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नदी में समाए तीन मकान व 70 बीघा खेत
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बौंडी (बहराइच)। घाघरा नदी का जलस्तर घटने के साथ ही कैसरगंज और महसी तहसील क्षेत्र में कटान तेज हो गई है। रविवार को भिरगूपुरवा गांव के तीन मकान नदी में कटकर समाहित हो गए। जबकि 70 बीघा खेती योग्य भूमि भी नदी में बह गई। कटान तेज होने से ग्रामीणों में दहशत है। प्रशासन की ओर से राहत व बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं।
घाघरा नदी में तीन दिन पूर्व अचानक जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था। नेपाल से छोड़े जा रहे पानी के कारण घूरदेवी पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान करीब पहुंच गया था, जिसके चलते 12 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। सभी गांवों में पानी भर गया था। उधर, कैसरगंज तहसील क्षेत्र में भी घाघरा नदी अपने रौद्र रूप पर है।
कटान तेज होने के कारण घाघरा के मंझारा तौकली, गोड़हिया, महावीरपुरवा, रोहितपुरवा, बलराजपुरवा आदि नदी के मुहाने पर आ गए हैँ। रविवार को भिरगूपुरवा गांव निवासी संतराम यादव, रामविलास व तीरथराम के मकान कटकर नदी में समा गए। जबकि 70 बीघा खेत भी नदी में बह गए।
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उधर, महसी तहसील क्षेत्र के बौंडी, सिलौटा, अटोडर, भौंरी, छत्तरपुरवा, जोगापुरवा, मांझा दरिकया बुर्द, पिपरा, पिपरी समेत अन्य गांव पानी से घिरे हुए हैं। इससे ग्रामीणों को दिक्कतें हो रही हैं।
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घाघरा नदी में तीन दिन पूर्व अचानक जलस्तर बढ़ना शुरू हो गया था। नेपाल से छोड़े जा रहे पानी के कारण घूरदेवी पर नदी का जलस्तर खतरे के निशान करीब पहुंच गया था, जिसके चलते 12 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए थे। सभी गांवों में पानी भर गया था। उधर, कैसरगंज तहसील क्षेत्र में भी घाघरा नदी अपने रौद्र रूप पर है।
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कटान तेज होने के कारण घाघरा के मंझारा तौकली, गोड़हिया, महावीरपुरवा, रोहितपुरवा, बलराजपुरवा आदि नदी के मुहाने पर आ गए हैँ। रविवार को भिरगूपुरवा गांव निवासी संतराम यादव, रामविलास व तीरथराम के मकान कटकर नदी में समा गए। जबकि 70 बीघा खेत भी नदी में बह गए।
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उधर, महसी तहसील क्षेत्र के बौंडी, सिलौटा, अटोडर, भौंरी, छत्तरपुरवा, जोगापुरवा, मांझा दरिकया बुर्द, पिपरा, पिपरी समेत अन्य गांव पानी से घिरे हुए हैं। इससे ग्रामीणों को दिक्कतें हो रही हैं।