{"_id":"5b8d7cca42c79246633fee7c","slug":"101535999178-ballia-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी अनाज की खूब हो रही कालाबाजारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी अनाज की खूब हो रही कालाबाजारी
Updated Tue, 04 Sep 2018 12:16 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बलिया। लाख प्रयास के बावजूद अनाज की कालाबाजारी पर लगाम नहीं लग पा रहा है। आधार कार्ड फीडिंग के नाम पर कार्डधारकों के नाम काटकर वितरण तिथि में अनाज का गोलमाल किया जाता है।
जिले में 28 माह से एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) लागू है लेकिन आपूर्ति विभाग में अभी तक कार्डधारकों का डाटा दुरुस्त नहीं हो सका है। जिले में केवल दो तरह के ही राशन कार्डधारक हैं। इसमें अन्त्योदय के एक लाख एक हजार 701 और पात्र गृहस्थी के चार लाख 98 हजार 56 कार्डधारक हैं। पात्र गृहस्थी के ग्रामीण इलाकों में चार लाख 61 हजार 932 और नगरीय इलाकों में 36 हजार 124 और अन्त्योदय के ग्रामीण इलाकों में 91 हजार 668 और नगरीय इलाकों में 10 हजार 33 कार्ड प्रचलन में हैं। इन कार्डधारकों के डाटा फीडिंग का काम भी करीब दो सालों से चल रहा है लेकिन आज तक इसे दुरुस्त नहीं किया जा सका। बताया जाता है कि कभी राशन कार्ड सत्यापन तो कभी डाटा फीडिंग के दौरान कार्डधारकों के नाम काटने और जोड़ने का खेल किया गया। बताया जाता है कि इन दिनों राशन कार्डों को आधार कार्ड से लिंक करने का काम चल रहा है और इसकी आड़ में भी कार्डधारकों के नामों को काटने और जोड़ने का गोरखधंधा किया जा रहा है। बताया जाता है कि आवंटन के बाद कार्डधारकों का नाम आधार कार्ड लिंक की आड़ में हटा दिया जाता है और कोटेदार यह कहकर कार्डधारकों को अनाज नहीं देते हैं कि सूची में उसका नाम नहीं है। जिले में इस तरह का गोरखधंधा कर हजारों कुंतल अनाज का गोलमाल किया जाता है।
विज्ञापन
जिले में 28 माह से एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) लागू है लेकिन आपूर्ति विभाग में अभी तक कार्डधारकों का डाटा दुरुस्त नहीं हो सका है। जिले में केवल दो तरह के ही राशन कार्डधारक हैं। इसमें अन्त्योदय के एक लाख एक हजार 701 और पात्र गृहस्थी के चार लाख 98 हजार 56 कार्डधारक हैं। पात्र गृहस्थी के ग्रामीण इलाकों में चार लाख 61 हजार 932 और नगरीय इलाकों में 36 हजार 124 और अन्त्योदय के ग्रामीण इलाकों में 91 हजार 668 और नगरीय इलाकों में 10 हजार 33 कार्ड प्रचलन में हैं। इन कार्डधारकों के डाटा फीडिंग का काम भी करीब दो सालों से चल रहा है लेकिन आज तक इसे दुरुस्त नहीं किया जा सका। बताया जाता है कि कभी राशन कार्ड सत्यापन तो कभी डाटा फीडिंग के दौरान कार्डधारकों के नाम काटने और जोड़ने का खेल किया गया। बताया जाता है कि इन दिनों राशन कार्डों को आधार कार्ड से लिंक करने का काम चल रहा है और इसकी आड़ में भी कार्डधारकों के नामों को काटने और जोड़ने का गोरखधंधा किया जा रहा है। बताया जाता है कि आवंटन के बाद कार्डधारकों का नाम आधार कार्ड लिंक की आड़ में हटा दिया जाता है और कोटेदार यह कहकर कार्डधारकों को अनाज नहीं देते हैं कि सूची में उसका नाम नहीं है। जिले में इस तरह का गोरखधंधा कर हजारों कुंतल अनाज का गोलमाल किया जाता है।
विज्ञापन