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डेंगू से दो लोगों की मौत, 22 अन्य भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 23 Oct 2016 10:27 PM IST
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मरीजों बढ़ने से बेंच पर हो रहा इलाज
- फोटो : अमर उजाला
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तराई में डेंगू का कहर थम नहीं रहा है। हालात यह हैं कि हर दूसरे दिन डेंगू के चलते किसी न किसी की मौत हो रही है। रविवार को डेंगू पीड़ित दो लोगों की जान चली गई। वहीं जिला अस्पताल में बुखार से पीड़ित 37 रोगियों का परीक्षण हुआ जिनमें जिला मलेरिया अधिकारी समेत 16 लोग डेंगू पॉजिटिव पाए गए।
जरवल में एक ही परिवार के छह लोग डेंगू की चपेट में आ गए हैं। उन्हें स्थानीय चिकित्सकों ने लखनऊ रेफर कर दिया है। जिला अस्पताल में परीक्षण के दौरान 16 डेंगू पीड़ित मिलने से हड़कंप मचा है। जिला अस्पताल में धर्मपुर हरैया गांव निवासी अमरीकन (40) पुत्र बलदेव को तीन दिन पूर्व भर्ती कराया गया था। बुखार के साथ ही शरीर पर चखत्ते निकल रहे थे।
डॉक्टरों ने डेंगू की पुष्टि की। इलाज के दौरान रविवार सुबह उसकी मौत हो गई। उधर शहर में वजीरबाग निवासी मुन्ना (14) ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उसे भी डेंगू की शिकायत थी।
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जिला अस्पताल में शनिवार को बुखार के 37 रोगी भर्ती कराए गए। इन्हें तेज बुखार के साथ शरीर पर चखत्ते निकल रहे हैं। मिचली की भी शिकायत थी। डेंगू की आशंका जताते हुए डॉक्टरों ने परीक्षण कराने की सलाह दी। रोगियों ने परीक्षण कराया गया तो 16 रोगी रैपिड टेस्ट पॉजिटिव पाये गये। डेंगू पीड़ित होने की स्थिति में रैपिड टेस्ट से ही डेंगू की पुष्टि होती है।
इसके बाद एलायजा टेस्ट किया जाता है। 16 रोगियों के रैपिड टेस्ट पॉजिटिव मिलने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि सभी रोगियों का जिला अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। इनमें जिला मलेरिया अधिकारी मुइन अहमद (50) भी शामिल हैं।
उधर जरवल कस्बा निवासी संजय श्रीवास्तव का पूरा परिवार डेंगू की चपेट में आ गया है। सीएचसी मुस्तफाबाद में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने परीक्षण करवाया तो संजय की पुत्री आंचल (9), परिवार की सुनीता (38) पति कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, मुनेश्वर प्रसाद (70), मंजू श्रीवास्तव (35) समेत छह लोग डेंगू की चपेट में पाये गये।
हालत गंभीर होने के चलते सभी को लखनऊ रेफर कर दिया गया है। वहां सभी एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण लाल का कहना है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में फागिंग व एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। डेंगू रोगियों की संख्या भी सीएचसी प्रभारियों से तलब की गई है।
मरीजों बढ़ने से बेंच पर हो रहा इलाज
जिला अस्पताल में अचानक डेंगू और दिमागी बुखार के रोगियों की संख्या में इजाफा होने से संसाधन कम पड़ गए हैं। हालात यह हैं कि भर्ती होने वाले रोगियों को बेड तक नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते भर्ती होने वाले नन्हें-मुन्हें रोगी भी सीमेंटेड बेंच पर भर्ती किये गये हैं। बिना बिस्तर के बुखार पीड़ित बच्चे लेटे हुए हैं। उन्हें ड्रिप चलाई जा रही है।
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जरवल में एक ही परिवार के छह लोग डेंगू की चपेट में आ गए हैं। उन्हें स्थानीय चिकित्सकों ने लखनऊ रेफर कर दिया है। जिला अस्पताल में परीक्षण के दौरान 16 डेंगू पीड़ित मिलने से हड़कंप मचा है। जिला अस्पताल में धर्मपुर हरैया गांव निवासी अमरीकन (40) पुत्र बलदेव को तीन दिन पूर्व भर्ती कराया गया था। बुखार के साथ ही शरीर पर चखत्ते निकल रहे थे।
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डॉक्टरों ने डेंगू की पुष्टि की। इलाज के दौरान रविवार सुबह उसकी मौत हो गई। उधर शहर में वजीरबाग निवासी मुन्ना (14) ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। उसे भी डेंगू की शिकायत थी।
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जिला अस्पताल में शनिवार को बुखार के 37 रोगी भर्ती कराए गए। इन्हें तेज बुखार के साथ शरीर पर चखत्ते निकल रहे हैं। मिचली की भी शिकायत थी। डेंगू की आशंका जताते हुए डॉक्टरों ने परीक्षण कराने की सलाह दी। रोगियों ने परीक्षण कराया गया तो 16 रोगी रैपिड टेस्ट पॉजिटिव पाये गये। डेंगू पीड़ित होने की स्थिति में रैपिड टेस्ट से ही डेंगू की पुष्टि होती है।
इसके बाद एलायजा टेस्ट किया जाता है। 16 रोगियों के रैपिड टेस्ट पॉजिटिव मिलने के बाद हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि सभी रोगियों का जिला अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। इनमें जिला मलेरिया अधिकारी मुइन अहमद (50) भी शामिल हैं।
उधर जरवल कस्बा निवासी संजय श्रीवास्तव का पूरा परिवार डेंगू की चपेट में आ गया है। सीएचसी मुस्तफाबाद में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने परीक्षण करवाया तो संजय की पुत्री आंचल (9), परिवार की सुनीता (38) पति कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, मुनेश्वर प्रसाद (70), मंजू श्रीवास्तव (35) समेत छह लोग डेंगू की चपेट में पाये गये।
हालत गंभीर होने के चलते सभी को लखनऊ रेफर कर दिया गया है। वहां सभी एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. अरुण लाल का कहना है कि सभी प्रभावित क्षेत्रों में फागिंग व एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। डेंगू रोगियों की संख्या भी सीएचसी प्रभारियों से तलब की गई है।
मरीजों बढ़ने से बेंच पर हो रहा इलाज
जिला अस्पताल में अचानक डेंगू और दिमागी बुखार के रोगियों की संख्या में इजाफा होने से संसाधन कम पड़ गए हैं। हालात यह हैं कि भर्ती होने वाले रोगियों को बेड तक नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते भर्ती होने वाले नन्हें-मुन्हें रोगी भी सीमेंटेड बेंच पर भर्ती किये गये हैं। बिना बिस्तर के बुखार पीड़ित बच्चे लेटे हुए हैं। उन्हें ड्रिप चलाई जा रही है।