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सरकारी कर्मचारियों के नाम बीपीएल सूची में
बहराइच/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 03 Jan 2016 09:53 PM IST
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गरीबों की सूची में चार गांवों के 200 से ज्यादा अपात्रों को शामिल किया गया है। खास बात ये है कि इस सूची में उन लोगों को दर्शाया गया है जिनकी आमदनी अच्छी खासी है या फिर हजारों रुपये पेंशन के तौर पर मिलते हैं।
इसके बाद भी उन्हें गरीबों की श्रेणी में दिखाकर लाभ दिलवाने की कोशिश की जा रही है। एसडीएम ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। इस पर मामले में हेराफेरी करने वाले अपने बचाव में जुट गए हैं।
सरकारी योजनाओं के लिए एक ओर जहां आम आदमी भटकने को मजबूर हंै वहीं दूसरी ओर अपात्रों को इसका लाभ दिया जा रहा है। गांवों में बीपीएल सूची गरीबों को चिह्नित उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए किया जाता है लेकिन इसी सूची में महसी में खेल खेला गया है।
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महसी विकास खंड के रमपुरवा, बिसवां, जोत चांदपारा और टेड़वा ग्राम पंचायत में एक, दो नहीं बल्कि 200 से ज्यादा अपात्रों को गरीब दर्शाया गया है। रमपुरवा ग्राम पंचायत की बीपीएल सूची पर नजर डालें तो श्रावस्ती में चकबंदी नायब के पद पर तैनात पवन कुमार पुत्र उमेशचंद्र को क्रमांक संख्या 205 बीपीएल सूची में रखा गया है।
रिटायर्ड कानूनगो विनीत कुमार के पास पक्का मकान है, ट्रैक्टर ट्रॉली है, फिर भी क्रमांक संख्या 206 पर उनका नाम है। रिटायर होकर पेंशन ले रहे गांव निवासी शंकरसरन का नाम भी क्रमांक संख्या 207 में दर्ज है। गोंडा में चकबंदी कानूनगो के पद पर तैनात सज्जन का नाम क्रमांक संख्या 195 पर गरीबों की लिस्ट में शामिल है।
वहीं रिटायर्ड शिक्षक हरिशंकर हजारों की पेंशन पाते हैं। फिर भी क्रमांक संख्या 68 पर गरीब पात्रता सूची में उनका नाम दर्ज है। क्रमांक संख्या 49 पर कनीराम, 76 पर महेंद्र नाथ, 93 पर शिवनरायन, 99 पर नरेंद्र कुमार के नाम हैं जिनके पास खुद के पक्के मकान हैं।
इसके अलावा भी दर्जनों ग्रामीण अपात्र होने के बावजूद गरीबी सूची के पात्र बने हुए हैं। इसका खुलासा गांव के लोगों ने तैयार की गई पात्रता सूची देखने के बाद किया। शिकायत एसडीएम से हुई तो वह भी सकते में आ गए उपजिलाधिकारी महसी मनोज कुमार ने कहा कि जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।
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इसके बाद भी उन्हें गरीबों की श्रेणी में दिखाकर लाभ दिलवाने की कोशिश की जा रही है। एसडीएम ने मामले में जांच के निर्देश दिए हैं। इस पर मामले में हेराफेरी करने वाले अपने बचाव में जुट गए हैं।
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सरकारी योजनाओं के लिए एक ओर जहां आम आदमी भटकने को मजबूर हंै वहीं दूसरी ओर अपात्रों को इसका लाभ दिया जा रहा है। गांवों में बीपीएल सूची गरीबों को चिह्नित उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए किया जाता है लेकिन इसी सूची में महसी में खेल खेला गया है।
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महसी विकास खंड के रमपुरवा, बिसवां, जोत चांदपारा और टेड़वा ग्राम पंचायत में एक, दो नहीं बल्कि 200 से ज्यादा अपात्रों को गरीब दर्शाया गया है। रमपुरवा ग्राम पंचायत की बीपीएल सूची पर नजर डालें तो श्रावस्ती में चकबंदी नायब के पद पर तैनात पवन कुमार पुत्र उमेशचंद्र को क्रमांक संख्या 205 बीपीएल सूची में रखा गया है।
रिटायर्ड कानूनगो विनीत कुमार के पास पक्का मकान है, ट्रैक्टर ट्रॉली है, फिर भी क्रमांक संख्या 206 पर उनका नाम है। रिटायर होकर पेंशन ले रहे गांव निवासी शंकरसरन का नाम भी क्रमांक संख्या 207 में दर्ज है। गोंडा में चकबंदी कानूनगो के पद पर तैनात सज्जन का नाम क्रमांक संख्या 195 पर गरीबों की लिस्ट में शामिल है।
वहीं रिटायर्ड शिक्षक हरिशंकर हजारों की पेंशन पाते हैं। फिर भी क्रमांक संख्या 68 पर गरीब पात्रता सूची में उनका नाम दर्ज है। क्रमांक संख्या 49 पर कनीराम, 76 पर महेंद्र नाथ, 93 पर शिवनरायन, 99 पर नरेंद्र कुमार के नाम हैं जिनके पास खुद के पक्के मकान हैं।
इसके अलावा भी दर्जनों ग्रामीण अपात्र होने के बावजूद गरीबी सूची के पात्र बने हुए हैं। इसका खुलासा गांव के लोगों ने तैयार की गई पात्रता सूची देखने के बाद किया। शिकायत एसडीएम से हुई तो वह भी सकते में आ गए उपजिलाधिकारी महसी मनोज कुमार ने कहा कि जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे।