{"_id":"5c86a72abdec221462307d73","slug":"131552328490-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सामूहिक विवाह को लेकर उदासीन, शादी अनुदान को मारामारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सामूहिक विवाह को लेकर उदासीन, शादी अनुदान को मारामारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। लगातार दूसरे साल भी प्रदेश सरकार की सामूहिक विवाह योजना परवान नहीं चढ़ सका। वर्ष 2018-19 का वित्तीय साल समाप्ति की ओर से है लेकिन अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष महज 22 फीसदी ही सामूहिक विवाह कराए जा सके हैं। जबकि इसके अलावा संचालित शादी अनुदान योजना में मारामारी मची है।
वर्ष 2017-18 में प्रदेश सरकार ने शादी अनुदान योजना को बंद कर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को लागू किया। शासन की ओर से जिले के लिए कुल 476 वर-वधू की शादी का लक्ष्य निर्धारित किया गया। शादी संपन्न कराने व गरीब बेटियों को अनुदान देने के लिए सरकार ने जिला समाज कल्याण विभाग को कुल एक करोड़ 66 लाख 60 हजार की धनराशि भी उपलब्ध कराई। लेकिन अधिकारियों की ओर से शादी कराने को लेकर कोई ठोस कवायद नहीं की गई और अधिकांश धनराशि विभाग को सरेंडर करना पड़ा।
इसके बाद शासन की ओर से वर्ष 2018-19 में सरकार ने जहां पूर्व से संचालित शादी अनुदान को शासन की ओर से 1500 सामूहिक शादी कराने का लक्ष्य जिले के लिए निर्धारित किया गया। इसके लिए शासन की ओर से 2.27 करोड़ की धनराशि भी जिला समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध करा दी गई। लेकिन वित्तीय साल समाप्ति की ओर है अभी तक महज 336 सामूहिक विवाह की कराए जा सके हैं जो लक्ष्य के सापेक्ष 22 फीसदी ही है। जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से अब तक केवल 1.24 करोड़ की ही धनराशि खर्च की गई है।
विज्ञापन
शासन की ओर से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अलावा शादी अनुदान योजना का भी संचालन किया जाता है। दोनों ही योजनाएं जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित की जाती है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को लेकर लोग उदासीन हैं वहीं शादी अनुदान के लिए मारामारी मची है। जिला समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2018-19 में जिले में कुल 1762 लाभार्थियों को शादी अनुदान वितरण किए गए हैं जबकि 702 आवेदन अभी भी विभाग में पड़े हुए हैं। शादी अनुदान लेने वालों में सामान्य वर्ग के 872, अनुसूचित जाति के 870 व अनुसूचित जनजाति के 52 लाभार्थी हैं। वहीं, सामान्य के 250, अनुसूचित जाति के 500 व अनुसूचित जनजाति के 52 आवेदन लंबित हैं।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से क्रियान्वित किया जाता है। शासन के नियमों के मुताबिक इसके लिए लाभार्थियों से आवेदन लिए जाएंगे। आवेदन के साथ पात्रता निर्धारण के लिए ग्रामीण क्षेत्र के आवेदक की वार्षिक आय 46 हजार व शहरी क्षेत्र के आवेदक की वार्षिक आय 56 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए। पात्रता तय होने के बाद शासन की ओर से प्रति जोड़े शादी के लिए कुल 35 हजार खर्च करने का प्रावधान है। इसमें 20 हजार की धनराशि को बेटी के खाते में भेजा जाएगा और 10 हजार के हल्के जेवरात आदि उपहार में दिए जाएंगे। प्रति जोड़े की शादी में खाने-पीने, टेंट आदि पर पांच हजार खर्च किए जाएंगे। हालांकि शासन ने फरवरी महीने में इसमें बदलाव कर कुल खर्च 51 हजार रुपये कर दिया। इसके तहत बेटी के खाते में 35 हजार, हल्के जेवरात आदि के लिए 10 हजार व प्रति जोड़े खाने-पीने, टेंट आदि के लिए छह हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान किया।
विज्ञापन
वर्ष 2017-18 में प्रदेश सरकार ने शादी अनुदान योजना को बंद कर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को लागू किया। शासन की ओर से जिले के लिए कुल 476 वर-वधू की शादी का लक्ष्य निर्धारित किया गया। शादी संपन्न कराने व गरीब बेटियों को अनुदान देने के लिए सरकार ने जिला समाज कल्याण विभाग को कुल एक करोड़ 66 लाख 60 हजार की धनराशि भी उपलब्ध कराई। लेकिन अधिकारियों की ओर से शादी कराने को लेकर कोई ठोस कवायद नहीं की गई और अधिकांश धनराशि विभाग को सरेंडर करना पड़ा।
विज्ञापन
इसके बाद शासन की ओर से वर्ष 2018-19 में सरकार ने जहां पूर्व से संचालित शादी अनुदान को शासन की ओर से 1500 सामूहिक शादी कराने का लक्ष्य जिले के लिए निर्धारित किया गया। इसके लिए शासन की ओर से 2.27 करोड़ की धनराशि भी जिला समाज कल्याण विभाग को उपलब्ध करा दी गई। लेकिन वित्तीय साल समाप्ति की ओर है अभी तक महज 336 सामूहिक विवाह की कराए जा सके हैं जो लक्ष्य के सापेक्ष 22 फीसदी ही है। जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से अब तक केवल 1.24 करोड़ की ही धनराशि खर्च की गई है।
विज्ञापन
शासन की ओर से मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अलावा शादी अनुदान योजना का भी संचालन किया जाता है। दोनों ही योजनाएं जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित की जाती है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को लेकर लोग उदासीन हैं वहीं शादी अनुदान के लिए मारामारी मची है। जिला समाज कल्याण विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2018-19 में जिले में कुल 1762 लाभार्थियों को शादी अनुदान वितरण किए गए हैं जबकि 702 आवेदन अभी भी विभाग में पड़े हुए हैं। शादी अनुदान लेने वालों में सामान्य वर्ग के 872, अनुसूचित जाति के 870 व अनुसूचित जनजाति के 52 लाभार्थी हैं। वहीं, सामान्य के 250, अनुसूचित जाति के 500 व अनुसूचित जनजाति के 52 आवेदन लंबित हैं।
मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना को जिला समाज कल्याण विभाग की ओर से क्रियान्वित किया जाता है। शासन के नियमों के मुताबिक इसके लिए लाभार्थियों से आवेदन लिए जाएंगे। आवेदन के साथ पात्रता निर्धारण के लिए ग्रामीण क्षेत्र के आवेदक की वार्षिक आय 46 हजार व शहरी क्षेत्र के आवेदक की वार्षिक आय 56 हजार से अधिक नहीं होनी चाहिए। पात्रता तय होने के बाद शासन की ओर से प्रति जोड़े शादी के लिए कुल 35 हजार खर्च करने का प्रावधान है। इसमें 20 हजार की धनराशि को बेटी के खाते में भेजा जाएगा और 10 हजार के हल्के जेवरात आदि उपहार में दिए जाएंगे। प्रति जोड़े की शादी में खाने-पीने, टेंट आदि पर पांच हजार खर्च किए जाएंगे। हालांकि शासन ने फरवरी महीने में इसमें बदलाव कर कुल खर्च 51 हजार रुपये कर दिया। इसके तहत बेटी के खाते में 35 हजार, हल्के जेवरात आदि के लिए 10 हजार व प्रति जोड़े खाने-पीने, टेंट आदि के लिए छह हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान किया।