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ट्रायल के लिए इलेक्ट्रिक इंजन बलिया से वाराणसी के लिए रवाना र
Updated Sat, 24 Mar 2018 10:23 PM IST
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बलिया। वाराणसी-बलिया रेलखंड पर विद्युतीकरण की कवायद पूरी हो गई है। शनिवार को इस मार्ग पर इलेक्ट्रिक इंजन का फाइनल परीक्षण किया गया। सीआरएस के नेतृत्व में पहुंची टीम ने इस मार्ग का निरीक्षण किया तथा कमियों को इंगित कर उसे दुरुस्त कराया। बलिया रेलवे स्टेशन से शाम करीब पांच बजकर 58 मिनट पर इलेक्ट्रिक इंजन वाराणसी के लिए रवाना हुई।
बलिया-वाराणसी रेलखंड पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन को लेकर मुख्य रेल सुरक्षा संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) एसके पांडेय शनिवार को शाम करीब साढ़े तीन बजे बलिया स्टेशन पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गहन निरीक्षण किया। कई स्थानों पर कमियां मिलने पर उसे इंगित किया और दुरुस्त कराने का निर्देश दिया। श्री पांडेय ने बताया कि इलेक्ट्रिक ट्रेन का संचालन में अभी करीब एक पखवारा का समय लग सकता है। हालांकि कमियों को दुरुस्त कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि छपरा और बलिया के बीच भी विद्युुतीकरण का कार्य चल रहा है। इसे पूरा होने में कम से कम छह माह का समय लग सकता है। यात्रियों को समुचित लाभ तभी मिलेगा, जब छपरा तक विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो जाए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बलिया से खुलने वाली करीब छह पैसेंजर ट्रेनों का ही परिचालन इलेक्ट्रिक इंजन से होगा। इस मौके पर स्टेशन अधीक्षक संजय सिंह, स्टेशन मास्टर बीरबल गुप्ता, मनोज तिवारी, सुनील सिंह आदि मौजूद रहे। वाराणसी के लिए रवाना हुए इलेक्ट्रिक इंजन के साथ सीआरएस का स्पेशल सैलून भी जुड़ा था, जिसमें सीआरएस एसके पांडेय, डीआरएम एके झामर मंडल परिचालन प्रबंधक एके उपाध्याय के अलावा रेल अधिकारी मौजूद रहे।
छपरा से आया था इलेक्ट्रिक इंजन
बलिया। वाराणसी रेलखंड पर ट्रायल के लिए छपरा से इलेक्ट्रिक इंजन सुबह करीब साढ़े नौ बजे बलिया रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया था। स्टेशन पर पहुंचने के बाद करीब 11 बजे सीआरएस का सैलून पहुंचा। सैलून में रेलवे के अधिकारियों की देखरेख में प्लेटफार्म पर इंजन का ट्रायल शुरू कराया गया।
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दिनभर बाधित रहा एक नंबर प्लेटफार्म
बलिया। विद्युतीकरण को लेकर इलेक्ट्रिक इंजन के ट्रायल के मद्देनजर बलिया रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर एक सुबह 11 बजे से शाम छह बजे बाधित रहा। इस कारण सभी ट्रेनों का संचालन दो और तीन नंबर प्लेटफार्म से ही कराया गया।
तार में लाइन देते ही हुआ ब्लास्ट
बलिया। सीआएस के निरीक्षण के बाद शाम करीब पांच बजे स्टेशन के ओवरब्रिज के नीचे तेज आवाज के साथ ब्लास्ट कर गया, जिससे अफरातफरी मच गई। सीआरएस ने तत्काल इसे दुरुस्त कराया। विभागीय इंजीनियरों ने बताया कि ओवरब्रिज में लगा करकट से तार की दूरी बहुत कम थी, जिसे दुरुस्त करा दिया गया है।
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बलिया-वाराणसी रेलखंड पर इलेक्ट्रिक ट्रेनों के संचालन को लेकर मुख्य रेल सुरक्षा संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) एसके पांडेय शनिवार को शाम करीब साढ़े तीन बजे बलिया स्टेशन पर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गहन निरीक्षण किया। कई स्थानों पर कमियां मिलने पर उसे इंगित किया और दुरुस्त कराने का निर्देश दिया। श्री पांडेय ने बताया कि इलेक्ट्रिक ट्रेन का संचालन में अभी करीब एक पखवारा का समय लग सकता है। हालांकि कमियों को दुरुस्त कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि छपरा और बलिया के बीच भी विद्युुतीकरण का कार्य चल रहा है। इसे पूरा होने में कम से कम छह माह का समय लग सकता है। यात्रियों को समुचित लाभ तभी मिलेगा, जब छपरा तक विद्युतीकरण का कार्य पूरा हो जाए। उन्होंने बताया कि शुरुआत में बलिया से खुलने वाली करीब छह पैसेंजर ट्रेनों का ही परिचालन इलेक्ट्रिक इंजन से होगा। इस मौके पर स्टेशन अधीक्षक संजय सिंह, स्टेशन मास्टर बीरबल गुप्ता, मनोज तिवारी, सुनील सिंह आदि मौजूद रहे। वाराणसी के लिए रवाना हुए इलेक्ट्रिक इंजन के साथ सीआरएस का स्पेशल सैलून भी जुड़ा था, जिसमें सीआरएस एसके पांडेय, डीआरएम एके झामर मंडल परिचालन प्रबंधक एके उपाध्याय के अलावा रेल अधिकारी मौजूद रहे।
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छपरा से आया था इलेक्ट्रिक इंजन
बलिया। वाराणसी रेलखंड पर ट्रायल के लिए छपरा से इलेक्ट्रिक इंजन सुबह करीब साढ़े नौ बजे बलिया रेलवे स्टेशन पर पहुंच गया था। स्टेशन पर पहुंचने के बाद करीब 11 बजे सीआरएस का सैलून पहुंचा। सैलून में रेलवे के अधिकारियों की देखरेख में प्लेटफार्म पर इंजन का ट्रायल शुरू कराया गया।
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दिनभर बाधित रहा एक नंबर प्लेटफार्म
बलिया। विद्युतीकरण को लेकर इलेक्ट्रिक इंजन के ट्रायल के मद्देनजर बलिया रेलवे स्टेशन का प्लेटफार्म नंबर एक सुबह 11 बजे से शाम छह बजे बाधित रहा। इस कारण सभी ट्रेनों का संचालन दो और तीन नंबर प्लेटफार्म से ही कराया गया।
तार में लाइन देते ही हुआ ब्लास्ट
बलिया। सीआएस के निरीक्षण के बाद शाम करीब पांच बजे स्टेशन के ओवरब्रिज के नीचे तेज आवाज के साथ ब्लास्ट कर गया, जिससे अफरातफरी मच गई। सीआरएस ने तत्काल इसे दुरुस्त कराया। विभागीय इंजीनियरों ने बताया कि ओवरब्रिज में लगा करकट से तार की दूरी बहुत कम थी, जिसे दुरुस्त करा दिया गया है।