हुए अतिक्रमण को हटाने की गुहार लगाई। लेकिन तहसील प्रशासन मामले को ठंडे बस्ते में डाले रहा। उनका आरोप है कि कई बार तो अधिकारियों ने यह कह कर कि मामले को निस्तारित कर दिया कि इसके लिए राजस्व वाद दायर करें। अतिक्रमण नहीं हटने से बारिश होने पर भी गांव का पानी एनएच 31 पर भर जाता है।