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लेखपालों की हड़ताल से 41400 आवेदन अटके

Fri, 13 Jul 2018 11:56 PM IST
Updated Fri, 13 Jul 2018 11:56 PM IST
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लेखपालों की हड़ताल से 41400 आवेदन अटके
बलिया। लेखपालों की हड़ताल से सभी तहसीलों में कामकाज प्रभावित हो रहा है। लेखपालों की हड़ताल से जिले की तहसीलों में जहां आय, जाति व निवास प्रमाण के 41 हजार 400 आवेदन लंबित हो गए हैं वहीं पैमाईश, खसरा, हैसियत प्रमाण पत्र आदि का काम भी ठप पड़ा हुआ है। शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन की ओर से लेखपालों के काम पर नहीं लौटने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिला प्रशासन की ओर से की गई वैकल्पिक व्यवस्था भी कारगर नहीं हो रही है।
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विभिन्न मांगों को लेकर राजस्व विभाग के लेखपाल पिछले कई दिनों से हड़ताल पर हैं जबकि पांच दिनों से तो वह कलेक्ट्रेट में धरना दे रहे हैं। लेखपालों की हड़ताल से राजस्व विभाग में एक तरह से कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। आमतौर पर एक जुलाई से शिक्षा सत्र की शुरुआत होती है और इसके साथ ही प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के संस्थान खुलते हैं और पढ़ाई लिखाई के साथ ही कक्षाओं में प्रवेश आदि के कार्य भी शुरू हो जाते हैं। इसके अलावा पूर्व दशम व दशमोतर कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र छात्रवृत्ति आदि के लिए आवेदन भी करते हैं। इसके लिए छात्रों को तहसीलों से जारी होने वाले आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता होती है। लेकिन पिछले कई दिनों से चल रहे लेखपालों की हड़ताल के कारण तहसीलों से प्रमाण पत्र जारी नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि जिले की तहसीलों में आय, जाति व निवास के कुल 41 हजार 400 आवेदन लंबित हो गए हैं। इसमें सबसे अधिक सदर तहसील में 8777, सिकंदरपुर में 6413, बांसडीह में 6621, रसड़ा में 7103, बैरिया में 6483 व बेल्थरारोड तहसील में 6003 आवेदन हैं। अधिकांश आवेदन छात्रों के हैं जो शिक्षण संस्थानों में प्रवेश व छात्रवृत्ति आवेदन के लिए जरूरी है। सदर तहसील में आए बीटेक में नामांकन के लिए जाति प्रमाण को आवेदन देने वाले रामापुर गांव निवासी प्रमोद वर्मा ने बताया कि वह 15 दिनों से जनसेवा केंद्र व तहसील का चक्कर काट रहा है लेकिन प्रमाण पत्र जारी नहीं हो रहा है। इसी तरह नारायनपुर गांव निवासी सतीश लाल ने बताया कि छात्रवृत्ति आवेदन के लिए आय, जाति व निवास प्रमाण पत्र की आवश्यकता है लेकिन जारी नहीं हो रहा है। उधर, तहसीलों में मिलने वाली शिकायत के निस्तारण को लेकर पैमाईश, किसानों के खसरा, हैसियत प्रमाण पत्र आदि का काम भी ठप पड़ा हुआ है। उधर, लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष निर्भय नारायन सिंह ने बताया कि मांगों को लेकर कई बार जिला प्रशासन व सरकार को मांग पत्र दिया गया लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर संगठन को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
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