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Bahraich News: धड़ल्ले से हो रही तस्करी नहीं लग पा रही लगाम

Fri, 01 Aug 2025 01:17 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच
संवाद न्यूज एजेंसी, बहराइच Updated Fri, 01 Aug 2025 01:17 AM IST
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The smuggling is happening indiscriminately and cannot be controlled
बहराइच। जिले में किसान खेतों में पसीना बहा रहे हैं, लेकिन जब बात यूरिया खाद की आती है तो हाथ मलते रह जाते हैं। एक तरफ सीमा के उस पार भारत की यूरिया से नेपाल में खेत लहलहा रहे हैं, तो दूसरी ओर जिले के किसान यूरिया खाद के लिए दर-दर की ठोकरें खाते हैं। सवाल यह उठता है कि खेत उतने ही हैं, किसान भी वही हैं, फसलें भी लगभग एक सी हैं, फिर हर साल यूरिया की खपत क्यों बढ़ जा रही है।
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जिले में कुल कृषि योग्य भूमि 3,50,979 हेक्टेयर है। इसमें से शुद्ध सिंचित भूमि 63,677 हेक्टेयर और कुल सिंचित क्षेत्र 67,131 हेक्टेयर है। पिछले पांच वर्षों के कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सीजन में औसतन 3,60,000 क्विंटल यूरिया की खपत होती रही है, लेकिन इस बार मांग और आपूर्ति दोनों ही असामान्य रूप से बढ़े हैं।
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कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार साल 2024 के जुलाई महीने में जिले में 2,70,000 क्विंटल यूरिया खाद की खपत दर्ज की गई थी। अगस्त-सितंबर में यह खपत 3,60,000 क्विंटल तक पहुंच गई थी। इस साल स्थिति और गंभीर है सिर्फ जुलाई में ही 3,60,000 क्विंटल यूरिया खाद की खपत अब तक खेतों में हो चुकी है, जबकि अगस्त-सितंबर के लिए अतिरिक्त 3,00,000 क्विंटल यूरिया की मांग और की गई है।
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यानी खाद की जरूरत 6,70,000 क्विंटल के पार जा रही है। ऐसे में यह सवाल सभी को साल रहा है कि जब खेतों की संख्या और खेती की पद्धति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, तो इतनी अधिक खपत आखिर क्यों।
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