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नदियों मे फेंके जा रहे कूड़े
Updated Sat, 24 Feb 2018 12:32 AM IST
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बलिया। गंगा और अन्य नदियों में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ता जा रहा। हाल तो यह है कि नदियों में अब कूड़े भी फेंके जा रहे है। शहर में घाट किनारे रोजाना नौ टन कूड़े का निस्तारण किया जा रहा। जिसके चलते प्रदूषण से लोगों को बुरा हाल है। इतना ही नहीं नदियों के किनारे शवों की अंत्येष्टि के बाद उसके अवशेषों को भी फेंका जा रहा। जिले में कोई बड़े उद्योग तो नहीं हैं लेकिन छोटे उद्योग व अन्य तरह की गंदगियां नाले के जरिए नदियों में पहुंच रही हैं। गंगा किनारे के गांवों पर नजर डालें तो नारायनपुर से लेकर बैरिया तक करीब 25 नाले गंगा में गिरते हैं। तटवर्ती गांवों के नाले भी गंगा में ही गिराए जाते हैं। जिला मुख्यालय पर ही कटहर नाला के रास्ते कई गावों की गंदगी व कचरा सीधे गंगा में जा रहा। इसके अलावा नदियों के किनारे शवों को जलाने के बाद अवशेष को नदियों में फेंके जाने से प्रदूषण और तेजी से बढ़ रहा। ग्रामीणों की मानें तो यहां रोजाना करीब 60 से 80 शवों की अंत्येष्टि होती है। इसी तरह घाघरा व टोंस नदियों के किनारे भी जगह-जगह शवों को जलाने के बाद अवशेष को नदियों में फेंका जाता है। नगरीय इलाकों में प्रतिदिन नौ टन कूड़े के निस्तारण का लेखा जोखा है और इसको मानें इसका निस्तारण नदियों के आसपास के इलाकों में ही किया जाता है। इसके अलावा सैकड़ों क्विंटल कूड़ा तटवर्ती गांवों के लोगों की ओर से नदियों के आसपास फेंका जाता है। नगर पालिका की ओर से प्रतिदिन करीब एक टन कूड़े को गंगा के नजदीकी महावीर घाट पर फेंका जा रहा। पिछले पांच सालों में नदियों में इस कदर प्रदूषण हो गया है कि घाटों के पास का पानी आचमन लायक नहीं। अमरनाथ पीजी कॉलेज दूबेछपरा के प्राचार्य व पर्यावरणविद् भूगर्म विशेषज्ञ डा. गणेश पाठक ने बताया कि नदियों को कूड़ा निस्तारण केंद्र बना दिया गया है और इसके चलते नदियों में प्रदूषण बढ़ रहा है। बताया कि पानी को प्रदूषण से नहीं बचाया गया तो इसका असर आम जनजीवन के साथ ही पशु पक्षियों पर भी पड़ेगा। राम किशुन, सहायक अभियंता केंद्रीय जल आयोग, गोरखपुर इकाई ने कहा कि घाघरा में प्रदूषण रोकने का कवायद चल रही है और इसके लिए अयोध्या तक सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि विभाग के डिवीजन टू वाराणसी भी गंगा में प्रदूषण रोकने को लेकर सर्वे का काम कर रहा है।
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