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शुद्ध पानी को तरस रही तीन हजार आबादी
अमर उजाला/बहराइच
Updated Sun, 05 Mar 2017 11:34 PM IST
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ठप पड़ी पानी टंकी
- फोटो : अमर उजाला
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अड़गोड़वा गांव में ग्रामीणों को स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2011-12 में एक करोड़ रुपये की लागत से पानी टंकी का निर्माण कराया गया था। विभाग ने अधिकारियों की तैनाती कर ग्रामीणों को पानी की सप्लाई दी, लेकिन कार्यालय में तैनात सुपरवाइजर का तबादला साल भर पूर्व दूसरी जगह हो गया, जिससे पानी टंकी का संचालन बंद हो गया। इससे एक वर्ष से तीन हजार की आबादी को पानी की सप्लाई नहीं मिल पा रही है। वहीं, देखरेख के अभाव में पानी टंकी व पाइप लाइन झाड़-झंखाड़ से पट गई है।
नानपारा तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत अड़गोड़वा की आबादी करीब तीन हजार है। क्षेत्र का पानी काफी दूषित है। आर्सेनिक की मात्रा भी अधिक है। इस पर ग्रामीणों की मांग पर वर्ष 2011-12 में जल निगम ने एक करोड़ रुपये की लागत से पानी टंकी का निर्माण कराया था।
छह माह में पानी टंकी का निर्माण पूरा होने के बाद सुपरवाइजर की तैनाती कर लोगों को पानी की सप्लाई मिलने लगी। गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने पानी सप्लाई का कनेक्शन लिया। सभी को स्वच्छ पानी भी मिलने लगा। बीती अप्रैल में तैनात सुपरवाइजर का तबादला नानपारा क्षेत्र में कर दिया गया। इससे अड़गोड़वा स्थित पानी टंकी की देखभाल और संचालन करने वाला कोई नहीं बचा। सुपरवाइजर के तबादले के बाद पुन: किसी दूसरे कर्मचारी की तैनाती भी नहीं की गई, जिससे पानी टंकी से पेयजल की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई।
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रखरखाव के अभाव में पानी टंकी बदहाल है। वहीं, टंकी का संचालन न होने से तीन हजार आबादी शुद्ध पेयजल को तरस रही हैं। लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। गांव निवासी प्रभुनाथ, राधेश्याम, जितेंद्र सिंह आदि ने जल निगम के एक्सईएन से पानी टंकी पर कर्मचारियों की तैनाती व संचालन कर पेयजल सप्लाई शुरू कराने की मांग की है।
अड़गोड़वा गांव में स्थापित पानी टंकी का संचालन कर्मचारियों के अभाव में बंद है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। अब पता चला है। संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच करवाने के बाद कार्रवाई करेंगे। प्रयास होगा कि शीघ्र ही पानी टंकी का संचालन शुरू हो जाए।
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नानपारा तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत अड़गोड़वा की आबादी करीब तीन हजार है। क्षेत्र का पानी काफी दूषित है। आर्सेनिक की मात्रा भी अधिक है। इस पर ग्रामीणों की मांग पर वर्ष 2011-12 में जल निगम ने एक करोड़ रुपये की लागत से पानी टंकी का निर्माण कराया था।
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छह माह में पानी टंकी का निर्माण पूरा होने के बाद सुपरवाइजर की तैनाती कर लोगों को पानी की सप्लाई मिलने लगी। गांव के सैकड़ों ग्रामीणों ने पानी सप्लाई का कनेक्शन लिया। सभी को स्वच्छ पानी भी मिलने लगा। बीती अप्रैल में तैनात सुपरवाइजर का तबादला नानपारा क्षेत्र में कर दिया गया। इससे अड़गोड़वा स्थित पानी टंकी की देखभाल और संचालन करने वाला कोई नहीं बचा। सुपरवाइजर के तबादले के बाद पुन: किसी दूसरे कर्मचारी की तैनाती भी नहीं की गई, जिससे पानी टंकी से पेयजल की सप्लाई पूरी तरह से ठप हो गई।
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रखरखाव के अभाव में पानी टंकी बदहाल है। वहीं, टंकी का संचालन न होने से तीन हजार आबादी शुद्ध पेयजल को तरस रही हैं। लोग आर्सेनिक युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। गांव निवासी प्रभुनाथ, राधेश्याम, जितेंद्र सिंह आदि ने जल निगम के एक्सईएन से पानी टंकी पर कर्मचारियों की तैनाती व संचालन कर पेयजल सप्लाई शुरू कराने की मांग की है।
अड़गोड़वा गांव में स्थापित पानी टंकी का संचालन कर्मचारियों के अभाव में बंद है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। अब पता चला है। संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर जांच करवाने के बाद कार्रवाई करेंगे। प्रयास होगा कि शीघ्र ही पानी टंकी का संचालन शुरू हो जाए।