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रघुकुल रीत सदा चली,आई प्राण जाए पर ...
Updated Sat, 20 Oct 2018 11:40 PM IST
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बेल्थरारोड। श्रीरामलीला समिति के कलाकारों ने दशरथ वचन पालन, राम वन गमन और गंगा तट विश्राम का मंचन किया। राम वनवास होते ही अयोध्या में उदासी छा गई। राजा दशरथ द्वारा राम को राजगद्दी दिए जाने की घोषणा सुन मंथरा बिफर पड़ीं। मंथरा ने कैकई के कान भर दिए। कैकई रुष्ट हो गईं। इस पर राजा दशरथ महल पहुंचे। कैकई से मिलने पहुंचे तो उन्होंने दशरथ द्वारा दिए गए वचनों की याद दिलाते हुए राम के लिए वनवास और भरत के लिए राजगद्दी की मांग की। इसपर दशरथ े कैकई को समझाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह नहीं मानी।
इसपर राम माता-पिता और गुरु की आज्ञा लेकर सीता और लक्ष्मण के साथ वन चल दिए। बन जाते समय दशरथ ने राम के साथ मंत्री सुमंत को लगा दिया, ताकि समझा बुझाकर राम को वापस अयोध्या वापस ला सकें। राम वन गमन से अयोध्या वासी उदास हो गए। राम के मना करने के बावजूद कुछ अयोध्यावासी भी राम के साथ वन चल दिए। वन जाते समय मार्ग में शाम होने के बाद लक्ष्मण और सीता ने गंगा तट पर विश्राम किया। तत्पश्चात दूसरे दिन वन को प्रस्थान किया। राम वन गमन की भावपूर्ण प्रस्तुति देख लीला प्रेमियों की आंखें नम हो गईं। विनय प्रकाश डेविड, अजीत मिश्र, अगम शर्मा, निशांत प्रकाश आदि कलाकारों का अभिनय सराहनीय रहा।
सार्वजनिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में जनता इंटर कालेज में आयोजित रामलीला में 10 वें दिन अवध आदर्श रामलीला मंडल अयोध्या से आए कलाकारों ने रावण-कुंभकर्ण व मेघनाथ के वध की लीला का मनमोहक मंचन किया। लक्ष्मण मूर्छा के बाद रावण अपने छोटे भाई कुंभकर्ण को जगाता है और सीता हरण से लेकर राम से युद्ध तक की बात बताता है। कुंभकर्ण ने पहले रावण को समझाता है लेकिन रावण ने उसकी एक नहीं सुनी और उसे युद्ध भूमि में भेज दिया। कुंभकर्ण ने बड़ी वीरता से युद्ध किया, लेकिन अंत में श्रीराम ने उसका वध कर दिया। उसके बाद मेघनाद युद्ध करने के लिए आया। पहले लक्ष्मण जी ने उसका हाथ काटा और उसके बाद उसका वध कर दिया। अंत में राम के द्वारा रावण का वध कर दिया जाता है। रावण वध होते ही पूरा पंडाल जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा। उद्घाटन विधायक धनन्जय कन्नौजिया, प्रमुख अनिल सिंह, कारोबारी प्रतीक प्रकाश ने भगवान राम सीता की पूजन आरती कर किया। राजेश गुप्ता, ओके जायसवाल, डॉ. शशिप्रकाश कुशवाहा, रामायण ठाकुर, विद्याभूषण, आईएमसी के महेश वर्मा सहित काफी लोग मौजूद रहे।
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इसपर राम माता-पिता और गुरु की आज्ञा लेकर सीता और लक्ष्मण के साथ वन चल दिए। बन जाते समय दशरथ ने राम के साथ मंत्री सुमंत को लगा दिया, ताकि समझा बुझाकर राम को वापस अयोध्या वापस ला सकें। राम वन गमन से अयोध्या वासी उदास हो गए। राम के मना करने के बावजूद कुछ अयोध्यावासी भी राम के साथ वन चल दिए। वन जाते समय मार्ग में शाम होने के बाद लक्ष्मण और सीता ने गंगा तट पर विश्राम किया। तत्पश्चात दूसरे दिन वन को प्रस्थान किया। राम वन गमन की भावपूर्ण प्रस्तुति देख लीला प्रेमियों की आंखें नम हो गईं। विनय प्रकाश डेविड, अजीत मिश्र, अगम शर्मा, निशांत प्रकाश आदि कलाकारों का अभिनय सराहनीय रहा।
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सार्वजनिक रामलीला कमेटी के तत्वावधान में जनता इंटर कालेज में आयोजित रामलीला में 10 वें दिन अवध आदर्श रामलीला मंडल अयोध्या से आए कलाकारों ने रावण-कुंभकर्ण व मेघनाथ के वध की लीला का मनमोहक मंचन किया। लक्ष्मण मूर्छा के बाद रावण अपने छोटे भाई कुंभकर्ण को जगाता है और सीता हरण से लेकर राम से युद्ध तक की बात बताता है। कुंभकर्ण ने पहले रावण को समझाता है लेकिन रावण ने उसकी एक नहीं सुनी और उसे युद्ध भूमि में भेज दिया। कुंभकर्ण ने बड़ी वीरता से युद्ध किया, लेकिन अंत में श्रीराम ने उसका वध कर दिया। उसके बाद मेघनाद युद्ध करने के लिए आया। पहले लक्ष्मण जी ने उसका हाथ काटा और उसके बाद उसका वध कर दिया। अंत में राम के द्वारा रावण का वध कर दिया जाता है। रावण वध होते ही पूरा पंडाल जय श्री राम के उद्घोष से गूंज उठा। उद्घाटन विधायक धनन्जय कन्नौजिया, प्रमुख अनिल सिंह, कारोबारी प्रतीक प्रकाश ने भगवान राम सीता की पूजन आरती कर किया। राजेश गुप्ता, ओके जायसवाल, डॉ. शशिप्रकाश कुशवाहा, रामायण ठाकुर, विद्याभूषण, आईएमसी के महेश वर्मा सहित काफी लोग मौजूद रहे।
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