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आज घर-घर विराजेंगे गणपति बप्पा
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बहराइच के मेवातीपुरा में घर में सजायी गई गणेश प्रतिमा।
- फोटो : BAHRAICH
बहराइच। बिना ढोल नगाड़ों के सादगी के साथ शनिवार को घर-घर गणपति बप्पा विराजमान होंगे। कहीं पर दो दिन तो कहीं पर 10 दिनों तक पार्वती नंदन की पूजा विधिविधान से की जाएगी। गणपति बप्पा को घर लाने के लिए श्रद्धालु शुक्रवार को दिनभर बाजार में मूर्ति की खरीदारी करते दिखे। कोरोना काल के कारण इस बार पंडाल में गणपति बप्पा की मूर्ति नहीं स्थापित हो सकी। छोटी मूर्ति खरीदकर लोग अपने घरों में स्थापना कर पूजन-अर्चन करेंगे।
गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर शनिवार को भक्तों के विघ्न हरने आज घर-घर गणपति बप्पा विराजमान होंगे। बप्पा के स्वागत में लोगों में खासा उत्साह दिखा। चतुर्थी पर गजानन कहीं दो, कहीं पांच तो कहीं 10 दिन के लिए विराजमान होंगे। श्रद्धालुओं ने गजानन के स्वागत में अपने घरों में झांकियां सजाई हैं। इस बार कोरोना काल के कारण शहर के मुख्य मार्गों के पास से ग्रामीण अंचलों तक पहले वाली धूम नहीं रहेगी। जिले में कही भी पंडाल में मूर्ति की स्थापना नहीं की जा सकी है। बाजारों मेें छोटी मूर्ति की खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ी नजर आई।
न देखें आज का चांद
महामंडलेश्वर रविगिरी जी महराज बताते हैं कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन निषेध होता है। गणपति ने चंद्रमा को श्राप दिया था। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन चंद्रमा के दर्शन कर लिए थे तो उन पर मणि के चोरी के कलंक लग गया था।
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प्रतिमा स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस बार गजानन की स्थापना श्रद्धालु घरों में करेेंगे। मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह सूर्योदय से रात्रि 11:35 बजे तक है। गणपति भगवान को मोदक प्रिय है। इसलिए पूजा के समय मोदक का भोग अवश्य लगाएं। अगर संभव न हो तो मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
-रविगिरी जी महराज, महामंडलेश्वर सिद्धनाथ मंदिर
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गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर शनिवार को भक्तों के विघ्न हरने आज घर-घर गणपति बप्पा विराजमान होंगे। बप्पा के स्वागत में लोगों में खासा उत्साह दिखा। चतुर्थी पर गजानन कहीं दो, कहीं पांच तो कहीं 10 दिन के लिए विराजमान होंगे। श्रद्धालुओं ने गजानन के स्वागत में अपने घरों में झांकियां सजाई हैं। इस बार कोरोना काल के कारण शहर के मुख्य मार्गों के पास से ग्रामीण अंचलों तक पहले वाली धूम नहीं रहेगी। जिले में कही भी पंडाल में मूर्ति की स्थापना नहीं की जा सकी है। बाजारों मेें छोटी मूर्ति की खरीदारी के लिए भीड़ उमड़ी नजर आई।
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महामंडलेश्वर रविगिरी जी महराज बताते हैं कि गणेश चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन निषेध होता है। गणपति ने चंद्रमा को श्राप दिया था। ऐसा माना जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण ने इसी दिन चंद्रमा के दर्शन कर लिए थे तो उन पर मणि के चोरी के कलंक लग गया था।
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प्रतिमा स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस बार गजानन की स्थापना श्रद्धालु घरों में करेेंगे। मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह सूर्योदय से रात्रि 11:35 बजे तक है। गणपति भगवान को मोदक प्रिय है। इसलिए पूजा के समय मोदक का भोग अवश्य लगाएं। अगर संभव न हो तो मोतीचूर के लड्डू का भोग लगाएं।
-रविगिरी जी महराज, महामंडलेश्वर सिद्धनाथ मंदिर