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नदी का जलस्तर फिर बढ़ा
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 18 Aug 2016 10:33 PM IST
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जलस्तर फिर बढ़ा
- फोटो : amar ujala
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दो दिनों से हो रही झमाझम बरसात के चलते महसी क्षेत्र में नदी की लहरें फिर से हिलोरे लेने लगी हैं। गुरुवार को 15 मकान घाघरा की लहरों में समा गए। 90 बीघा खेत लहरों की भेंट चढ़ गए। घाघरा खतरे के निशान से 21 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। हालात को देखते हुए ग्रामीण भयभीत हैं।
घाघरा का जलस्तर कुछ दिन से स्थिर हो गया था। इससे आसपास के लोग राहत महसूस कर रहे थे। दो दिनों से हो रही बरसात के चलते एक बार फिर घाघरा का जलस्तर चढ़ने लगा। गुरुवार को एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जल स्तर 106.286 मीटर मापा गया। यह खतरे के निशान 106.07 मीटर से 21 सेंटीमीटर अधिक है।
जलस्तर में उतार चढ़ाव के चलते कटान तेज हो गई है। घाघरा की लहरें सबसे ज्यादा महसी क्षेत्र के कहारनपुरवा गांव में तबाही मचा रही हैं। बुधवार रात से कहारनपुरवा गांव निवासी मदनलाल, चंद्रशेखर, केशव, अमिरका, पूरन, लवकुश, रामकली, गंगाराम, अर्जुन, जमुना प्रसाद, मनमोहन, रामछबीले, हेमराज, तारा देवी, विजय कुमार, जीवनलाल, जनकलाल समेत 15 ग्रामीणों के मकान नदी में समा गए।
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करीब 90 बीघा खेत भी कटान की भेंट चढ़ गए हैं। ग्रामीणों ने कटान की स्थिति से तहसील प्रशासन को अवगत कराया लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। प्रभावित ग्रामीणों ने आशियाने उजाड़कर पलायन शुरू कर दिया है। गांव में मवेशियों के लिए चारे का संकट भी उत्पन्न हो गया है।
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घाघरा का जलस्तर कुछ दिन से स्थिर हो गया था। इससे आसपास के लोग राहत महसूस कर रहे थे। दो दिनों से हो रही बरसात के चलते एक बार फिर घाघरा का जलस्तर चढ़ने लगा। गुरुवार को एल्गिन ब्रिज पर घाघरा नदी का जल स्तर 106.286 मीटर मापा गया। यह खतरे के निशान 106.07 मीटर से 21 सेंटीमीटर अधिक है।
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जलस्तर में उतार चढ़ाव के चलते कटान तेज हो गई है। घाघरा की लहरें सबसे ज्यादा महसी क्षेत्र के कहारनपुरवा गांव में तबाही मचा रही हैं। बुधवार रात से कहारनपुरवा गांव निवासी मदनलाल, चंद्रशेखर, केशव, अमिरका, पूरन, लवकुश, रामकली, गंगाराम, अर्जुन, जमुना प्रसाद, मनमोहन, रामछबीले, हेमराज, तारा देवी, विजय कुमार, जीवनलाल, जनकलाल समेत 15 ग्रामीणों के मकान नदी में समा गए।
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करीब 90 बीघा खेत भी कटान की भेंट चढ़ गए हैं। ग्रामीणों ने कटान की स्थिति से तहसील प्रशासन को अवगत कराया लेकिन कोई भी अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा है। प्रभावित ग्रामीणों ने आशियाने उजाड़कर पलायन शुरू कर दिया है। गांव में मवेशियों के लिए चारे का संकट भी उत्पन्न हो गया है।