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खरीद दरौली पीपा पुल का नाका ध्वस्त होने से यूपी बिहार का संपर्क ट
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सिकन्दरपुर। यूपी बिहार से जोड़ने के लिए घाघरा नदी के खरीद दरौली घाट पर बनाए गए पीपा पुल का दक्षिणी नाका व उत्तरी नाका बुधवार की रात ध्वस्त हो गया। इसके चलते क्षेत्रीय लोगों का बिहार से संपर्क टूट गया। ऐसे में लोगों को पांच किमी की दूरी अब 65 किमी में तय करनी पड़ रही है। ऐसे में क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश है। क्षेत्रीय लोग पीपा पुल का नाका टूटने के पीछे विभाग के अफसरों की उदासीनता को जिम्मेदार ठहरा रहे है। बताते चलें कि शादी-विवाह का समय होने के वजह से यह रास्ता लोगों के सुगमता का कारण बन गया है। पीपा पुल का नाका ध्वस्त होने की वजह से बारातियों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है।
हालांकि आनन-फानन में पूल के ठेकेदार ने गुरुवार की शाम तक दो पहिया वाहन को चलने के लिए रास्ता बना कर अस्थाई नाका बनाया है। बताया जाता है कि जिस समय नाका ध्वस्त हुआ उस समय इस पार की सैकड़ों लोग अपनी रिश्तेदारी में गए हुए थे जिन्हें नाका ध्वस्त होने की जानकारी न होने की वजह से लौटते समय इस कड़कड़ाती गर्मी में रेत पर अत्यधिक भीड़ होने के वजह से काफी फजीहत का सामना करना पड़ा। उन्हें 5 किलोमीटर की जगह 65 किलोमीटर की दूरी तय कर आना पड़ा। गुरुवार की सुबह जब नाका ध्वस्त होने की जानकारी ठेकेदार को हुई तो जल्दबाजी में तकरीबन दर्जनों मजदूरों को लगा कर अस्थाई नाका बनाने का काम शुरू हुआ। लेकिन केवल कोरम पूरा किया गया।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष बारातियों को लेकर बिहार से एक जीप आ रही थी नाका ध्वस्त होने से जीप का पिछला हिस्सा नदी में चला गया था संयोग ही था कि वाहन का पिछला हिस्सा पीपे पर बंधे तार में फंस गया जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। ठेकेदार ने बताया कि अचानक नदी में पानी बढ़ने से रेत के गिरने से ऐसा हुआ है। पीपा जोड़ने और नाका बनाने का काम चल रहा है। देर रात तक सभी वाहनों का आवागमन शुरू हो जाने की उम्मीद है। बाढ़ विभाग के जेई रामेश्वर सिंह के अनुसार बर्फ पिघलने से अचानक नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। जिससे यह स्थिति उत्पन्न हो गयी।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार ठेकेदार द्वारा शुक्रवार तक दो पहिया वाहन आने जाने का रास्ता चालू कराया गया तथा चार पहिया वाहनों का आवागमन रोकने की सूचना बोर्ड लगाकर वर्जित किया गया है। यूपी और बिहार के लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि ठेकेदार व विभागीय की लापरवाही की वजह से इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देर शाम तक मरम्मत का कार्य चल रहा था।
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हालांकि आनन-फानन में पूल के ठेकेदार ने गुरुवार की शाम तक दो पहिया वाहन को चलने के लिए रास्ता बना कर अस्थाई नाका बनाया है। बताया जाता है कि जिस समय नाका ध्वस्त हुआ उस समय इस पार की सैकड़ों लोग अपनी रिश्तेदारी में गए हुए थे जिन्हें नाका ध्वस्त होने की जानकारी न होने की वजह से लौटते समय इस कड़कड़ाती गर्मी में रेत पर अत्यधिक भीड़ होने के वजह से काफी फजीहत का सामना करना पड़ा। उन्हें 5 किलोमीटर की जगह 65 किलोमीटर की दूरी तय कर आना पड़ा। गुरुवार की सुबह जब नाका ध्वस्त होने की जानकारी ठेकेदार को हुई तो जल्दबाजी में तकरीबन दर्जनों मजदूरों को लगा कर अस्थाई नाका बनाने का काम शुरू हुआ। लेकिन केवल कोरम पूरा किया गया।
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गौरतलब है कि पिछले वर्ष बारातियों को लेकर बिहार से एक जीप आ रही थी नाका ध्वस्त होने से जीप का पिछला हिस्सा नदी में चला गया था संयोग ही था कि वाहन का पिछला हिस्सा पीपे पर बंधे तार में फंस गया जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया। ठेकेदार ने बताया कि अचानक नदी में पानी बढ़ने से रेत के गिरने से ऐसा हुआ है। पीपा जोड़ने और नाका बनाने का काम चल रहा है। देर रात तक सभी वाहनों का आवागमन शुरू हो जाने की उम्मीद है। बाढ़ विभाग के जेई रामेश्वर सिंह के अनुसार बर्फ पिघलने से अचानक नदी के जलस्तर में वृद्धि हुई है। जिससे यह स्थिति उत्पन्न हो गयी।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार ठेकेदार द्वारा शुक्रवार तक दो पहिया वाहन आने जाने का रास्ता चालू कराया गया तथा चार पहिया वाहनों का आवागमन रोकने की सूचना बोर्ड लगाकर वर्जित किया गया है। यूपी और बिहार के लोगों को काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का आरोप है कि ठेकेदार व विभागीय की लापरवाही की वजह से इस परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। देर शाम तक मरम्मत का कार्य चल रहा था।