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नगर में 30 स्थानों पर स्थापित है हाइड्रेंट
Updated Sat, 27 Oct 2018 11:52 PM IST
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बलिया। नगर क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर आग को बुझाने के लिए कुल 30 हाइड्रेंट लगाए गए थे। ताकि आग पर त्वरित अग्निशमन कार्रवाई कर सकें। लेकिन ये सभी हाइड्रेंट शोपीस बने हुए है। कारण कि एक-दो को छोड़ दिया जाय तो सभी हाइड्रेंट सड़क में दब गए है। वहीं एक-दो देखरेख के अभाव में जाम हो गये हैं। ऐसे में अगर नगर में आग लग गई तो अग्निशमन विभाग को आग पर काबू पाने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
मालूम हो कि बेल्थरारोड, बांसडीह, बैरिया एवं सदर तहसील में हर साल आग की विनाशकारी लीला जारी रहती है। इससे निजात दिलाने के लिए नगर के विभिन्न स्थानों पर कुल 30 हाइड्रेंट बनाए स्थापित किए गए थे। ताकि नगर में कहीं किन्हीं कारणवश आग लगती है तो हाइड्रेंट की मदद से उस पर तत्काल काबू पाया जा सकें। लेकिन एक-दो को छोड़ दिया जाय तो सभी हाइड्रेंट सड़क में दब गए है तो एक-दो देखरेख के अभाव में जाम पड़े हुए है। ऐसे में अगर नगर में आग लगती है तो आग पर काबू पाना अग्निशमन विभाग के लिए कड़ी चुनौती होगी। नगर में नगरपालिका विभाग द्वारा सड़क तो बनाया गया। लेकिन हाइड्रेंट को ऊपर उठाने के बजाय उसे सड़क में दबा दिया गया। उन्हें थोड़ी परवाह नहीं कि अगर नगर में आग लगता है तो क्या होगा। यही हाल जल निगम विभाग का है। जल निगम एवं अग्निशमन विभाग सड़क निर्माण के दौरान कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि हाइड्रेंट सही सलामत है या नहीं। इसमें नगरपालिका विभाग के साथ ही जल निगम व अग्निशमन विभाग की भी लापरवाही दिख रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण शुक्रवार की देर शाम वसुंधरा मार्केट में लगी आग है। जहां पानी के लिए अग्निशमन विभाग के जवानों को पांच-छह राउंड दौड़ना पड़ा। अगर हाइड्रेंट मौजूद रहता तथा सही रहता तो शायद आग पर शीघ्र काबू पाया जा सकता था और अन्य दुकानों को बचाया जा सकता था। लेकिन हाइड्रेंट की कमी वसुंधरा मार्केट में लगी आग के दौरान साफ दिखी।
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मालूम हो कि बेल्थरारोड, बांसडीह, बैरिया एवं सदर तहसील में हर साल आग की विनाशकारी लीला जारी रहती है। इससे निजात दिलाने के लिए नगर के विभिन्न स्थानों पर कुल 30 हाइड्रेंट बनाए स्थापित किए गए थे। ताकि नगर में कहीं किन्हीं कारणवश आग लगती है तो हाइड्रेंट की मदद से उस पर तत्काल काबू पाया जा सकें। लेकिन एक-दो को छोड़ दिया जाय तो सभी हाइड्रेंट सड़क में दब गए है तो एक-दो देखरेख के अभाव में जाम पड़े हुए है। ऐसे में अगर नगर में आग लगती है तो आग पर काबू पाना अग्निशमन विभाग के लिए कड़ी चुनौती होगी। नगर में नगरपालिका विभाग द्वारा सड़क तो बनाया गया। लेकिन हाइड्रेंट को ऊपर उठाने के बजाय उसे सड़क में दबा दिया गया। उन्हें थोड़ी परवाह नहीं कि अगर नगर में आग लगता है तो क्या होगा। यही हाल जल निगम विभाग का है। जल निगम एवं अग्निशमन विभाग सड़क निर्माण के दौरान कभी यह जानने की कोशिश नहीं की कि हाइड्रेंट सही सलामत है या नहीं। इसमें नगरपालिका विभाग के साथ ही जल निगम व अग्निशमन विभाग की भी लापरवाही दिख रही है। जिसका जीता जागता उदाहरण शुक्रवार की देर शाम वसुंधरा मार्केट में लगी आग है। जहां पानी के लिए अग्निशमन विभाग के जवानों को पांच-छह राउंड दौड़ना पड़ा। अगर हाइड्रेंट मौजूद रहता तथा सही रहता तो शायद आग पर शीघ्र काबू पाया जा सकता था और अन्य दुकानों को बचाया जा सकता था। लेकिन हाइड्रेंट की कमी वसुंधरा मार्केट में लगी आग के दौरान साफ दिखी।
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