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100 साल बाद टूटेगी परंपरा, इस बार नहीं लगेगा स्नान मेला
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बहराइच। करीब 100 साल से कार्तिक पूर्णिमा पर शहर के त्रिमुहानी घाट पर लगने वाले स्नान मेले की परंपरा इस बार टूट जाएगी। कोरोना महामारी में बरती जा रही सतर्कता के कारण इस बार मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा। श्रद्धालु सरयू नदी में डुबकी लगाकर व पूजन-अर्चन कर अपने घर चले जाएंगे। कोरोना महामारी के कारण स्वर्गधाम सेवा समिति ने यह फैसला लिया है।
शहर के त्रिमुहानी घाट पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर करीब 100 साल से स्नान मेले का आयोजन होता चला आ रहा है। यहां पर श्रद्धालु सुबह से आकर सरयू नदी में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना करते हैं और लगने वाले मेले का आनंद उठाते हैं। यहां पर हर साल मेले में लगभग लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। सबसे ज्यादा खरीदारी गन्ने की होती है, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा। स्वर्गधाम सेवा समिति के अध्यक्ष अशोक मातनहेलिया, सचिव कुलभूषण अरोरा व प्रबंधक शीतल प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि शासन द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए 100 लोगों की अनुमति दी गई है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन हर साल लगने वाले मेले में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। मेला लगने की स्थिति में भीड़ व संक्रमण को रोक पाना मुश्किल होगा। कोरोना संक्रमण के प्रकोप से बचने के दृष्टिगत लोगों की सुरक्षा को देखते हुए समिति की ओर से यह फैसला लिया गया है। इस फैसले से जिला प्रशासन को भी अवगत कराया दिया गया है। नगर मजिस्ट्रेट जय प्रकाश ने बताया कि समिति ने लिखित में मेले का आयोजन न कराने की जानकारी दी है।
सामान समेटने में लगे दुकानदार
स्नान मेले की तैयारियों को लेकर दुकानदारों द्वारा एक सप्ताह पूर्व से ही सामान एकत्र करने और बनाने का काम शुरू कर दिया जाता था। इस बार भी मेले की तैयारियों को अंतिम रूप देने में सभी जुटे थे। अचानक मेले के आयोजन के निरस्त होने की सूचना के बाद दुकानदारों को अपना सामान सहेजने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मेले में ठेले, होटल, झूला, दैनिक सामान आदि की दुकानें बड़ी संख्या में लगती रही हैं।
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इस बार नहीं मिलेगा मेले का आनंद
मेले में जाने से कई अपने पुराने लोगों से मिलन हो जाता था। मेले में अपनों के साथ आनंद उठाने का मजा ही कुछ और होता था, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण मेले का आनंद नहीं मिल सकेगा।
ज्ञानचंद्र वर्मा, श्रद्धालु
नदी से पानी लाकर घर पर करूंगा स्नान
कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार स्नान मेले का आयोजन नहीं किया जा रहा है। परंपरा को निभाने के लिए सरयू नदी से पानी लाकर घर पर स्नान कर लूंगा और घर पर ही पूजा-पाठ करूंगा।
वेद प्रकाश पाठक, श्रद्धालु
अच्छी हो जाती थी कमाई
मेले में सुबह से ही दुकान लग जाती थी। ग्राहकों का तांता दोपहर से शुरू होता था जो देर रात तक चलता रहता था। रात में दुकान बंद करने के बाद हम लोगों की अच्छी कमाई हो जाती थी।
अलीम अहमद, दुकानदार
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शहर के त्रिमुहानी घाट पर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर करीब 100 साल से स्नान मेले का आयोजन होता चला आ रहा है। यहां पर श्रद्धालु सुबह से आकर सरयू नदी में डुबकी लगाकर पूजा-अर्चना करते हैं और लगने वाले मेले का आनंद उठाते हैं। यहां पर हर साल मेले में लगभग लाखों श्रद्धालु उमड़ते हैं। सबसे ज्यादा खरीदारी गन्ने की होती है, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा। स्वर्गधाम सेवा समिति के अध्यक्ष अशोक मातनहेलिया, सचिव कुलभूषण अरोरा व प्रबंधक शीतल प्रसाद अग्रवाल ने बताया कि शासन द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए 100 लोगों की अनुमति दी गई है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन हर साल लगने वाले मेले में लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है। मेला लगने की स्थिति में भीड़ व संक्रमण को रोक पाना मुश्किल होगा। कोरोना संक्रमण के प्रकोप से बचने के दृष्टिगत लोगों की सुरक्षा को देखते हुए समिति की ओर से यह फैसला लिया गया है। इस फैसले से जिला प्रशासन को भी अवगत कराया दिया गया है। नगर मजिस्ट्रेट जय प्रकाश ने बताया कि समिति ने लिखित में मेले का आयोजन न कराने की जानकारी दी है।
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सामान समेटने में लगे दुकानदार
स्नान मेले की तैयारियों को लेकर दुकानदारों द्वारा एक सप्ताह पूर्व से ही सामान एकत्र करने और बनाने का काम शुरू कर दिया जाता था। इस बार भी मेले की तैयारियों को अंतिम रूप देने में सभी जुटे थे। अचानक मेले के आयोजन के निरस्त होने की सूचना के बाद दुकानदारों को अपना सामान सहेजने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। मेले में ठेले, होटल, झूला, दैनिक सामान आदि की दुकानें बड़ी संख्या में लगती रही हैं।
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इस बार नहीं मिलेगा मेले का आनंद
मेले में जाने से कई अपने पुराने लोगों से मिलन हो जाता था। मेले में अपनों के साथ आनंद उठाने का मजा ही कुछ और होता था, लेकिन इस बार कोरोना महामारी के कारण मेले का आनंद नहीं मिल सकेगा।
ज्ञानचंद्र वर्मा, श्रद्धालु
नदी से पानी लाकर घर पर करूंगा स्नान
कोरोना महामारी को देखते हुए इस बार स्नान मेले का आयोजन नहीं किया जा रहा है। परंपरा को निभाने के लिए सरयू नदी से पानी लाकर घर पर स्नान कर लूंगा और घर पर ही पूजा-पाठ करूंगा।
वेद प्रकाश पाठक, श्रद्धालु
अच्छी हो जाती थी कमाई
मेले में सुबह से ही दुकान लग जाती थी। ग्राहकों का तांता दोपहर से शुरू होता था जो देर रात तक चलता रहता था। रात में दुकान बंद करने के बाद हम लोगों की अच्छी कमाई हो जाती थी।
अलीम अहमद, दुकानदार