{"_id":"591de91a4f1c1b7419f22ac7","slug":"the-last-farewell-to-the-ias-officer-with-damp-eyes","type":"story","status":"publish","title_hn":"नम आंखों से आईएएस अफसर को दी अंतिम विदाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
नम आंखों से आईएएस अफसर को दी अंतिम विदाई
अमर उजाला/बहराइच
Updated Fri, 19 May 2017 12:04 AM IST
विज्ञापन
अनुराग के पिता से मिलते अफसर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लखनऊ के मीराबाई गेस्ट हाउस के बाहर मृत मिले बहराइच निवासी आईएएस अफसर अनुराग तिवारी को गुरुवार को लोगों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी। इससे पहले अनुराग का शव घर पहुंचते ही मां सुशीला उससे लिपटकर दहाड़ें मारकर रो पड़ी। उनके मुंह से बार-बार यही शब्द निकल रहे थे... मेरे लाल हमें भी साथ ले चलो। इस उम्र में तुम्हारा बिछड़ना कैसे सहेंगे। अंतिम यात्रा में डीएम और एसपी के साथ जिले के कई आला अफसर मौजूद रहे। वहीं, अनुराग के बैचमेट 27 आईएएस व आईपीएस अफसर भी अंतिम विदाई में शामिल हुए। हरदोई की डीएम शीतल वर्मा देर से पहुंचीं, तो अनुराग को अंतिम बार नहीं देख पाने से उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े।
शहर के कानूनगोपुरा दक्षिणी निवासी अनुराग तिवारी कर्नाटक कैडर के आईएएस अधिकारी थे। वह मसूरी से ट्रेनिंग के बाद लखनऊ के हजरतगंज स्थित मीराबाई गेस्ट हाउस में ठहरे थे। जन्मदिन के मौके पर उन्हें बुधवार को बहराइच आना था, लेकिन सुबह उनका शव गेस्ट हाउस के बाहर सड़क पर पड़ा मिला था।
पोस्टमार्टम के बाद देर रात शव कानूनगोपुरा मोहल्ले में पैतृक आवास में लाया गया, जहां अंतिम दर्शन को लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। उनकी अंतिम यात्रा गुरुवार सुबह त्रिमुहानी घाट स्थित स्वर्गधाम पहुंची। यहां जिलाधिकारी बहराइच अजयदीप सिंह व एसपी सुनील सक्सेना समेत अन्य अधिकारियों ने शव पर पुष्पचक्र भेंट कर श्रद्धांजलि दी।
विज्ञापन
चिता को मुखाग्नि उनके बड़े भाई आलोक तिवारी ने दी। डीएम हरदोई शीतल वर्मा चिता को आग देने के बाद पहुुंचीं। अंतिम बार अनुराग को न देख पाने का मलाल होने पर वह किनारे खड़ी हो गईं और बहते आंसुओं को थामने का प्रयास करने लगीं। लखनऊ के एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक व एलडीए वीसी पीएन सिंह भी मौजूद रहे। इस मौके पर एडीएम विद्याशंकर सिंह, एएसपी दिनेश त्रिपाठी, एसडीएम सदर गौरांग राठी, आईएएस महेंद्र सिंह तंवर आदि मौजूद रहे।
कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए अनुराग के बैचमेट साथियों आईएएस अभय अंकुर, शशांक मिश्रा, स्वाति मीना, इरफान अजीज, आलोक तिवारी, पाशमी, अमित सैनी, स्वतंत्र कुमार, आशीष त्रिपाठी, रजत सैनी, यश मलीन, हितेंद्र राजू, पंकज पांडेय, उज्जवल ने उनके पिता बीएन तिवारी, भाई आलोक और मयंक से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। सभी ने कहा कि वे सब पूरे परिवार के साथ हैं। मौत मामले की निष्पक्ष जांच होगी। इसमें सभी सहयोग करेंगे।
दिल्ली में एक कंपनी में इंजीनियर शांतनु प्रताप सिंह अनुराग के साथी थे। उनका कहना था कि अनुराग कभी अपना मोबाइल इधर-उधर नहीं छोड़ता था। रात लगभग 12.41 बजे उसने नए नंबर से मैसेज किया। रात में वाट्सएप पर उससे काफी देर तक चैटिंग हुई।
नया नंबर लगाने की बात समझ में नहीं आई। सुबह मौत की खबर सुनी, तो अचंभे में पड़ गया। उनका कहना था कि शव के पास मोबाइल का न मिलना संदेह पैदा करता है। क्योंकि अनुराग हमेशा अपना मोबाइल साथ में ही रखता था। वह कभी मार्निंग वाक पर भी नहीं जाता था। हम लोगों के साथ कमरे पर वह दस-दस दिन रहा। पर ऐसा कभी नहीं हुआ। यह सभी बातें मौत पर सवाल खड़ा करती हैं।
आईएएस अफसर अनुराग तिवारी की मौत पर सवाल खड़े करते हुए परिवार के लोगों ने सीबीआई से मामले की जांच कराने की मांग की है। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक नहीं दिए जाने पर भी नाराजगी जताई।
आईएएस अनुराग तिवारी की मौत पर परिवारीजनों ने बुधवार से ही सवाल खड़े करने शुरू कर दिए थे। लखनऊ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अनुराग के बड़े भाई आलोक तिवारी ने अंतिम संस्कार में शामिल होने आए छोटे भाई के सभी आईएएस मित्रों से कहा कि अनुराग कर्नाटक सरकार में फैले अनाज माफिया को लेकर बड़ा खुलासा करने वाला था। जिसमें कई ब्यूरोक्रेट और सफेदपोश फंसने वाले थे।
लगभग दो हजार करोड़ रुपये का घोटाला उसने पकड़ लिया था। मामले से बचने के लिए अनुराग की आवाज को दबा दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि बुधवार को पोस्टमार्टम होने के बाद रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसे अभी तक नहीं दिया गया। पिता बीएन तिवारी भी फफक-फफक कर हर आने-जाने वाले से अनुराग की हत्या किए जाने की आशंका जताते हुए जांच की बात कह रहे थे।
विज्ञापन
शहर के कानूनगोपुरा दक्षिणी निवासी अनुराग तिवारी कर्नाटक कैडर के आईएएस अधिकारी थे। वह मसूरी से ट्रेनिंग के बाद लखनऊ के हजरतगंज स्थित मीराबाई गेस्ट हाउस में ठहरे थे। जन्मदिन के मौके पर उन्हें बुधवार को बहराइच आना था, लेकिन सुबह उनका शव गेस्ट हाउस के बाहर सड़क पर पड़ा मिला था।
विज्ञापन
पोस्टमार्टम के बाद देर रात शव कानूनगोपुरा मोहल्ले में पैतृक आवास में लाया गया, जहां अंतिम दर्शन को लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। उनकी अंतिम यात्रा गुरुवार सुबह त्रिमुहानी घाट स्थित स्वर्गधाम पहुंची। यहां जिलाधिकारी बहराइच अजयदीप सिंह व एसपी सुनील सक्सेना समेत अन्य अधिकारियों ने शव पर पुष्पचक्र भेंट कर श्रद्धांजलि दी।
विज्ञापन
चिता को मुखाग्नि उनके बड़े भाई आलोक तिवारी ने दी। डीएम हरदोई शीतल वर्मा चिता को आग देने के बाद पहुुंचीं। अंतिम बार अनुराग को न देख पाने का मलाल होने पर वह किनारे खड़ी हो गईं और बहते आंसुओं को थामने का प्रयास करने लगीं। लखनऊ के एसएसपी एसटीएफ अमित पाठक व एलडीए वीसी पीएन सिंह भी मौजूद रहे। इस मौके पर एडीएम विद्याशंकर सिंह, एएसपी दिनेश त्रिपाठी, एसडीएम सदर गौरांग राठी, आईएएस महेंद्र सिंह तंवर आदि मौजूद रहे।
कर्नाटक और महाराष्ट्र से आए अनुराग के बैचमेट साथियों आईएएस अभय अंकुर, शशांक मिश्रा, स्वाति मीना, इरफान अजीज, आलोक तिवारी, पाशमी, अमित सैनी, स्वतंत्र कुमार, आशीष त्रिपाठी, रजत सैनी, यश मलीन, हितेंद्र राजू, पंकज पांडेय, उज्जवल ने उनके पिता बीएन तिवारी, भाई आलोक और मयंक से मुलाकात कर ढांढस बंधाया। सभी ने कहा कि वे सब पूरे परिवार के साथ हैं। मौत मामले की निष्पक्ष जांच होगी। इसमें सभी सहयोग करेंगे।
दिल्ली में एक कंपनी में इंजीनियर शांतनु प्रताप सिंह अनुराग के साथी थे। उनका कहना था कि अनुराग कभी अपना मोबाइल इधर-उधर नहीं छोड़ता था। रात लगभग 12.41 बजे उसने नए नंबर से मैसेज किया। रात में वाट्सएप पर उससे काफी देर तक चैटिंग हुई।
नया नंबर लगाने की बात समझ में नहीं आई। सुबह मौत की खबर सुनी, तो अचंभे में पड़ गया। उनका कहना था कि शव के पास मोबाइल का न मिलना संदेह पैदा करता है। क्योंकि अनुराग हमेशा अपना मोबाइल साथ में ही रखता था। वह कभी मार्निंग वाक पर भी नहीं जाता था। हम लोगों के साथ कमरे पर वह दस-दस दिन रहा। पर ऐसा कभी नहीं हुआ। यह सभी बातें मौत पर सवाल खड़ा करती हैं।
आईएएस अफसर अनुराग तिवारी की मौत पर सवाल खड़े करते हुए परिवार के लोगों ने सीबीआई से मामले की जांच कराने की मांग की है। वहीं, पोस्टमार्टम रिपोर्ट अभी तक नहीं दिए जाने पर भी नाराजगी जताई।
आईएएस अनुराग तिवारी की मौत पर परिवारीजनों ने बुधवार से ही सवाल खड़े करने शुरू कर दिए थे। लखनऊ पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अनुराग के बड़े भाई आलोक तिवारी ने अंतिम संस्कार में शामिल होने आए छोटे भाई के सभी आईएएस मित्रों से कहा कि अनुराग कर्नाटक सरकार में फैले अनाज माफिया को लेकर बड़ा खुलासा करने वाला था। जिसमें कई ब्यूरोक्रेट और सफेदपोश फंसने वाले थे।
लगभग दो हजार करोड़ रुपये का घोटाला उसने पकड़ लिया था। मामले से बचने के लिए अनुराग की आवाज को दबा दिया गया। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि बुधवार को पोस्टमार्टम होने के बाद रिपोर्ट मांगी गई थी, जिसे अभी तक नहीं दिया गया। पिता बीएन तिवारी भी फफक-फफक कर हर आने-जाने वाले से अनुराग की हत्या किए जाने की आशंका जताते हुए जांच की बात कह रहे थे।