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खादी प्रदर्शनी में उमड़ रहे लोग
Updated Sun, 21 Jan 2018 11:37 PM IST
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बलिया। नगर के सतीश चंद्र कॉलेज के पंडित गोरख नाथ उपाध्याय खेल मैदान में खादी मेला देखने के लिए भीड़ उमड़ने लगी है। रविवार को पूरे दिन
बड़ी संख्या में लोगों ने उत्पादों की जमकर खरीदारी की। प्रदर्शनी में आम, आंवले के बने आचार, मुरब्बे की दुकानों, खादी के कपड़ा और कंबल की दुकानों पर जमकर खरीदारी की।
रविवार को छुट्टी होने के बाद लोगों ने धूप निकलते ही खादी मेले में पहुंचकर जमकर खरीदारी की। जहां महिलाएं अपने लिए खादी के ऊनी वस्त्रों को छांटने में जुटी रही। वहीं लोगों ने कंबल, ऊंनी चादर, लोई, राजस्थानी सामानों के साथ कश्मीर से आए प्रदर्शनी के सामानों की खरीदारी की। महिलाओं ने मेले में आई प्रतापगढ़ की दूकानों पर आंवले के मुरब्बे, कैंडी, जैली, जेम, पेड़ा, बर्फी, और लड्डू आदि की खरीदारी की। वहीं बच्चे भी प्रदर्शनी में अपने पसंद के सामान लिया। मेले में हर्बल दवाओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। वहीं दूसरी और कानपुर से आए लेदर के सामानों को खरीदने की होड़ मची रही। खादी मेले में पहले दिन बिक्री न होने से मायूस दूकानदारों के चेहरे उस समय खिल गए जब मेले में लोगों की भीड़ अचानक धूप निकलने के बाद बढ़ने लगी। मेले में आए दूकानदारों का कहना था कि अगर कोहरा नहीं छटता तो खरीददारी कम होती। लेकिन भगवान भाष्कर के आंख खोलने से हम लोगों का मेले के प्रति उत्साह जग गया।
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बड़ी संख्या में लोगों ने उत्पादों की जमकर खरीदारी की। प्रदर्शनी में आम, आंवले के बने आचार, मुरब्बे की दुकानों, खादी के कपड़ा और कंबल की दुकानों पर जमकर खरीदारी की।
रविवार को छुट्टी होने के बाद लोगों ने धूप निकलते ही खादी मेले में पहुंचकर जमकर खरीदारी की। जहां महिलाएं अपने लिए खादी के ऊनी वस्त्रों को छांटने में जुटी रही। वहीं लोगों ने कंबल, ऊंनी चादर, लोई, राजस्थानी सामानों के साथ कश्मीर से आए प्रदर्शनी के सामानों की खरीदारी की। महिलाओं ने मेले में आई प्रतापगढ़ की दूकानों पर आंवले के मुरब्बे, कैंडी, जैली, जेम, पेड़ा, बर्फी, और लड्डू आदि की खरीदारी की। वहीं बच्चे भी प्रदर्शनी में अपने पसंद के सामान लिया। मेले में हर्बल दवाओं की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। वहीं दूसरी और कानपुर से आए लेदर के सामानों को खरीदने की होड़ मची रही। खादी मेले में पहले दिन बिक्री न होने से मायूस दूकानदारों के चेहरे उस समय खिल गए जब मेले में लोगों की भीड़ अचानक धूप निकलने के बाद बढ़ने लगी। मेले में आए दूकानदारों का कहना था कि अगर कोहरा नहीं छटता तो खरीददारी कम होती। लेकिन भगवान भाष्कर के आंख खोलने से हम लोगों का मेले के प्रति उत्साह जग गया।
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