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सती का त्याग शिव की मर्यादा का है प्रतीक : फलाहारी महाराज
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रतसर। क्षेत्र के धनौती धुरा स्थित धनेश्वरनाथ धाम शिव मन्दिर परिसर में चल रहे श्री रुद्र महायज्ञ के चौथे दिन यज्ञाचार्य पं. सुनील पांडेय के संचालन में पूजन एवं हवन का कार्यक्रम विधि-विधान से संपन्न कराया गया।
सांध्य कालीन प्रवचन बेला में फलाहारी संत प्रेमदास महाराज ने संगीतमय प्रवचन में शिव-सती की मार्मिक कथा का वर्णन करते हुए कहा कि सीता की खोज में भटक रहे राम की परीक्षा लेने गई सती का त्याग शिव की मर्यादा का प्रतीक है। माता सती ने भगवान राम की परीक्षा लेने के लिए सीता का रूप धारण कर उन्हें भ्रमित करना चाहा, लेकिन भगवान राम ने उन्हें पहचान लिया। इसका ज्ञान होने पर भगवान शिव ने सती में माता सीता का स्वरूप देखकर उनका त्याग कर दिया और कठोर साधना में लीन हो गये। फलाहारी महाराज ने बताया कि उस महान संकल्प पर बाबा तुलसी ने लिखा है कि शिव संकल्प कीन्ह मन माही, यह तन सती भेंट अब नाही। सती और शिव से जुड़े अन्य मार्मिक प्रसंग सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे। रात्रि में मथुरा वृंदावन से आयी रसिक मंडली के बाल कलाकारों ने कृष्ण के रासलीला का जीवंत अभिनय कर उपस्थित लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर चौकी प्रभारी देवेन्द्र नाथ दूबे, अप्पू यादव, अजय राजभर, आनंद यादव, ब्रजेश यादव, चंद्रशेखर, अंगद यादव, जयंत, पप्पू, रामबाबू, कन्हैया, मनोज आदि रहे।
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सांध्य कालीन प्रवचन बेला में फलाहारी संत प्रेमदास महाराज ने संगीतमय प्रवचन में शिव-सती की मार्मिक कथा का वर्णन करते हुए कहा कि सीता की खोज में भटक रहे राम की परीक्षा लेने गई सती का त्याग शिव की मर्यादा का प्रतीक है। माता सती ने भगवान राम की परीक्षा लेने के लिए सीता का रूप धारण कर उन्हें भ्रमित करना चाहा, लेकिन भगवान राम ने उन्हें पहचान लिया। इसका ज्ञान होने पर भगवान शिव ने सती में माता सीता का स्वरूप देखकर उनका त्याग कर दिया और कठोर साधना में लीन हो गये। फलाहारी महाराज ने बताया कि उस महान संकल्प पर बाबा तुलसी ने लिखा है कि शिव संकल्प कीन्ह मन माही, यह तन सती भेंट अब नाही। सती और शिव से जुड़े अन्य मार्मिक प्रसंग सुनकर श्रोता भावविभोर हो उठे। रात्रि में मथुरा वृंदावन से आयी रसिक मंडली के बाल कलाकारों ने कृष्ण के रासलीला का जीवंत अभिनय कर उपस्थित लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इस मौके पर चौकी प्रभारी देवेन्द्र नाथ दूबे, अप्पू यादव, अजय राजभर, आनंद यादव, ब्रजेश यादव, चंद्रशेखर, अंगद यादव, जयंत, पप्पू, रामबाबू, कन्हैया, मनोज आदि रहे।
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