{"_id":"61802be8fe99c626000da832","slug":"142nd-foundation-day-of-ballia-celebrated-ballia-news-vns620581129","type":"story","status":"publish","title_hn":"मनाया गया बलिया का 142वां स्थापना दिवस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मनाया गया बलिया का 142वां स्थापना दिवस
विज्ञापन
बलिया। नगर के भृगु मंदिर परिसर में सोमवार को बलिया जिले का 142वां स्थापना दिवस मनाया गया। शुभारंभ के बाद शिवजी पांडेय रसराज ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम को आगे बढ़ाया।
शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि एक राष्ट्र की अपनी भाषा, संस्कृति, भोजन, भू-भाग होता है। यह सारी चीजें बलिया के पास हैं। बलिया जिले की स्थापना एक नवंबर 1879 को हुई थी। इसके बाद देश में एक नवंबर को ही मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पं. बंगाल एवं केंद्र शासित पांडिचेरी, चंडीगढ़ का गठन हुआ था। यह सभी प्रदेश आयु में बलिया जिले से छोटे हैं। कहा कि जिले का विकास इसके योगदान के अनुरूप नहीं हुआ। कवि रमाशंकर मनहर ने ़कहा कि बलि की राजधानी खंदानी बलिदानी भूमि। भोजपुरी भूषण नंदजी नंदा ने गाया ‘प्रान के हथेली पर ले के जहां के जवान घूमें।’ इस विमुक्तभूमि, भृगुक्षेत्र, दर्दर क्षेत्र का प्रामाणिक इतिहास मि. एचआर नेविल द्वारा संकलित गजेटियर के पृष्ठ 208 से प्रारंभ होता है। उन्होंने कहा कि इस जनपद का नामकरण के संदर्भ में ब्रिटिश इतिहासकारों ने यहां रामायण महाकाव्य के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का आश्रम होने से वाल्मीकि आश्रम, वाल्मीकिया से बलिया होना बताया है। कहा कि एक नवंबर 1879 को बलिया जिले की स्थापना हुई थी। उस समय इस जिले में बलिया, बांसडीह और रसड़ा तीन तहसील बनी थी। अब जरूरत है कि जिले के गौरव के अनुसार इसका विकास भी किया जाए। इस मौके पर शिवजी पांडेय रसराज, फतेहचंद्र बेचैन, जनार्दन चतुर्वेदी, डॉ. कादम्बिनी सिंह, राजेंद्र भारती, नवचंद्र तिवारी, आशीष त्रिवेदी आदि ने दो-दो रचनाएं प्रस्तुत की। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय एवं संचालन शशि प्रेमदेव ने किया। संवाद
विज्ञापन
शिवकुमार सिंह कौशिकेय ने कहा कि एक राष्ट्र की अपनी भाषा, संस्कृति, भोजन, भू-भाग होता है। यह सारी चीजें बलिया के पास हैं। बलिया जिले की स्थापना एक नवंबर 1879 को हुई थी। इसके बाद देश में एक नवंबर को ही मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, राजस्थान, पं. बंगाल एवं केंद्र शासित पांडिचेरी, चंडीगढ़ का गठन हुआ था। यह सभी प्रदेश आयु में बलिया जिले से छोटे हैं। कहा कि जिले का विकास इसके योगदान के अनुरूप नहीं हुआ। कवि रमाशंकर मनहर ने ़कहा कि बलि की राजधानी खंदानी बलिदानी भूमि। भोजपुरी भूषण नंदजी नंदा ने गाया ‘प्रान के हथेली पर ले के जहां के जवान घूमें।’ इस विमुक्तभूमि, भृगुक्षेत्र, दर्दर क्षेत्र का प्रामाणिक इतिहास मि. एचआर नेविल द्वारा संकलित गजेटियर के पृष्ठ 208 से प्रारंभ होता है। उन्होंने कहा कि इस जनपद का नामकरण के संदर्भ में ब्रिटिश इतिहासकारों ने यहां रामायण महाकाव्य के रचयिता महर्षि वाल्मीकि का आश्रम होने से वाल्मीकि आश्रम, वाल्मीकिया से बलिया होना बताया है। कहा कि एक नवंबर 1879 को बलिया जिले की स्थापना हुई थी। उस समय इस जिले में बलिया, बांसडीह और रसड़ा तीन तहसील बनी थी। अब जरूरत है कि जिले के गौरव के अनुसार इसका विकास भी किया जाए। इस मौके पर शिवजी पांडेय रसराज, फतेहचंद्र बेचैन, जनार्दन चतुर्वेदी, डॉ. कादम्बिनी सिंह, राजेंद्र भारती, नवचंद्र तिवारी, आशीष त्रिवेदी आदि ने दो-दो रचनाएं प्रस्तुत की। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जनार्दन राय एवं संचालन शशि प्रेमदेव ने किया। संवाद
विज्ञापन