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आलू के फसलों पर लगा झुलसा रोग, किसान चिंतित
Updated Sat, 13 Jan 2018 10:37 PM IST
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दयाछपरा। कड़ाके की पड़ रही ठंड के चलते आलू किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच गई है। ठंड से जहां जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है, वहीं आलू के खेतों में झुलसा रोग का प्रकोप बढ़ गया है। हालत यह है कि इस कड़ाके की ठंड में भी किसान अपने आलू के खेतों में मैंकोजेब का छिड़काव करने को बाध्य है। अगर कड़ाके की ठंड के भेंट अगर आलू का फसल चढ़ गया तो किसान को बर्बादी के सिवा कुछ नहीं हासिल होगा।
पांडेयपुर निवासी किसान ओम प्रकाश मिश्र का कहना है कि अगर इसी प्रकार से मैंकोजेब का छिड़काव करना पड़ा तो सारी पूजी आलू को बचाने में ही लग जाएगी, फिर आलू किस भाव में बिकेगा यह पता नहीं। दयाछपरा निवासी किसान हरेंद्र पांडेय रामेश्वर जी पांडेय, प्रकाश वर्मा का कहना है कि चाहे जो भी हो अगर खेतों में पूंजी लगाई गई है तो उसको बचाने का हर संभव प्रयास तो किया ही जाएगा। भाव कुछ भी रहे बर्बादी तो निश्चित ही है। फिर भी दूसरा कौन सा खेती किया जाए। जिससे मुनाफा हो शुरुआत से ही आद्रा नक्षत्र के बाद एक भी बारिश न होने से दलहन, तिलहन का फसल तो बोया नहीं गया। बहुत मामूली खेतों की सिंचाई करके मसूर और चना की फसलों को बोया भी गया तो उस फसल की बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है।
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पांडेयपुर निवासी किसान ओम प्रकाश मिश्र का कहना है कि अगर इसी प्रकार से मैंकोजेब का छिड़काव करना पड़ा तो सारी पूजी आलू को बचाने में ही लग जाएगी, फिर आलू किस भाव में बिकेगा यह पता नहीं। दयाछपरा निवासी किसान हरेंद्र पांडेय रामेश्वर जी पांडेय, प्रकाश वर्मा का कहना है कि चाहे जो भी हो अगर खेतों में पूंजी लगाई गई है तो उसको बचाने का हर संभव प्रयास तो किया ही जाएगा। भाव कुछ भी रहे बर्बादी तो निश्चित ही है। फिर भी दूसरा कौन सा खेती किया जाए। जिससे मुनाफा हो शुरुआत से ही आद्रा नक्षत्र के बाद एक भी बारिश न होने से दलहन, तिलहन का फसल तो बोया नहीं गया। बहुत मामूली खेतों की सिंचाई करके मसूर और चना की फसलों को बोया भी गया तो उस फसल की बढ़ोत्तरी नहीं हो पा रही है।
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