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बुजुर्ग बोझ नहीं विषयक गोष्ठी संपन्न
Updated Wed, 28 Mar 2018 11:28 PM IST
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जनऊ बाबा साहित्यिक संस्थानिर्झर के बैनर तले बुधवार को हनुमत सेवा ट्रस्ट के परिसर में बुजुर्ग बोझ नही विषयक गोष्ठी का आयोजन किया गया। क्षेत्र के राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित एवं सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक श्रीकान्त पाण्डेय ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
उन्होंने कहा कि आज समाज में हर बीसवां बुजुर्ग प्रताड़ित है। बढते संसाधनों ने मनुष्य को स्वार्थी बना दिया है। जिस कारण से वह अपना स्वार्थ किसी भी कीमत पर पूरा करना चाहता है। हमें यह समझना होगा कि बुजुर्ग बोझ नही हमारी जरूरत है। बुजुर्गों के प्रति बेरूखी के कारण में संयुक्त परिवारों का विघटन एवं एकल परिवारों का चलन, संस्कारों की कमी सहित कई कारण है। उपाय सुझाते हुए कहा कि बुजुर्ग घर छोड़ने के लिए मजबूर हो इसके लिए उन्हें अपनों के बीच पूर्ण मान-सम्मान, उचित देखभाल, प्रेमपूर्वक व्यवहार जरूरी है।
सामाजिक चिंतक प्रेमनारायन पाण्डेय ने कहा कि आधुनिक पीढी में संस्कारों का रोपण बहुत ही आवश्यक है। संस्कारों के अभाव में व्यक्ति आर्थिक रूप से सफल तो हो सकता है परन्तु उसमें मानवीय एवं सामाजिक गुणों की कमी हो जाती है।
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इस अवसर पर डायट के पूर्व प्रवक्ता दिवाकर पाण्डेय, जेई करीमन राम, राजदेव पाण्डेय, शिवप्रसाद पाण्डेय सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि डा0 परमहंस जी एवं संचालन मंच के संयोजक धनेश पाण्डेय ने की।
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उन्होंने कहा कि आज समाज में हर बीसवां बुजुर्ग प्रताड़ित है। बढते संसाधनों ने मनुष्य को स्वार्थी बना दिया है। जिस कारण से वह अपना स्वार्थ किसी भी कीमत पर पूरा करना चाहता है। हमें यह समझना होगा कि बुजुर्ग बोझ नही हमारी जरूरत है। बुजुर्गों के प्रति बेरूखी के कारण में संयुक्त परिवारों का विघटन एवं एकल परिवारों का चलन, संस्कारों की कमी सहित कई कारण है। उपाय सुझाते हुए कहा कि बुजुर्ग घर छोड़ने के लिए मजबूर हो इसके लिए उन्हें अपनों के बीच पूर्ण मान-सम्मान, उचित देखभाल, प्रेमपूर्वक व्यवहार जरूरी है।
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सामाजिक चिंतक प्रेमनारायन पाण्डेय ने कहा कि आधुनिक पीढी में संस्कारों का रोपण बहुत ही आवश्यक है। संस्कारों के अभाव में व्यक्ति आर्थिक रूप से सफल तो हो सकता है परन्तु उसमें मानवीय एवं सामाजिक गुणों की कमी हो जाती है।
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इस अवसर पर डायट के पूर्व प्रवक्ता दिवाकर पाण्डेय, जेई करीमन राम, राजदेव पाण्डेय, शिवप्रसाद पाण्डेय सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने-अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कवि डा0 परमहंस जी एवं संचालन मंच के संयोजक धनेश पाण्डेय ने की।