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भोजपुरी 20 करोड़ लोगों की मातृभाषा
Updated Mon, 04 Sep 2017 11:24 PM IST
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सिकंदरपुर। प्रगतिशील भोजपुरी समाज के तत्वावधान में रविवार को नवरतनपुर चट्टी पर भोजपुरी के गिरते गौरव व निवारण विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। जिसमें भोजपुरी को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम वक्ताओं द्वारा बताया गया।
गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सीताराम यादव ने कहा कि दुनिया की प्राचीनतम व उत्तम सांस्कृतिक विरासत को भोजपुरी जैसी भाषा ही संजोकर रख सकती है। कहा कि भोजपुरी को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाया जाए। रवींद्र यादव ने कहा कि मातृभाषा का जहां बोध नहीं, उसकी कहीं प्रतिष्ठा नहीं। कारण कि वहां स्वाभिमान मर जाता है। उन्होंने भोजपुरी गौरव को पुन: स्थापित करने की अपील की। बताया कि भोजपुरी भाषा दुनिया के एक बड़े तबके की रीति-नीति, तीज त्योहार, आशा, आकांक्षा, सुख-दु:ख की भाषा है। यह विकास की कुंजी भी है। भोजपुरी 20 करोड़ लोगों की मातृभाषा है। संख्या के नजरिए से दुनिया में नौवें स्थान पर है। बावजूद इसके भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 23 वें स्थान के लिए संघर्ष कर रही है। कवि नंदजी नंदा व शिवजी यादव नेगी ने कविता के माध्यम से भोजपुरी की मिठास गाकर मौजूद लोगों का स्वागत किया। गोष्ठी में बबन चौधरी, डॉक्टर जितेंद्र यादव, राजबली शर्मा, मनीष कुमार, मधुकांत, हरिशंकर राम, हरेराम, संकेत कुमार, मयंक आदि ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता विश्वनाथ चौधरी व संचालन अमरेश यादव ने किया।
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गोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि सीताराम यादव ने कहा कि दुनिया की प्राचीनतम व उत्तम सांस्कृतिक विरासत को भोजपुरी जैसी भाषा ही संजोकर रख सकती है। कहा कि भोजपुरी को प्राथमिक शिक्षा का माध्यम बनाया जाए। रवींद्र यादव ने कहा कि मातृभाषा का जहां बोध नहीं, उसकी कहीं प्रतिष्ठा नहीं। कारण कि वहां स्वाभिमान मर जाता है। उन्होंने भोजपुरी गौरव को पुन: स्थापित करने की अपील की। बताया कि भोजपुरी भाषा दुनिया के एक बड़े तबके की रीति-नीति, तीज त्योहार, आशा, आकांक्षा, सुख-दु:ख की भाषा है। यह विकास की कुंजी भी है। भोजपुरी 20 करोड़ लोगों की मातृभाषा है। संख्या के नजरिए से दुनिया में नौवें स्थान पर है। बावजूद इसके भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 23 वें स्थान के लिए संघर्ष कर रही है। कवि नंदजी नंदा व शिवजी यादव नेगी ने कविता के माध्यम से भोजपुरी की मिठास गाकर मौजूद लोगों का स्वागत किया। गोष्ठी में बबन चौधरी, डॉक्टर जितेंद्र यादव, राजबली शर्मा, मनीष कुमार, मधुकांत, हरिशंकर राम, हरेराम, संकेत कुमार, मयंक आदि ने भी संबोधित किया। अध्यक्षता विश्वनाथ चौधरी व संचालन अमरेश यादव ने किया।
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