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यासर को विरासत संभालने की चुनौती

Sun, 30 Jan 2022 11:00 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jan 2022 11:00 PM IST
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Yasar's challenge to handle the legacy
बहराइच। पिता की विरासत को बचाने के लिए सपा ने बेटे को सदर विधानसभा की कमान सौंपी है। इस सीट पर लगातार 25 वर्षों तक पांच बार चुनाव जीतने वाले डॉ. वकार के निधन के बाद वर्ष 2017 में जिले की पूर्व सांसद व उनकी धर्मपत्नी रूवाब सईदा को सपा से चुनाव लड़ाया गया था, लेकिन काफी कम मतों से भाजपा ने सपा की परंपरागत सीट को छीन ली थी। अब इस बार 2022 के 18वीं विधानसभा चुनाव में उनके बेटे पूर्व मंत्री व मटेरा विधायक यासर शाह को सपा से प्रत्याशी घोषित किया है, जबकि भाजपा ने पुराने चेहरे पर ही भरोसा जताकर सदर विधायक अनुपमा जायसवाल को चुनाव में प्रत्याशी उतारा है। कांग्रेस ने ब्राह्मण कार्ड खेलते हुए पार्टी के जिलाध्यक्ष जेपी मिश्रा को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। बसपा ने भी मुस्लिम चेहरे पर दांव लगाया है। अब देखना यह है कि डॉ. वकार की विरासत को बेटा कहां तक बचा पाएगा, वहीं भाजपा अपनी सीट को बचाए रखने में कहां तक कामयाब होगी।
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जिले की सदर विधानसभा सीट कई मायनों में अहम मानी जाती रही है। यहां की जनता ने लगातार डॉ. वकार अहमद शाह के चेहरे पर भरोसा जताकर उनको पांच बार सदन तक भेजा था। डॉ. वकार तीन बार प्रदेश में कबीना मंत्री व एक बार विधानसभा उपाध्यक्ष रह चुके हैं। डॉ. वकार जिले के काफी कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे, लेकिन डॉ. वकार की लंबी बीमारी के बाद उनके निधन हो जाने पर सपा ने वर्ष 2017 में डॉ. वकार की धर्मपत्नी व जिले की पूर्व सांसद रूवाब सईदा को प्रत्याशी घोषित किया था। रूवाब सईदा मतगणना के अंतिम चरणों में काफी कम मतों से चुनाव हार गई थीं। वर्ष 2017 में भाजपा की प्रत्याशी अनुपमा जायसवाल सपा की परंपरागत सीट को सपा से छीनने में कामयाब रहीं थीं। इस बार वर्ष 2022 के चुनाव में सपा ने डॉ. वकार के बेटे पूर्व मंत्री व मटेरा विधानसभा के विधायक यासर शाह को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
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इसके अलावा सदर क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ताओं के तमाम विरोध के बावजूद भाजपा ने पुराने चेहरे पर भरोसा जताकर सदर विधायक अनुपमा जायसवाल को टिकट दिया है। कांग्रेस ने पार्टी के जिलाध्यक्ष इंजीनियर जेपी मिश्रा और बसपा ने नईम खां को अपना प्रत्याशी बनाया है। अब देखना यह है कि मटेरा विधायक यासर अपने पिता की परंपरागत सीट को बचाने में सफल हो पाएंगे या नहीं। वहीं भाजपा की अनुपमा अपनी सीट को बचाए रखने में कहां तक कामयाब रहेंगी। यह 10 मार्च को स्पष्ट हो जाएगा।
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