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Ballia News: गंगा की जलधारा में 12 बीघे फसल समाई
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रामगढ़। गंगा के जलस्तर में घटाव का क्रम रविवार को भी जारी रहा। बावजूद उतरती लहरों का कहर जारी है। नदी की लहरें उस पार की पंचायत नौरंगा के मौजा भगवानपुर में रुक-रुक कर लगातार कहर बरपा रही है। तेजी से बस्ती की ओर बढ़ रही नदी के रुख के बाद ग्रामीण सहमे हुए हैं।
केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार, रविवार शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 56.650 मीटर रिकार्ड किया गया। नदी अब भी यहां अपने चेतावनी बिंदु से पांच सेमी ऊपर बह रही है। नदी में एक सेमी प्रति घंटे का घटाव हो रहा है। यहां खतरा बिंदु 57.615 मीटर है। दूसरी तरफ, प्रभावित क्षेत्रों विशेषकर नदी पार की पंचायत नौरंगा में उतरती लहरों का कहर रविवार को भी बदस्तूर जारी था।
ग्रामीणों के अनुसार, पिछले चौबीस घंटे शांत रही लहरें सुबह से एक बार फिर कटान के रूप में उत्पात मचाना शुरू कर दी। पांच घंटों के बीच गांव के राजमंगल ठाकुर, हरिनरायन ठाकुर, पारस ठाकुर, रामजी ठाकुर आदि के बारह बीघे से अधिक भूमि परवल की फसल सहित नदी में समाहित हो गई। कटान के रूप में आई इस आपदा ने अब तक यहां के दर्जनों किसानों की कमर तोड़ चुकी है। आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से हो रहे कटान के प्रति बचाव की बागडोर संभालने में बाढ़ खंड संवेदनहीन बना हुआ है। कोई भी जिम्मेदार पीड़ितों की सुधि तक नहीं ले रहा है। उधर, बीते दिनों के घटाव के बाद नदी का जलस्तर करीब डेढ़ मीटर नीचे खिसक गया है। इससे एनएच-31 से गंगा की लहरों का दबाव काफी कम हो गया है।
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केंद्रीय जल आयोग गायघाट के अनुसार, रविवार शाम चार बजे गंगा का जलस्तर 56.650 मीटर रिकार्ड किया गया। नदी अब भी यहां अपने चेतावनी बिंदु से पांच सेमी ऊपर बह रही है। नदी में एक सेमी प्रति घंटे का घटाव हो रहा है। यहां खतरा बिंदु 57.615 मीटर है। दूसरी तरफ, प्रभावित क्षेत्रों विशेषकर नदी पार की पंचायत नौरंगा में उतरती लहरों का कहर रविवार को भी बदस्तूर जारी था।
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ग्रामीणों के अनुसार, पिछले चौबीस घंटे शांत रही लहरें सुबह से एक बार फिर कटान के रूप में उत्पात मचाना शुरू कर दी। पांच घंटों के बीच गांव के राजमंगल ठाकुर, हरिनरायन ठाकुर, पारस ठाकुर, रामजी ठाकुर आदि के बारह बीघे से अधिक भूमि परवल की फसल सहित नदी में समाहित हो गई। कटान के रूप में आई इस आपदा ने अब तक यहां के दर्जनों किसानों की कमर तोड़ चुकी है। आरोप है कि पिछले एक सप्ताह से हो रहे कटान के प्रति बचाव की बागडोर संभालने में बाढ़ खंड संवेदनहीन बना हुआ है। कोई भी जिम्मेदार पीड़ितों की सुधि तक नहीं ले रहा है। उधर, बीते दिनों के घटाव के बाद नदी का जलस्तर करीब डेढ़ मीटर नीचे खिसक गया है। इससे एनएच-31 से गंगा की लहरों का दबाव काफी कम हो गया है।
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