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टिलवा गांव में घुसा पानी, फसल बर्बाद
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बिछिया (बहराइच)। घाघरा नदी के कछार में बसे टिलवा, मुजवा गांव में बाढ़ का पानी प्रवेश कर आया है। जिससे किसानों की हजारों बीघा फसल बर्बाद हो गई है। खेतों में पानी भर गया है। नेपाल के पहाड़ों पर लगातार बारिश के चलते बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है। सूचना के बाद भी तहसील प्रशासन का कोई भी अधिकारी या कर्मचारी मुआयना करने नहीं गया है।
जिले में लगभग 15 दिनों से बारिश रुकी हुई है। जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। सूखा के चलते किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर निरंतर बारिश हो रही है। जिससे मोतीपुर तहसील क्षेत्र के कछार के गांव में घाघरा में आई बाढ़ का पानी घुस गया है। तहसील क्षेत्र के टिलवा और मुजवा गांव में बाढ़ का पानी आ गया है। किसानों के खेत में बाढ़ का पानी भर गया है। सैकड़ों किसानों के एक हजार बीघा खेत में पानी भर गया है। जिससे धान, मक्का की फसल बर्बाद होने लगी है। पानी बढ़ने से ग्रामीणों में बाढ़ को लेकर भय होने लगा है।
यही हाल ग्राम पंचायत जंगल गुलरिहा के मजरा रामपुर रेतिया, धर्मपुर की है। यहां की खेती नदी की कटान की जद में आ गई है। ग्रामीणों ने सूचना मोतीपुर तहसील को दी है। लेकिन तहसील प्रशासन द्वारा किसी कर्मचारी या अधिकारी को मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं भेजा गया है। इस मामले में बैराज के प्रभारी संतराम वर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 13 जुलाई को पानी का लेवल बढ़ने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने बताया कि एक लाख 55 हजार क्यूसेक पानी 13 जुलाई को छोड़ा गया था।
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जिले में लगभग 15 दिनों से बारिश रुकी हुई है। जिससे लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। सूखा के चलते किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। लेकिन नेपाल के पहाड़ों पर निरंतर बारिश हो रही है। जिससे मोतीपुर तहसील क्षेत्र के कछार के गांव में घाघरा में आई बाढ़ का पानी घुस गया है। तहसील क्षेत्र के टिलवा और मुजवा गांव में बाढ़ का पानी आ गया है। किसानों के खेत में बाढ़ का पानी भर गया है। सैकड़ों किसानों के एक हजार बीघा खेत में पानी भर गया है। जिससे धान, मक्का की फसल बर्बाद होने लगी है। पानी बढ़ने से ग्रामीणों में बाढ़ को लेकर भय होने लगा है।
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यही हाल ग्राम पंचायत जंगल गुलरिहा के मजरा रामपुर रेतिया, धर्मपुर की है। यहां की खेती नदी की कटान की जद में आ गई है। ग्रामीणों ने सूचना मोतीपुर तहसील को दी है। लेकिन तहसील प्रशासन द्वारा किसी कर्मचारी या अधिकारी को मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं भेजा गया है। इस मामले में बैराज के प्रभारी संतराम वर्मा से बात की गई तो उन्होंने बताया कि 13 जुलाई को पानी का लेवल बढ़ने से बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने बताया कि एक लाख 55 हजार क्यूसेक पानी 13 जुलाई को छोड़ा गया था।
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